एक ओर जहां यूरोप, अमेरिका व चीन मुक्केबाजी में दिनोंदिन तरक्की कर रहा है वहीं भारतीय मुक्केबाजी मुश्किल दौर से गुजर रही है. पिछले दिनों नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल के बाद चयन समिति के सदस्यों ने इस वर्ष होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के लिए विश्व चैंपियन और ओलिंपिक कांस्य विजेता एम सी मैरीकौम को संभावित खिलाडि़यों के कोर ग्रुप में शामिल कर लिया.

मैरीकौम के अलावा 6 अन्य मुक्केबाजों को 50 किलोग्राम भार वर्ग के लिए चुना गया जबकि 75 किलोग्राम भार में 4 और 60 किलोग्राम भार में 7 खिलाडि़यों को चुना गया. खिलाडि़यों का चुनाव तो समिति के सदस्यों ने कर लिया पर वे संतुष्ट नहीं थे. राष्ट्रीय चयनकर्ता और अर्जुन अवार्डी मुहम्मद अली कमर का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय निलंबन के बाद भारतीय मुक्केबाजी मुश्किल दौर से गुजर रही है और इस कारण नई प्रतिभाएं उभर कर सामने नहीं आ रही हैं. इस दौरान खेल की हालत भी बहुत खराब है. उन का कहना है कि बीजिंग ओलिंपिक में हम ने जो लय हासिल की थी वह गंवा दी है.

दरअसल, मुहम्मद अली की यह चिंता  जायज है क्योंकि यह तो पक्का है कि उन के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं और उन के पास जो विकल्प हैं उन में से ही चुनाव करना उन की मजबूरी है.

एक समय था जब हम मुक्केबाजी में लगातार बेहतर कर रहे थे पर अब ऐसा नहीं है. चीन का मुक्केबाजी में बहुत बड़ा नाम है ऐसा नहीं है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चीनी खिलाडि़यों के साथसाथ वहां के खेल पदाधिकारियों ने दिलचस्पी दिखाई और अब उस का नतीजा भी सामने आने लगा है. चीनी खिलाड़ी दिनोंदिन इस में प्रगति कर रहे हैं और हम पिछड़ते जा रहे हैं.

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक और ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले मुक्केबाज विजेंदर सिंह पर डोपिंग और ड्रग के साए मंडरा रहे हैं और उन का कैरियर भी दांव पर लगा हुआ है.

सुकून वाली बात यह है कि हमारे पास मैरी कौम जैसी मुक्केबाज हैं लेकिन अब उन की उम्र हो चली है और ऐसे में नईनई प्रतिभाओं को खोजना बहुत जरूरी है वरना आने वाले समय में मुक्केबाजी से हम कोसों दूर हो जाएंगे.

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