मायावती, अखिलेश की तर्ज पर चलते योगी आदित्यनाथ भी अपने वोट बैंक को खुश करने के लिये मूर्तियां, पार्क और नाम बदलने की राजनीति कर रहे है. ऐसा करने से पहले उनको इनकी हार से भी सबक लेना चाहिये. इन नेताओं की हार बताती है कि प्रदेश की जनता को दिखावे की राजनीति कभी पंसद नहीं आती है. बहुमत की सरकार अगले ही चुनाव मे ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती है. योगी सरकार का प्रदर्शन 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी की राह में बाध डाल सकता है.

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