तीन प्रमुख हिन्दी भाषी राज्यों मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अब गठबंधन की कहानी खत्म हो गई है और यह हो गया है कि अब सीधी टक्कर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगी कुछ सीटों पर बसपा और दूसरे छोटे दल फर्क डालेंगे लेकिन उससे कांग्रेस की सेहत पर उतना फर्क नहीं पड़ना जितना कि गठबंधन होने से पड़ता. गठबंधन क्यों परवान नहीं चढ़ पाया या चढ़ने नहीं दिया गया इस का ठीकरा भले ही बसपा प्रमुख मायावती के सर फोड़ा जा रहा हो कि वे मनमानी और सौदेबाजी पर उतर आईं थीं लेकिन अब धीरे धीरे साफ हो रहा है कि दरअसल में खुद कांग्रेस भी नहीं चाहती थी कि वह छोटे मोटे दलों से हाथ मिलाकर चुनाव लड़े.

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