झूठी और प्रोपेगेंडा खबरों के जरीये जनता में भ्रम फैलाया जा रहा है. जिससे आम आदमी तक सही सूचनायें नहीं पहुंच पा रही है. हर तरह से आम आदमी इसका शिकार हो रहा है. इलेक्ट्रानिक मीडिया तो इसका पहले से ही शिकार था. भरोसेमंद कहा जाने वाला प्रिंट भी इसका हिस्सा बन गया. आम आदमी को लगा कि सोशल मीडिया पर सही खबरे आ रही है. फेसबुक विवाद के बाद अब आम आदमी के पास कोई रास्ता नहीं रह गया जहां से वह सच्ची खबरे हासिलकर सके. अदालत ने भी माना है कि ‘प्रोपेगेंडा‘ के लिये खबरों को ‘फैब्रिकेट‘ किया जा रहा है. बांबे हाई कोर्ट ने तबलीगी जमात पर मीडिया की खबरों को साफ षब्दों में ‘प्रोपेगेंडा’ कहा है.

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