नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपियों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई से संबंधित वसूली के लिये उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सार्वजनिक स्थान पर लगाये गये पोस्टर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और कोर्ट आमने सामने है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंसा के आरोपियों के सडको पर लगे पोस्टर के संबंध में कहा कि सडको पर किसी भी नागरिक का पोस्टर लगाना उनके सम्मान, निजता और स्वतंंत्रता के खिलाफ है. पब्लिक प्लेस पर संबंधित व्यक्ति की अनुमति के बिना फोटो या पोस्टर को लगाना गैर कानूनी है. यह निजता के अधिकार का भी उल्लघंन है.कोर्ट ने लखनऊ प्रशासन और पुलिस की दलील पर नाराजगी जताते हुये कहा कि 16 मार्च तक यह पोस्टर सडको से हट जाने चाहिये.

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