सारी जानकारियां भोपाल के थाना निशातपुरा के टीआई मनीष मिश्रा की मेज पर थीं, जो उन्हें मुखबिरों से मिली थीं. इस के लिए उन्होंने अपने मुखबिरों का जाल काफी पहले से फैला रखा था. शहर का किनारा होने की वजह से थाना निशातपुरा में आए दिन हर तरह के अपराध हुआ करते थे, जिस की वजह से यहां के पुलिसकर्मियों की किस्मत में सुकून नाम की चीज नहीं थी.

मनीष मिश्रा को जानकारी यह मिली थी कि इलाके की हाउसिंग बोर्ड कालोनी के डुप्लेक्स नंबर 55, जो त्रिवेदी हाइट्स के पीछे था, में धड़ल्ले से देहव्यापार हो रहा है. सूचना चूंकि भरोसेमंद मुखबिर ने दी थी, इसलिए किसी तरह का शक करने की कोई वजह नहीं थी. लेकिन जरूरी यह था कि कालगर्ल्स और ग्राहकों को रंगेहाथों पकड़ा जाए, क्योंकि छापों में पकड़ी गई कालगर्ल्स और ग्राहक अकसर सबूतों के अभाव में छूट जाते हैं, जिस से छिछालेदर पुलिस वालों की होती है.

मनीष मिश्रा ने मुखबिरों से मिली जानकारी सीएसपी लोकेश सिन्हा को दी तो उन्होंने आरोपियों को रंगेहाथों पकड़ने के लिए एक टीम गठित कर दी, जिस में महिला थाने की थानाप्रभारी शिखा बैस को भी शामिल किया. टीम ने छापे की पूरी तैयारी कर के देहव्यापार के धंधे के उस अड्डे पर 10 फरवरी को छापा मारने का निर्णय लिया.

छापा मारने से पहले एक युवा हवलदार रमाकांत (बदला हुआ नाम) को ग्राहक बना कर हाउसिंग बोर्ड कालोनी के डुप्लेक्स नंबर 55 पर भेजा गया. रमाकांत इस बात से काफी रोमांचित और उत्साहित था कि उसे यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. जबकि सहकर्मी मजाक में कह रहे थे, ‘देख भाई, संभल कर रहना और याद रखना तू फरजी ग्राहक बन कर जा रहा है. सुंदर लड़की देख कर कहीं सचमुच का ग्राहक मत बन जाना.’

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