राहुल गांधी  को जब अपनेआप को सियासी तौर पर चार्ज करना होता है तो वे सीधे बुंदेलखंड पहुंच जाते हैं जहां गले लगाने के लिए गरीब आदमी इफरात में मिल जाते हैं. यूरोप में छुट्टियां मना कर लौटते ही बीते दिनों उन्होंने यही किया और पीएम नरेंद्र मोदी को ललकार दिया कि देखो, गरीबों की तरफ देखो.

इधर, नरेंद्र मोदी बहुत व्यस्त हैं. कभी वे विदेश जाते हैं तो कभी विदेशियों को यहां बुला लेते हैं. ऐसे में गरीबों को देखने की जिम्मेदारी उन्होंने विपक्षियों पर ही छोड़ दी है. गरीबी कभी बड़ा राजनीतिक मुद्दा हुआ करती थी अब नहीं है. इस की वजहें कुछ भी हों, चलन में नहीं रही. इसलिए आजम खान राहुल गांधी को पप्पू कहते हुए चौकलेट खाने का मशवरा देते हैं. जाहिर है राहुल को सही दिशा नहीं मिल रही, जिस पर चल कर वे अपनी राजनीति चमका पाएं.

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