देश में आजादी का मतलब महज सरकार चुनने भर से नहीं है बल्कि देश में किसी नागरिक द्वारा सम्मानपूर्वक जीवन जीने से भी है. पिछले कुछ समय से जाति और धर्म आधारित भेदभाव देखने को खूब मिल रहे हैं. जहां जाति धर्म के आधार पर एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को कुचलते हुए देखा जा सकता है. और सरकार इन मामलों में सिर्फ ओपचारिक बयान देने के अलावा मूलभूत कदम नहीं उठा रही है.

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