पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के जिलिंग गांव में दुर्गामणि बास्के व उर्मिला हांसदा नामक 2 बूढ़ी आदिवासी औरतों पर ‘डायन’ बता कर जुल्म ढाए गए. ओझा और जानगुरु के कहने पर इन दोनों औरतों की लातघूंसों व झाड़ू से जम कर पिटाई की गई. इतना ही नहीं, इन को मुरगे का खून पिलाया गया और बिना कपड़ों के पूरे गांव में नचाया गया. आदिवासी प्रभावित शाशंगडी महल्ले के दिहाड़ी मजदूर बंकिम चंद्र टुडू की बड़ी बेटी चंचला टुडू जिलिंग हाईस्कूल में छठी क्लास की छात्रा थी. वह कई दिनों से बीमार थी. इलाज के लिए उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.

वहां जांच करने के बाद चंचला को पुरुलिया के सदर अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उस का सीटी स्कैन और ऐक्सरे किया गया. फिर भी उस की बीमारी का पता नहीं चला. उसे घर लाया गया, पर 2-3 दिन बाद वह फिर बीमार पड़ गई. चंचला के घर वालों ने सोचा कि कहीं चंचला पर किसी ‘डायन’ की बुरी नजर तो नहीं पड़ी है. इस की जांचपड़ताल के लिए स्थानीय ओझा व झारखंड के गाड़ोवाल गांव के जानगुरु बानेश्वर महतो को बुलाया गया. ओझा और जानगुरु ने चंचला की झाड़फूंक की और गांव वालों से कहा कि वह ‘डायन’ की बुरी नजर का शिकार बन गई थी, लेकिन अब झाड़फूंक के बाद ठीक है. साथ ही, यह भी कहा गया कि दुर्गामणि और उर्मिला ही ‘डायन’ हैं. इन ‘डायनों’ ने चंचला को अपनी शिष्या बनाने के लिए उस के कान में ‘डायन विद्या’ का मंत्र पढ़ दिया था, जिस से वह बीमार हो गई.

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