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बधाई के बहाने ‘पान मसाला’ का प्रचार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिस अनुशासित जीवन शैली के लिये जाना जाता है उसमें यह उम्मीद तो नहीं लगती कि वह पान मसाला जैसी हानिकारक चीजों का सेवन करते होंगे. इसके बाद भी उनको बधाई देने वाले बिजनेसमैन बधाई के बहाने अपने पान मसाला का प्रचार भी करते नजर आ रहे हैं.

योगी के शपथ ग्रहण के दूसरे दिन लखनऊ के हिन्दूस्तान अखबार में एक पेज का पूरा विज्ञापन शुद्ध प्लस परिवार की ओर से छपवाया गया है. इसमें शुद्ध प्लस परिवार ने मंहत योगी आदित्यनाथ को हार्दिक शुभकामनायें दी है. विज्ञापन के नीचे वाले हिस्से में पान मसाले का जिक्र किया गया है. अगर शुद्ध प्लस परिवार की मंशा केवल बधाई देना होता तो विज्ञापन में पान मसाले का जिक्र नहीं होता. जब पान मसाले के साथ कोई प्रभावशाली व्यक्तित्व जुड़ जाता है तो लोग उस प्रॉडक्ट के साथ जुड़ना पंसद करते हैं.

वैसे तो कई बिजनेसमैन बधाई देते नजर आये हैं. इसमें कोई खास बात नहीं है. पान मसाले का प्रचार करना विज्ञापन को विवादित बनाता है. तंबाकू, बीड़ी और पान मसाला का प्रचार करना कानूनी और मर्यादा दोनों के अनुकूल नहीं है. पान मसाला नशे की श्रेणी में आता है. किसी ऐसे आदमी के नाम और फोटो के साथ जोड़कर पान मसाले का प्रचार करना समाज के हित में नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि के पूरी तरह से खिलाफ है. बधाई संदेश बिना पान मसाले के जिक्र के भी प्रभावी हो सकता था.

शराब, तंबाकू, बीड़ी और पान मसाला जैसे नशे की वस्तुओं का प्रचार कानूनी रूप से अवैध है. इससे बचने के लिये इनका प्रचार करने वाले लोग सरोगेट विज्ञापन का सहारा लेते हैं. सरोगेट विज्ञापन में वस्तु का सीधे तौर पर प्रचार नहीं किया जाता. किसी दूसरे बहाने से प्रचार किया जाता है.

कानून की आंख में धूल झोकते हुये ऐसे लोग तर्क देते हैं कि पान मसाला अगर तंबाकू युक्त होगा तो प्रचार नहीं किया जा सकता. सच्चाई यह है कि प्रचार में कहीं यह नहीं लिखा जाता कि पान मसाला तंबाकू युक्त नहीं है. अगर लिखा भी जाता है इतना छोटा कि उसको पढ़ा नहीं जा सकता.

भाजपा के बड़े नेता और उपराष्ट्रपति रहे भैरो सिंह शेखावत ने अपने समय में एक ऐसी ही संस्था के पुरस्कार वितरण समारोह में पुरस्कार देने से मना कर दिया था क्योंकि वह संस्था पुरस्कार वितरण के बहाने छिपे तौर पर इस तरह की वस्तु का प्रचार करना चाहती थी.

सुप्रीम कोर्ट ने पान मसाले की प्लासटिक पन्नी वाले पैक को इसी मंशा से बंद किया था कि लोग पान मसाला खाने से बच सकेंगे. बहुत सारे प्रतिबंधों के बाद भी इस तरह का प्रचार करने वाले लोग बहाने की तलाश में रहते हैं. जिससे लोगों को पान मसाला खाने के लिये प्रेरित कर सकें.

मोबाइल के खराब नेटवर्क से परेशान हैं आप?

आपके मोबाइल फोन के नेटवर्क या सिग्नलों के बार-बार चले जाने जैसी समस्या से हर कोई वाकिफ है. इस समस्या के लिए आप अपने सिम कार्ड से लेकर सर्विस प्रोवाइडर, अपने फोन सेट सभी को कोसते रहते हैं.

अगर आप भी ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं और आपको इसी बीच कोई जरुरी कॉल करना हो या आपका कोई और जरुरी काम, लेकिन खराब सिग्नल्स के कारण बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है तो ऐसे में हम आपके लिए लेकर आएं हैं ऐसे कुछ तरीके या ट्रिक्स जिनका इस्तेमाल कर आप अपनी इस परेशानी से पार पा सकते हैं..

