मायावती के तीसरे मोर्चे की अवधारणा विपक्षी एकजुटता की राह में सबसे बडा रोड़ा है. एक जैसी विचारधारा के बाद भी एक मंच पर खड़े न हो सकने की मजबूरी भाजपा की सबसे बडी ताकत बनेगी. ऐसे में मायावती विलेन साबित हो सकती है. मायावती तीसरे मोर्चे की पंसद तभी बन सकती है जब बसपा दूसरे नम्बर की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकेगी.

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