प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने जो महत्त्वपूर्ण बातें कहीं उन में से एक यह बात भी थी कि नौकरशाह अपनी संपत्ति का ब्योरा दें. बात नई नहीं है, पिछली यूपीए सरकार भी अपने कार्यकाल में आईएएस अधिकारियों को इसी तरह हड़काती रहती थी लेकिन इस का कोई खास असर उन पर नहीं होता था. मौजूदा एनडीए सरकार उन्हें संपत्ति के ब्योरे की बाबत बाध्य कर पाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा. सरकार के पास अपनी संपत्ति का विवरण हर साल जमा करना अब हर कर्मचारी व अधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी बना दी गई है. ऐसा न करने पर सरकार उन के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है. इस कानून का सीधा संबंध देश में पनप रहे भ्रष्टाचार और घूसखोरी से है. मिलने वाले वेतन से कर्मचारीअधिकारी कितनी जायदाद बना सकते हैं, यह भले ही सरकार तय न कर पाए लेकिन यह तो तय कर ही सकती है कि कितनी जायदाद आमदनी से ज्यादा थी.

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