1. अपने स्मार्टफोन के 4G नेटवर्क के बजाय 2G डाटा को ऑन करें

यदि आपको किसी खास स्थान पर कमजोर सिग्नल की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, तो आपको अपने इंटरनेट कनेक्शन को 4G से 2G में स्विच करना चाहिए. ऐसे में भले ही आपके इंटरनेट की स्पीड कम हो जाती है लेकिन सिग्नल की समस्या दूर हो जाती है.

2. मोबाइल कवर को हटा दें

अगर आपके फोन में सिग्नल न आने की परेशानी लगातार हो रही हो तो मोबाइल के कवर को हटाकर फिर अपने मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए.

3. अपने मोबाइल को थोड़ा ढीले हाथों से पकड़ें

तकनीक विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल को टाइट और जोर से पकड़ते हैं तो आपके फोन में एक और लेयर जुड़ जाती है और जिससे नेटवर्क रिसीव करने या भेजने में दिक्कत होती है.

4. अपने फोन को किसी कांच के गिलास में रखें

अगर सिग्नल लंबे टाइम तक ना रहे तो मोबाइल को थोड़े समय के लिए एक कांच के गिलास में रख दें.

5. अपने घर की खिड़कियों को खोल दें

सिग्लन्स अगर कमजोर हैं तो घर की खिड़कियां खोल देनी चाहिए, इससे मोबइल को मिलने वाली सिग्नल में बढ़ोतरी होगी.

6. फोन में बूस्टर का इस्तेमाल करें

अगर उपर्युक्त इन सभी तरीकों से भी सिग्नल न आए या ठीक से काम न कर रहा हो तो उस जगह पर एक बूस्टर लगा दें.

7. अपने नंबर के सभी कॉल्स किसी अन्य नंबर पर फॉर्वर्ड करें

अगर किसी एक निश्चित जगह पर आपको लंबे समय तक सिग्नल की समस्या हो रही है तो आप उस जगह पर उचित काम करने वाले और अन्य किसी दूसरी कंपनी के नंबर पर अपने सारे कॉल्स को फॉर्वर्ड कर सकते हैं.

ऐसे करें अपने आधार कार्ड की सुरक्षा

आज के समय में आधार कार्ड हर किसी के पास होता है. यह एक ऐसा पहचान पत्र है, जिसे सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है. आधार कार्ड के जरिए सिम लेना, ऑनलाइन पेमेंट करने जैसे कई काम किए जा सकते हैं. इस बायोमैट्रिक आधारित व्यवस्था को हर दूसरे स्कीम के लिए अनिवार्य किया जा रहा है. आधार कार्ड का इस्तेमाल वर्तमान समय में पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड जैसे सेवाओं के लिए भी किया जाने लगा है.

लेकिन हाल ही में आ रही खबरों के मुताबिक, आधार कार्ड का डाटा चुराने की कोशिशें की जा रही हैं. हालांकि, यूआईडीएआई ने इन सभी बातों को महज एक अफवाह बताया है. यूआईडीएआई के पास लोगों का व्यक्तिगत डाटा बिल्कुल सुरक्षित है. लेकिन अब ऑनलाइन पेमेंट्स के लिए आधार कार्ड को आवश्यक किया जा रहा है. ऐसे में बायोमैट्रिक्स डाटा पर असामाजिक तत्वों की नजर हमेशा बनी रहने के आसार हैं. इसी के चलते आधार कार्ड का डाटा सुरक्षित रखने के कुछ तरीके-

1. बायोमैट्रिक डाटा को ऑनलाइन करें लॉक

कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने कई दिनों से अपना आधार कार्ड इस्तेमाल नहीं किया है. ऐसे लोगों को यूआईडीएआई से ईमेल के जरिए ये बताया गया है कि उनका डाटा बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन के जरिए एक्सेस किया गया है. इस स्थिति से बचने के लिए लोगों को यूआईडीएआई सर्वर पर जाकर अपना बायोमैट्रिक इंफॉर्मेशन लॉक करना होगा. इससे आपका डाटा सुरक्षित रहेगा.

2. किसी से साझा ना करें आधार से जुड़ी जानकारी   

ध्यान रखें कि कोई भी संस्थान और बैंक कभी-भी आपसे आपकी निजी जानकारी नहीं मांगता है. अगर आपके पास कभी आधार कार्ड से संबंधित जानकारी को साझा करने के लिए कोई फोन या ईमेल आए, तो आप कभी-भी अपने आधार का डाटा शेयर न करे.

