लाखों में एक बहनोई मुश्किल से मिलेगा जो ईमानदारी से दिल पर हाथ रखकर कह पाये का हां उसका साला बहुत तो नहीं पर अच्छा है इसके बाद भी जाने क्यों लोग बड़ी चुटकियां लेकर यह कहावत दोहराते रहते हैं कि सारी दुनिया एक तरफ और जोरू का भाई एक तरफ. पत्नी एक दफा सलीके की न हो तो भी ज़िंदगी जैसे तैसे रोते झींकते गुजर जाती है लेकिन साला अगर तिरछा आड़ा हो तो ज़िंदगी कितनी दुश्वार हो जाती है यह सब टीवी के मनोरंजक धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा के केंद्रीय पात्र जेठालाल को देख समझा जा सकता है जिसका साला सुंदर जब भी अहमदाबाद से मुंबई आता है जीजा के लिए एक नई मुसीबत लेकर आता है. इसीलिए जेठलाल उसे पनौती कहकर बुलाता है.

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