5 हजार साल से अधिक के इतिहास में 2007 में शायद पहली बार देश के किसी हिस्से में दलितों की अगुआई में बहुमत से सरकार बनी थी. दलित और उस से जुड़े लोग इसे बदलाव की नई बयार के रूप में देख रहे थे. इस के पहले तक दलित ऊंची जातियों के नीचे काम करता था. उस को सत्ता तो दूर, बराबर में बैठने और खाने व पीने का भी अधिकार नहीं था. न वह ऊंची जातियों की तरह खुशियां मना सकता था और न ही दुखों को जाहिर कर सकता था.

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