3. आधार की फोटोकॉपी देने से बचें

आधार कार्ड की फोटोकॉपी हर किसी को देना आपको खतरें में डाल सकता है. कोई व्यक्ति आपके आधार की फोटोकॉपी का गलत इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे में अगर आप किसी को फोटोकॉपी दे रहे हैं, तो उस पर अपने हस्ताक्षर कर ये लिख दें कि यह कॉपी किस काम के लिए दी जा रही है.

4. बायोमैट्रिक्स डाटा का इस्तेमाल सोच समझ कर

रिलायंस जियो सिम खरीदते समय ग्राहकों को स्कैनर पर अपने अंगूठे का निशान देना होता है. आने वाले समय में कई जगहों पर इस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा. ऐसे में अगर आपको पूरी तरह से भरोसा न हो, तो अपने अंगूठे का निशान न दें.

5. आधार कार्ड खो जाने की स्थिती में

ऐसी परिस्थिति में पुलिस थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराएं. और यूआईएडीआई की वेबसाइट पर जाकर नया आधार कार्ड प्राप्त किया जा सकता है. या फिर से किसी आधार सेंटर पर जाकर नया डुप्लिकेट आधार कार्ड बनवा सकते हैं.

निया शर्मा का ये बोल्ड अवतार नहीं देखा तो क्या देखा

'जमाई राजा' में रोशनी का किरदार निभाकर फेमस हुईं एक्ट्रेस निया शर्मा एक बार फिर अपने हॉट अवतार को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल, निया प्रोड्यूसर विक्रम भट्ट की वेब सीरिज 'ट्विस्टेड' में ग्लैमरस रोल में नजर आएंगी. इसके प्रोमो में निया बोल्ड अवतार में दिख रही हैं. निया ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर इसके कुछ सीन पोस्ट किए हैं, जिनमें वो ब्लैक आउटफिट में काफी खूबसूरत लग रही हैं. बता दें, मर्डर मिस्ट्री पर बेस्ड यह वेब सीरीज 30 मार्च से VB On The Web नामक यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज होगी.

हाल ही में निया की कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. जिसमें निया ब्लैक कलर की ड्रेस और में ब्लैक लिपिस्टिक लगाए नजर आई थीं. ये फोटोज निया के न्यू वीडियो सॉन्ग 'रात की' की शूटिंग के बाद कराए फोटोशूट की हैं. बता दें, इस सॉन्ग का टीजर रिलीज हो चुका है जिसमें निया काफी बोल्ड अवतार में नजर आई हैं.

निया ने ये फोटोशूट लिकर बॉटल्स वाले बैकग्राउंड में कराया है. जहां फोटोज में साफ-साफ ढेर सारी बॉटल्स दिखाई दे रही हैं, वहीं कुछ फोटोज में निया ब्लैक ड्रेस में पूल के पास खड़ी नजर आ रही हैं. निया के इन फोटोज में उनकी बोल्डनेस साफ देखी जा सकती है.

कुछ वक्त पहले निया ने अपने इंस्टाग्राम पर एक कॉन्ट्रोवर्शियल वीडियो शेयर किया था. इसमें एक छोटा बच्चा बार-बार बहन की गाली रिपीट कर रहा था. निया के इस वीडियो पर फैन्स ने ना सिर्फ उन्हें जमकर ट्रोल किया था बल्कि कई तीखे रिएक्शन भी दिए थे.

दिसंबर 2016 में निया शर्मा को एशिया की तीसरी सेक्सी महिला का खिताब मिला था. बता दें कि 2014 में 'जमाई राजा' से जुड़ी निया शर्मा को असली पहचान शो के कैरेक्टर 'रोशनी' से मिली. हालांकि निया 2016 में यह शो छोड़ चुकी हैं. वो 'एक हजारों में मेरी बहना है' में क्रिस्टल डिसूजा की छोटी बहन का रोल भी कर चुकी हैं.

निया शर्मा और सीरियल 'जमाई राजा' में उनकी को-एक्ट्रेस रेहाना मल्होत्रा एक फोटो को लेकर चर्चा में थीं. इस फोटो में दोनों एक्ट्रेस लिप-लॉक करती नजर आई थीं. खुद रेहाना ने यह फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की थी. हालांकि, जब फोटो वायरल हुई तो उन्होंने इसे वहां से डिलीट कर दिया. बता दें 'जमाई राजा' के साथ निया 'कॉमेडी नाइट्स बचाओ ताजा' में भी काम कर चुकी हैं.

