भारत एक विकासशील देश है,जहां हर इंसान को समान अधिकार प्राप्त हैं,फिर चाहे वह गरीब हो,अमीर हो,पुरूष हो अथवा महिला.इसके बावजूद देश की विडंबना यह है कि 135 करोड़ की आबादी में से महज छत्तीस प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी के दिनो में सैनिटरी पैड का उपयोग करती हैं.

केवल दूरदराज के गाँवों में ही नही बल्कि देश के अत्याधुनिक शहरों में गरीबी से जूझ रही झुग्गियों में रहने वाली यह महिलाएँ,माहवारी के दिनों में स्वच्छता व बेहतर स्वास्थ्य के मूलभूत अधिकारों की अनदेखी कर भूख और सुरक्षा जैसे मुद्दों से त्रस्त हैं.इन्हीं महिलाओं तक सैनीटरी पैड पहुॅचाने की दिशा में काम करने का निर्णय लेकर 16 वर्षीय इंटर्न समृद्धि बजाज ने एक नया कदम उठाते हुए यूथ फॉर ग्लोबलपीस एंडट्रांसफॉर्मेशन (ल्ळच्ज्) की शुरुआत की.

Tags:
COMMENT