The One Movie: बीते कुछ सालों में ऐसे बिना सिरपैर के विषयों को ले कर फिल्में बनाने का चलन सा चल पड़ा है जो अंधविश्वास या प्रोपगेंडा परोसने में जरा भी गुरेज नहीं करतीं. इसी फेहरिस्त में दीपक मिश्रा निर्देशित फिल्म ‘द वन’ भी आती है. यह फिल्म विकास बनाम पर्यावरण की लड़ाई या निसंतान दंपती का दर्द दिखाने नहीं आई है, बल्कि फैंटेसी के नाम पर अंधविश्वास और डर बेचने का काम करती है.

कहानी मुंबई में रहने वाले एक आधुनिक इंजीनियर ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और उस की पत्नी ममता (तमन्ना भाटिया) की है. 6 साल पहले पूर्वांचल के अपने गांव देवांचल के एक पवित्र जंगल में हादसा हुआ था, जिस में ममता का गर्भपात हो गया. उस हादसे के बाद से ऋषि का भगवान से भरोसा उठ जाता है. दोनों वर्षों से बच्चे के लिए तरस रहे हैं और आईवीएफ के लिए लोन का इंतजाम करने में जुटे हैं. इसी बीच, ऋषि जमीन का सौदा पक्का करने के लिए अपने बड़े भाई (अनूप सोनी) के पास गांव लौटता है. साथ में उस का दोस्त वेद (मनीष पौल) भी जाता है.

गांव के पास मौजूद जंगल का एक ही नियम है कि सूरज ढलते ही कोई अंदर नहीं जाएगा. गांव का एक प्रभावशाली शख्स दीपक (सुनील ग्रोवर) वहां से सड़क निकालना चाहता है. ऋषि शुरू में विकास के नाम पर इस प्रोजैक्ट का समर्थन करता है, पर गांव वाले वन देवी के प्रकोप से डर कर इस का विरोध करते हैं. इस के बाद शुरू होता है अंधविश्वास, भूतप्रेत और चमत्कारों का ऐसा खेल जो हर तार्किक सोच की धज्जियां उड़ा देता है.

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