पार्टी विथ डिफरेंस का दम भरती रहने वाली भाजपा के अनुशासन के बम जो दिवाली के दूसरे दिन फूटे तो भोपाल से दिल्ली और नागपुर तक में उनकी गूंज सुनाई दी. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और पूर्व केंद्रीय मंत्री सरताज सिंह विधानसभा चुनाव लड़ने अड़ गए थे लेकिन आलाकमान ने उनके टिकिट होल्ड पर रख दिये थे.  मंशा यह थी कि ये दोनों उम्र दराज नेता थक कर चुप हो जाएंगे या फिर मनाने पर मान जाएंगे. बाबूलाल गौर अपनी परंपरागत सीट गोविंदपुरा भोपाल से लड़ना चाहते थे जहां से वे दस बार से विधायक हैं और सरताज सिंह अपनी सीट सिवनी मालवा से लड़कर विधानसभा पहुंचना चाहते थे.

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