बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार और भतीजे आकाश आनंद को जब पार्टी में शामिल किया तो राजनीति में परिवारवाद की चर्चा मुखर हो गई. राजनीति और राजनेताओं को देखें तो साफ लगता है कि राजनीति में परिवारवाद कोई मुद्दा नहीं रह गया है. जनता ने भी इसे स्वीकार कर लिया है.

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