निया ने कुछ दिनों पहले इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो सेक्सी डांस मूव्स करती नजर आई थीं. इसके बाद यूजर्स ने अलग-अलग रिएक्शन दिए थे. कुछ ने तो कहा था कि तुम्हें पोर्न इंडस्ट्री चले जाना चाहिए.

‘सेक्स से किया ना, तो फिल्म से हटवा दिया’

साउथ की जानी-मानी एक्ट्रेस कस्तूरी ने तेलुगु के टॉप एक्टर पर कास्टिंग काउच का आरोप लगाया है. कस्तूरी के मुताबिक, उस एक्टर ने उन्हें अपने साथ सोने के लिए कहा था. हालांकि कस्तूरी ने उस एक्टर का नाम नहीं बताया बस इतना ही कहा कि वो अब एक नेता बन गए हैं. मुझे अपने साथ सोने को ऑफर दिया था. अपने बुरे एक्सपीरियंस को शेयर करते हुए कस्तूरी ने एक अखबार को बताया कि इस एक्टर ने मुझे साथ सोने के लिए कहा था. वह इस वक्त तेलुगु के लीडिंग हीरो के साथ ही पॉलिटीशियन भी हैं. बता दें कि कास्टिंग काऊच साउथ फिल्म इंडस्ट्री का एक कड़वा सच है. जो समय-समय पर मीडिया में चर्चित होता रहता है.

कस्तूरी ने बताया कि मुझे लगता है कि मैं उस एक्टर की बहुत इज्जत करती थी. मेरे मना करने पर उसका ईगो सामने आ गया. वह ना सुनने का आदी नही है. मैंने जिन फिल्मों में उसके साथ काम किया, सभी में उसने मुझे काफी परेशान किया. इतना ही नहीं, उसने मुझे दो फिल्मों से बाहर भी करवा दिया.

कस्तूरी पहली ऐसी एक्ट्रेस नहीं हैं जिन्हें साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ा हो. एक्ट्रेस राधिका आप्टे ने भी पहले एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें भी कास्टिंग काउच से गुजरना पड़ा. हाल ही में एक तमिल हीरोइन वरलक्ष्मी शरतकुमार ने भी तमिल फिल्म इंडस्ट्री में फैले कास्टिंग काउच का जिक्र करते हुए बताया था कि उन्हें भी इसका सामना करना पड़ा था.

कस्तूरी का जन्म 1 मई 1974 को चेन्नई में हुआ. उन्होंने नीप्पू रव्वा, अन्नामाच्चा, चीलाक्कोटटुडु, आकासा वीघीलो, मा अयाना बनगाराम जैसी फिल्मों में काम किया है. कस्तूरी के पिता आईआईटी में इंजीनियर थे, जबकि मां वकील थीं. कस्तूरी स्कूल के दिनों से ही कई कॉम्पिटीशन में पार्टिसिपेट करती थीं. उन्होंने सिंगिंग, डांसिंग और क्विज में कई अवॉर्ड भी जीते. कस्तूरी शुरू से ही एनसीसी की एक्टिव मेंबर रहीं. वो स्कूल के दिनों में स्टेट लेवल हॉकी चैम्पियन भी रह चुकी हैं.

फिल्म इंडस्ट्री में एंटर करने से पहले कस्तूरी मॉडलिंग करती थीं. वो 1992 में मिस मद्रास का टाइटल भी जीत चुकी हैं. 1994 में उन्होंने मिस इंडिया कॉम्पिटीशन में भी पार्टिसिपेट किया था. कस्तूरी ने 1991 में तमिल फिल्म 'आथा उन कोइले' से डेब्यू किया था. इसके बाद उन्होंने हॉरर फिल्म रसथी वरुम नाल और चिन्नावर में भी काम किया. 

राम मंदिर के दांव पर योगी को सत्ता

उत्तर प्रदेश में भगवा वस्त्रधारी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे अयोध्या के राममंदिर का मुद्दा है. भाजपा अब सीधे हिन्दुत्व पर भरोसा करने के बजाय प्रतीक के सहारे अपने वोटबैंक को साधना चाहती है. योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से धर्मिक चेहरा हैं. ऐसे में भाजपा का कोर वोटर इस बात को लेकर खुश है कि केन्द्र सरकार ने राम मंदिर न सही पर प्रदेश की सत्ता हिदुत्व के अगुवा नेता के हवाले कर दी है. योगी गोरखपुर की गोरक्षा पीठ के मंहत हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनका संगठन हिन्दू युवावाहिनी बहुत सक्रिय है. ऐसे में वह भाजपा के मददगार साबित होते हैं. 5 बार के सांसद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 32 वें मुख्यमंत्री हैं. पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो भगवा पहनते हैं और शादीशुदा नहीं हैं.

