Maharashtra Freedom of Religion Act 2026: महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार ने “महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026” क़ानून पारित कर संविधान के आर्टिकल 21 और 25 पर सीधा हमला बोला है. यह क़ानून लोगों की धार्मिक और व्यक्तिगत आजादी को जुर्म साबित करता है साथ ही यह औरतों की आजादी के खिलाफ एक गहरी साजिश भी है हालांकि भारत की महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस क़ानून को मंजूरी दे दी है. अब राज्य सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी करते ही यह कानून लागू हो जाएगा.
मार्च 2026 में विधानसभा के बजट सत्र में विधेयक पेश किया गया था. 13 मार्च को लाया, 16 मार्च को विधानसभा और 17 मार्च को विधान परिषद से पास कर दिया गया और अब इस क़ानून पर राष्ट्रपति की मुहर भी लग गई. न कोई गंभीर चर्चा हुई और न ही जनता की राय ली गई. सिर्फ तीन-चार दिनों में कानून बना दिया जबकि सुप्रीम कोर्ट में ऐसे ही कानूनों की वैधता पर पहले से सुनवाई चल रही है. बीजेपी सरकार ने ऊपरी अदालत की परवाह किए बिना जनता पर कानून के रूप में अपनी कुंठित मानसिकता थोप दी.
असल में यह धर्म परिवर्तन रोकने के बहाने आम जनता की आजादी, धर्म की स्वतंत्रता और औरत को बराबरी का दर्जा देने वाली संवैधानिक सोच का गला घोंटने वाला क़ानून है. इस क़ानून पर राष्ट्रपति मुर्मू की मुहर लगते ही महाराष्ट्र ऐसा कानून बनाने वाला 13वां राज्य बन गया है. बाकी के 12 राज्य भी बीजेपी के हैं. आरएसएस की विचारधारा वाले ये कानून हर जगह एक जैसे हैं.
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