उसकी बातों को कहीं प्यार न समझे कोई
है खिलाड़ी उसे दिलदार न समझे कोई
लोग पूछें तो बताऊं मैं हकीकत उसकी
इक लुटेरे को मददगार न समझे कोई
मैंने माना कि ज़माने की खबर है मुझको
हां, मगर सुबह का अखबार न समझे कोई
कुव्वत-ए-जंग नहीं है तो हूं खामोश मगर
मुझको दुनिया का तरफदार न समझे कोई
यूं तो बिकता है ज़माने में सभी कुछ लेकिन
जिन्स-ए-बाज़ार मेरा प्यार न समझे कोई

शब्दार्थ
कुव्वत-ए-जंग : लड़ाई की ताक़त
जिन्स-ए-बाज़ार : बाजार में बिकने की चीज़

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