ब्राजील में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2014 में आर्थिक उपलब्धियों की दिशा में उठाए गए कदमों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफलता के कसीदे काढ़े जा रहे हैं. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में ब्रिक्स सम्मेलन पर बयान दे कर भारत को होने वाले फायदे गिनाए तो विपक्षी कांग्रेस के एक अहम नेता व पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम विकास बैंक की स्थापना किए जाने के निर्णय पर खुशी जता रहे हैं. असल बात यह है कि ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहली बार पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई अलग भारत का रुतबा नहीं गांठ पाए.

विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाले 5 देशों--ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह यानी ‘ब्रिक्स’ के शिखर सम्मेलन में आर्थिक पक्ष में कुछ सार्थक फैसले जरूर लिए गए पर दुनिया की मौजूदा दूसरी जटिल चुनौतियों पर इन देशों के बीच कोई गंभीर मंत्रणा नहीं हुई. ब्रिक्स के पांचों ही देश वर्तमान में आर्थिक मसलों से ज्यादा अंदरूनी राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक संकटों से अधिक जूझ रहे हैं. आज जब विश्व में इराक, सीरिया, इसराईल, फिलिस्तीन, यूक्रेन, रूस समेत ईरान, सूडान, मिस्र से ले कर अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान तक मजहबी मुसीबतें बेकुसूरों की जानें ले रही हैं, ऐसे में मोदी इस मंच से विश्व को झकझोरने से चूक गए. ऐसे में भारत अपना कोई अलग प्रभाव नहीं छोड़ पाया जबकि आशा थी कि वे भारत की नई छवि पेश करेंगे.

सम्मेलन में मोदी ने मौजूदा चुनौतियों की बात नहीं की, जो इस समय में विश्व के सामने जटिल स्थिति पेश कर रही हैं. हालांकि विश्व के सब से बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के इस नेता को इन देशों के राष्ट्रप्रमुख बड़ी उत्सुकता से देख रहे थे कि हाल में भारी बहुमत से जीत कर आए नरेंद्र मोदी शायद कोई दूर की कौड़ी ले कर आए हों. इतना जरूर हुआ कि मोदी को इस बार देश की गरीबी, पिछड़ापन, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास, बलात्कार और विभिन्न जातियों व वर्गों में बंटे समाज की समस्याओं की वजह से शर्मिंदगी और हीनता का शिकार नहीं होना पड़ा. इस सम्मेलन की कुछ उपलब्धियां गिनाई जा रही हैं, उन में ब्रिक्स देशों का 100 अरब डौलर का अपना अंतर्राष्ट्रीय विकास बैंक स्थापित किया जाना और विदेशी मुद्रा भंडार की घोषणा शामिल हैं. बैंक का मुख्यालय चीन के शंघाई में होगा और पहले 6 साल बैंक का मुखिया कोई भारतीय होगा. विकास बैंक का राग विकास बैंक का सपना कोई आज का नहीं है. विकास बैंक की स्थापना की रूपरेखा काफी पहले बन चुकी थी. 2012 में भारत में ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन से पहले नई दिल्ली में ब्रिक्स अकादमी फोरम की बैठक हुई थी, उस की मेजबानी दिल्ली के थिंक टैंक औब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने की थी. उस में पहली बार विकास बैंक या निवेश फंड की स्थापना और औपरेशन पर विचार की सलाह दी गई थी.

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