इस मामले में जो हो गया वह ज्यादा अहम है या वह जो हो रहा है या कि फिर वो जो होना होना बाकी रह गया है , ये तीनों ही बातें एक दूसरे से कुछ इस तरह गुंथी हुई है कि इन्हें अभी अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि इस मामले को उलझाने बाले खुद ही कुछ ऐसे उलझ गए हैं कि गिट्टी अब उनसे सुलझाए नहीं सुलझ रही  .  मामला अब रहस्य रोमांच भरे सरीखे उपन्यास जैसा हो चला है जिसे तीन चौथाई पढ़ने के बाद पाठक समझ जाता है कि अब उसे अपने अंदाजे की पुष्टि भर करना है .

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