योगी आदित्यनाथ सरकार ने विकास का चमचमाता मौडल दिखाने की कड़ी में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन किया. इस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के बड़ेबड़े बिजनैसमेन शामिल हुए. प्रधानमंत्री ने 60 हजार करोड़ रुपए की 81 योजनाओं का शिलान्यास किया. लेकिन विकास से अधिक चर्चा का विषय अमर सिंह रहे.

अमर सिंह की खासियत है कि वे जहां होते हैं, खबरों का झुकाव उन की तरफ ही रहता है. अमर सिंह फोटो में भी आकर्षण का केंद्र बने रहे. भगवा कुरते में उन की छवि निखर रही थी. अमर सिंह का कद उस समय और ऊंचा हो गया जब प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अमर सिंह बैठे हैं, सब की हिस्ट्री निकाल देंगे.’’ अमर सिंह ने बाद में ट्वीट किया कि वे ‘बूआ’ और ‘बबुआ’ के नहीं, विकास के साथ चलेंगे.

अमर सिंह के इस कदम के बाद उन के खिलाफ एक वाकयुद्ध शुरू हो गया. किसी ने तर्क दिया कि वे जहां जाते हैं वहां तोड़फोड़ कर देते हैं. इस के लिए बच्चन, अंबानी और मुलायम परिवारों के उदाहरण दिए गए. किसी ने कहा कि वे अपनी राज्यसभा की सदस्यता बचाना चाहते हैं. अमर सिंह को खलनायक बना कर पेश किया जाने लगा. यह सही बात है कि अमर सिंह पहले कांग्रेस के करीबी थे. इस के बाद उन का लंबा समय समाजवादी पार्टी खासकर सपा नेता मुलायम सिंह के साथ बीता.

अमर सिंह उद्योगपतियों और फिल्मी हस्तियों के बहुत करीबी रहे हैं. ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में भी वे फिल्म और उद्योगजगत की हस्तियों के बीच ही बैठे थे. जितनी चर्चा अमर सिंह के एक सम्मेलन में शामिल होने से शुरू हो गई उतनी चर्चा तो रामविलास पासवान, उदित राज और रामदास अठावले की नहीं हुई जो अपनी विचारधारा छोड़ कर भाजपा के साथ आए.

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