महाराष्ट्र का घटनाक्र्रम केवल एक राजनीतिक ड्रामा नहीं था बल्कि इस में इतिहास की भी झलक साफसाफ दिखी. अब सारे सूत्र उस वर्ग के हाथ में हैं जो सदियों से पंडापुरोहितवाद से त्रस्त है. उस वर्ग ने महाराष्ट्र में भाजपा के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा रोक लिया है.

‘अंत भला तो सब भला’ की तर्ज पर महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा आखिरकार 28 नवंबर की शाम खत्म हुआ, जब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. लेकिन यह अंत एक ऐसा प्रारंभ ले कर भी आता दिख रहा है जिस का गहरा संबंध महाराष्ट्र के इतिहास, जातिगत लड़ाइयों और समाज के अलावा धर्म से भी है.

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