मध्यप्रदेश को भाजपा और आरएसएस की प्रयोगशाला है जो हिंदी भाषी राज्यों में गुजरात के पहले भी हिंदुत्व का सबसे मजबूत गढ़ रहा है. पूना से आए मराठे शासकों ने यहां के मुस्लिम शासकों को हरा कर 18 वीं सदी में राज ही नहीं किया था, कट्टरवाद उत्तर प्रदेश से लाए गए पंडितों की मार्फत गांव गांव तक फैलाया था.
जब कांग्रेस की सरकारें थीं तब भी हिंदू ऊंची जातियों के कट्टर नेता ही मुख्यमंत्री बनते रहे थे. उसके बाद पहले हिन्दू माहसभा फिर जनसंघ और फिर भाजपा इस राज्य में नुकसान में तभी रहे हैं जब पिछड़ों दलितों और आदिवासियों ने उनसे मुंह मोड़ा है . लेकिन पिछले 23 साल से अपवाद स्वरूप ही ऐसा हुआ है कि इन तबकों ने भाजपा को वोट नहीं किया .
साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वापसी हुई थी लेकिन पूजापाठी ज्योतिरादित्य सिंधिया के 24 विधायकों सहित कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो जाने से वह मौका भी कांग्रेस के हाथ से फिसल गया था .
इन दिनों एक नया प्रयोग भाजपा ने किया है वह है दिग्गज नेता `पंडित` नरोत्तम मिश्रा को दतिया विधानसभा सीट से उपचुनाव में मौका न देने का . उनकी जगह बेहद कम लोकप्रिय आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा गया है . पिछली सरकार में भाजपा के गृहमंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों साढ़े सात हजार वोटों से ज्यादा से शिकस्त झेलना पड़ी थी .बाद में जैसा कांग्रेस के नेताओं के साथ हो रहा है राजेंद्र भारती को एक केस में तीन साल की सजा सुनाए जाने पर विधायकी गंवाना पड़ी थी .
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