कांग्रेस में इन दिनों ऐतिहासिक सन्नाटा है. 17 वीं लोकसभा समर में बुरी तरह पराजय के बाद मानो कांग्रेस मरणासन्न हो चुकी है. आलाकमान राहुल गांधी के हाथों से मानो तोते ही उड़ गए हैं. श्रीमती सोनिया गांधी जिनके पास राजनीति का दीर्घ अनुभव माना जाता है वे भी हतप्रभ हैं. खामोश है. कांग्रेस के तुरुप के पत्ते प्रियंका गांधी, ने भी मौन धारण कर रखा है. मानो यह गांधी परिवार के लिए पक्षाघात का समय है. दो माह गुजर चुके हैं 25 मई 2019 को राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है मगर कांग्रेस को कुछ सूझ ही नहीं रहा है कि आखिर वह करें तो क्या करें और जाएं तो कहां जाएं. ऐसे में गांधी परिवार से एक नाम इन दिनों पुन: उभर कर आया है- वह है प्रियंका गांधी वाड्रा का. प्रियंका गांधी ने जैसे तेवर सोनभद्र मामले में दिखाएं कांग्रेसियों की बांछें खिल गई है. उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेर कर दिखा दिया की प्रियंका गांधी में वह जज्बा है वह आग है जो कांग्रेस के सर्वमान्य नेता में होनी चाहिए.

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