यकीन नहीं होता, पर करना पड़ता है कि ये वही राघव जी भाई हैं, जिनके आगे पीछे 4 साल पहले तक समर्थकों, अधिकारियों और आम जनता की फौज हुआ करती थी, पर एक गलती उनसे क्या हुई कि अब अपने भी साथ नहीं दिखते. मध्य प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राघव जी भाई का अपना एक अलग सियासी रुतबा  हुआ करता था. आरएसएस में भी उनकी गहरी पैठ थी, भाजपा संगठन का कोई भी अहम फैसला बिना उनकी सहमति के नहीं होता था.

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