CJP Protest: इतिहास में त्रेतायुग से लेकर आजादी की लड़ाई तक जितनी भी लड़ाइयाँ हुई है वे सिर्फ सत्ता के लिए हुई हैं. राम रावण का युद्ध भी सत्ता के लिए था और कौरव पांडव भी कुरुक्षेत्र में किसी तत्कालीन एसआईआर को लेकर आमने सामने नहीं आ खड़े हुए थे. तब मुद्दा हस्तिनापुर की गद्दी था जो दिल्ली से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है. अब इसी दिल्ली में जेन जी प्रोटेस्ट पार्ट -2 की तैयोरियों को भी देश बड़ी दिलचस्पी से देख रहा है कि 10 अक्तूबर को क्या होगा. बिलाशक रोमांच पूरे देश में वन डे क्रिकेट मेच के स्लाग ओवर्स सरीखा है.

जेन जी वानर सेना की तरह कमर कस चुकी है कि `ज्ञानू` ( सीईसी ज्ञानेश कुमार को प्यार से वह इसी नाम से पुकारती है ) के इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं. उधर भक्त, अभक्त और तटस्थ तीनों की संयुक्त राय यह है कि प्रोटेस्ट तो यह भी तगड़ा होगा, लेकिन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की संभावना कम है. हालाँकि यही बात जुलाई के प्रोटेस्ट के दौरान भी कही गई थी कि कुछ भी हो जाए जिद्दी मोदी और उनकी सरकार धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफ़ा नहीं करवाएंगे.

लेकिन इस्तीफ़ा हो ही गया तो हर कोई काकरोचों और जेन जी के इस जॉइंट वेंचर का कायल हो गया जिसमे कांग्रेस सहित कुछ और विपक्षी दल गेस्ट रोल में थे. प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी मुखिया अभिजीत दिपके ने भीमराव आम्बेडकर को कुछ उसी अंदाज में प्रणाम निवेदन किया था जैसे राम और कृष्ण किसी भी जीत के बाद शंकर और विष्णु के आगे झुकते थे.

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