दशक 1990-2010 के बीच सिनेमाई पर्दे पर ऐसी कई फ़िल्में देखने को मिल जाती थी जिसमें सियासत और बाहुबल का मेलजोल खूब होता था. फिल्मों में नेता किस तरह से अपने वोटों के लिए स्थानीय बाहुबलियों को पालपोंस कर बड़ा करते थे और फिर अपने मतलब से उनका राजनीति में इस्तेमाल करते थे. बचपन में ऐसी फ़िल्में देख कर लगता था कि “इतना भी क्या नेता-गुंडों में सांठगांठ होता होगा, ये फ़िल्में कुछ ज्यादा ही दिखा देती हैं.” लेकिन अब सोच कर लगता है कि यह सिनेमा कहीं न कहीं इसी समाज की हकीकतों से होकर गुजरता है.

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