‘‘बाबूजी, अबही हमर बियाह न करो. हम घर छोड़के कहीं नहीं जाइबो. बाबूजी, हमका घर से न निकालो. अम्मा, तुम कुछ करो न. तुम कुछ काहे नहीं बोलती हो.’’ रोतीबिलखती 11 साल की रिंकी अपने मांबाप से गुहार लगा रही है, पर उस के आंसुओं से किसी का भी दिल नहीं पिघलता. रिंकी के तमाम रिश्तेदार और गांव वाले चुपचाप खड़े तमाशा देखते रहे. एक बुजुर्ग ने उलटा रिंकी को ही डांटते हुए कहा, ‘‘बियाह नहीं करेगी तो का जिंदगीभर बाप के घर बैठ कर रोटी तोड़ेगी? रोने से कुछ नहीं होगा. बियाह कर और बाप का बोझ हलका कर.’’

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