बेंगलुरु की रहने वाली चित्रा मैगीमैराज ने ब्रिटेन के लीड्स शहर में आयोजित विश्व महिला स्नूकर एवं बिलियर्ड्स प्रतियोगिता में बिलियर्ड्स का सीनियर वर्ग का खिताब जीत कर इतिहास रच दिया. इस टूर्नामैंट में 13 देशों के खिलाडि़यों ने भाग लिया था.

अपने खेल का शानदार परफौर्मेंस दिखाते हुए चित्रा ने सभी चारों मैचों में जीत हासिल की. सेमीफाइनल के मुकाबले में उन्होंने हमवतन उमा देवी को 2-0 से हरा कर फाइनल में प्रवेश किया. फाइनल मुकाबले में उन्होंने बेलारूस की एलेना अस्मोलावा को 3-0 से हरा कर खिताब अपने नाम कर लिया.

41 वर्षीय चित्रा इस से पहले हौकी की खिलाड़ी थीं. वे हौकी में चैंपियन बनना चाहती थीं. लेकिन वर्ष 1993 में घुटने में चोट लगने के कारण उन का सपना टूट गया. कई डाक्टरों के इलाज करने के बाद भी चित्रा का पैर ठीक न हो सका. चित्रा अब चाह कर भी हौकी नहीं खेल सकती थीं क्योंकि अब उन का पांव साथ नहीं दे रहा था. वे छटपटा रही थी कि अब करूं तो करूं क्या. तभी उन की नजर बिलियर्ड की ओर गई जहां भागना नहीं पड़ता है.

आमतौर पर 28-29 साल में खिलाड़ी थक जाते हैं और रिटायर्ड होने की बात मन को घेरने लगती है पर चित्रा के जज्बे को सलाम क्योंकि उन्होंने पांव को अपनी कमजोरी की ढाल नहीं बनाया बल्कि धैर्य व लगन से बिलियर्ड खेल में फोकस किया. उस के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर टूर्नामैंट में हिस्सा लिया और उन की मेहनत रंग लाई. वर्ष 2006 में उन्होंने वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने के बाद अगले वर्ष भी खिताब बरकरार रखा. इस के अलावा उन्होंने विश्व महिला स्नूकर ऐंड बिलियर्ड्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित टूर्नामैंट में कई स्वर्ण और रजत पदक भी हासिल किए हैं.

चित्रा जैसी हर कोई नहीं हो सकती, उन्होंने यह साबित भी कर दिखाया.

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