भाजपा योगी को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने का पूरा मन बना चुकी थी. भाजपा के पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2 बड़े नेता इस बात का विरोध कर रहे थे. ऐसे में योगी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिये घोषित नहीं किया गया. योगी को इस बात की पूरी जानकारी पहले से मिल चुकी थी. यही वजह है कि विधानसभा चुनाव के पूरे प्रचार अभियान में वह सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आते रहे. जैसे ही भाजपा को बहुमत हासिल हुआ उसने योगी को आगे कर दिया. मीडिया और भाजपा के दूसरे नेताओं को भ्रम में रखने के लिये भाजपा पूरे एक सप्ताह तक लोगों को भ्रमित करती रही.

जैसे ही गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड में सरकार बनाने के बाद पार्टी को मौका मिला उसने अपने मिशन उत्तर प्रदेश को अंजाम तक पहुंचाते हुये गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया. योगी को कामकाज में मदद करने के लिये उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य और लखनऊ के मेयर डाक्टर दिनेश शर्मा को पद दे दिये गये. 1980 के बाद उत्तर प्रदेश में उपमुख्यमंत्री का पद दोबारा बहाल हुआ है. इसे एक तरह से सत्ता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है. भाजपा योगी की छवि का प्रयोग राममंदिर को लेकर पार्टी पर उठ रहे सवाल के जवाब में करना चाहती है.

भाजपा को केन्द्र सरकार में पूर्ण बहुमत हासिल है. 282 लोकसभा सदस्य उसके पास हैं. देश के अलग अलग 16 राज्यों में उसकी सरकार है. उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 325 विधायक उसके पास हैं. उत्तर प्रदेश में जीत के बाद 1 साल के अंदर राज्यसभा में भी भाजपा को बहुमत हासिल होगा. ऐसे में पहली बार देश में भाजपा सबसे पावरफुल रोल में है. भाजपा हमेशा से यह कहती रही है कि जैसे ही उसे देश और प्रदेश में स्पष्ट बहुमत हासिल होगा राममंदिर बन जायेगा. अब वह समय भाजपा के सामने है. भाजपा के लिये अब राममंदिर मुद्दे पर ‘यूटर्न‘ लेने का कोई रास्ता नहीं है. भाजपा के सामने एक ही रास्ता था कि वह ऐसे चेहरे को मुख्यमंत्री बनाये जिसके बनने से हिदुत्व की छवि को बचाया जा सके.

योगी खुद में राममंदिर के सबसे बडे समर्थक रहे हैं. ऐसे में 2019 के चुनाव तक हिन्दुत्व को मानने वाले वोटर राममंदिर के मुद्दे पर भाजपा को घेरने का कोई प्रयास नहीं करेंगे. भाजपा अपने वोटर को यह समझाने में सफल हो जायेगी कि उसने राममंदिर को दरकिनार नहीं किया है. हिन्दुत्व वाला वोटर भाजपा के अगर किसी नेता पर भरोसा कर सकता है तो वह योगी आदित्यनाथ ही थे. क्योंकि वह राममंदिर के मुद्दे पर गोलमोल जवाब नहीं देते थे. ऐेसे में भाजपा ने योगी को प्रदेश की कमान देकर अपने पर उठते सवालों की ढाल तैयार कर ली है. देखने वाली बात यह है कि अब तक राममंदिर पर स्पष्ट राय रखने वाले योगी अब क्या करते हैं?       

 

बड़ी-बड़ी खुशियां छोटी-छोटी बचत में

एक दिन सीमा की बेटी कविता की तबीयत अचानक खराब हो गई. उस दिन रविवार था. बैंक बंद थे और एटीएम घर से बहुत दूर थे. घर में 6-7 सौ रुपए ही थे. सीमा के पति विवेक के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. उन्होंने कहा कि किसी से पैसा उधार लेना होगा. पता नहीं कोई देगा या नहीं. पति को बेचैन देख कर सीमा ने कहा कि मेरे पास कुछ रुपए हैं, उन से काम चल जाएगा. विवेक ने हैरानी से उस की ओर देख कर कहा कि तुम्हारे पास पैसे कहां से आए? जितने रुपए देता हूं वे तो खर्च ही हो जाते हैं? तब सीमा ने बताया कि वह हर महीने उन के दिए पैसों से कुछ बचा कर रख लेती थी.

