ऐसा पहली मर्तबा नहीं हो रहा है इससे पहले भी हम अन्नदाताओं के सीने छलनी होते देख चुके है. सियासतदानों के वादों और चुनावी घोषणा पत्रों में किसानों की हिमायतगार बनने वाले ये नेता हमेशा से ही इस वर्ग से फरेब करते आए हैं. ताजा मामला है उन्नाव से. जहां पर किसान अपनी जमीन का उचित मुआवजा मांगने के लिए सड़कों पर आ गए थे. किसानों का आंदोलन बढ़ता देख यूपी पुलिस ने निहत्थों पर वार करना शुरू कर दिया. पुलिस की लाठी ने बिना भेदभाव किए सबकों एक तराजू में तौल दिया. कौन बुजुर्ग, कौन महिला सबको मारकर तितर-बितर किया गया. हो सकता हो इसमें प्रशासन का ये कहना हो कि शांति व्यवस्था बनाने के लिए ऐसा करना पड़ा. हम उस चर्चा में जाकर आपका और अपना समय व्यर्थ ही बर्बाद नहीं करूंगा. खास बात तो यह है कि जिस वक्त किसानों और पुलिस के बीच ये सब हो रहा था उस दौरान सीएम योगी गोरखपुर में किसानों को ही संबोधित कर रहे थे.

Tags:
COMMENT