सुप्रीम कोर्ट से लेकर सरकार तक कह चुकी है कि भीड़तंत्र का आतंक खत्म होना चाहिये. बुलंदशहर की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ‘भीड़तंत्र’ कानून और प्रशासन दोनों पर हावी है. बुलंदशहर में वहां के कोतवाल को जिस तरह से मारा गया वह ‘भीड़तंत्र’ के दुस्साहस का प्रतीक है. बुलंदशहर की  घटना बड़ी जरूर है पर भीड़तंत्र के हावी होने की छोटी छोटी घटनायें कम नहीं हैं.

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