Sonia Gandhi Book: भारत की राजनीति में सोनिया गांधी का कद आज भी ऊंचा है. वह बेशक कभी प्रधानमंत्री नहीं बनी लेकिन यूपीए सरकार के दौरान यानी साल 2004 से 2014 के बीच सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही मनरेगा, RTI क़ानून, औरतों को संपत्ति में बराबरी का अधिकार और घरेलू हिंसा उन्मूलन जैसे तमाम क़ानून बने जिससे लोकतंत्र और लोकतंत्र में आम जनता की भागीदारी और मजबूत हुई. 10 नवंबर को सोनिया गांधी के जीवन पर लिखी किताब रिलीज होने वाली है और इस किताब के विमोचन से पहले ही यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है.
2004 के लोकसभा चुनाव में UPA को बहुमत मिला. सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं और गठबंधन के सभी साथियों का समर्थन भी उनके पास था. देश, मीडिया और खुद कांग्रेस के कार्यकर्ता मानकर चल रहे थे कि अब सोनिया ही पीएम बनेंगी लेकिन फिर सोनिया ने अचानक मना कर दिया. उन्होंने अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और अंबिका सोनी को अलग-अलग फोन करके बताया कि वो पीएम की कुर्सी नहीं लेंगी. उन्हें लगा कि उनका विदेशी मूल का होना नई सरकार को कमजोर कर देगी. सोनिया ने अपने इस फैसले को अंतरात्मा की आवाज कहा और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया. 2006 में अमेरिका की फर्स्ट लेडी मारिया श्राइवर से मुलाकात में भी उन्होंने कहा था - "मैं इस बात को लेकर बेहतर महसूस करती हूं कि कोई और PM बन गए. मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है"
राजीव गांधी से शादी के बाद सोनिया 1968 में इटली से भारत आई. वह राजनीति से हमेशा दूर रहीं लेकिन पति की मौत के बाद 90 के दशक के आखिरी सालों में उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा. साल 2006 की एक सीक्रेट यूएस केबल के मुताबिक उन्होंने खुद कहा था कि BJP और दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ने से कांग्रेस कमजोर पड़ गई थी और गांधी परिवार की विरासत बचाने के लिए उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा.
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