विवेक ने उसे गले से लगा लिया और कहा कि तुम ने तो मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने से बचा लिया. इसी तरह प्रियंका बताती हैं कि एक रात उस की सास की तबीयत अचानक खराब हो गई. पति बाहर गए हुए थे. वे उसे कुछ रुपए दे कर गए थे, पर उतने कम रुपयों से सास का इलाज मुमकिन नहीं था. पड़ोसी एंबुलैंस मंगा कर सास को अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे. प्रियंका ने अपनी अलमारी खोली और अपने बचत किए गए पैसों को जोड़ा तो करीब 10 हजार रुपए निकल आए. तब जा कर उस की जान में जान आई. सासूमां को सही समय पर अस्पताल ले जाया गया और बेहतर इलाज कराया गया. 3 दिन के बाद प्रियंका के पति लौटे तो छूटते ही उन्होंने पूछा कि इतने रुपए कहां से आए? किसी से कर्ज लिया क्या? जब प्रियंका ने उन्हें सारा माजरा बताया तो बीवी की बचत करने की आदत पर फख्र से उन का सीना चौड़ा हो गया.

छोटी बचत बड़ा समाधान

इस तरह के वाकेये यही सीख देते हैं कि छोटी छोटी बचत बूंद बूंद से सागर भरने की तरह ही है, जो ऐन मौके पर आई किसी परेशानी से बचाने में मददगार साबित होती है. आईसीआईसीआई बैंक के सीनियर अफसर संजीव दयाल कहते हैं कि छोटी बचत से बड़ी परेशानी से निबटा जा सकता है. हमारे आसपास इस के कई उदाहरण मिल जाते हैं. पुराने जमाने में गुल्लक का इस्तेमाल इसी के लिए किया जाता था. हमें अपने बच्चों में भी बचत करने की आदत डालनी चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि उन्हें जो भी जेबखर्च मिलता है, उस का 5-10% गुल्लक में डालने की आदत डालें. ज्यादातर पत्नियां पति से छिपा कर कुछ बचत करती रहती हैं और कठिन हालातों में उस रकम से अपने पति की मदद करती हैं.

अनुपमा के किस्से से हरेक औरत सीख ले सकती है. अनुपमा बताती हैं कि शादी के बाद वह पति के साथ हनीमून मनाने नेपाल गई थी. वीरगंज, काठमांडू और पोखरा में घूमते हुए 7 दिन बीत गए. दोनों ने खूब मौजमस्ती की. बढ़िया होटलों में ठहरे और जम कर शौपिंग की. वापसी के 1 दिन पहले अनुपमा ने पति को कुछ परेशान देखा. परेशानी की वजह पूछी तो पति ने कहा कि उन के सारे पैसे खर्च हो चुके हैं. होटल का बिल चुकाने और गाड़ी का भाड़ा तो हो जाएगा, फिर भी घर से इतनी दूर हैं, तो कुछ रुपए तो हाथ में होने चाहिए.

पति की परेशानी देख अनुपमा ने अपने पर्स से 7 हजार रुपए निकाल कर उन के हाथ में रख दिए. अनुपमा बताती है कि पति के दिल खोल कर खर्च करने के तरीके को देखते हुए उस ने शौपिंग के दौरान ही कुछ पैसे चुपके से बचा लिए थे.

नामुमकिन नहीं बचत करना

पारिवारिक खर्चों के बढ़ते बोझ का हवाला देते हुए कई औरतें यह तर्क देती हैं कि बचत करना मुमकिन ही नहीं है. जब घर का खर्च ही ठीक से नहीं चलता है, तो ऐसे में बचत की बात करना ही बेकार है. किराने का सामान, दूध, गैस, बच्चों के स्कूल की फीस, मकान का किराया आदि के बाद हाथ में कुछ बचता ही नहीं है. ऐसी सोच वाले लोगों के लिए एक बड़ी कंपनी के फाइनैंस मैनेजर रजनीश कहते हैं कि बचत करने की आदत और सोच से ही बचत की जा सकती है.

हर महीने के तयशुदा खर्चे के बाद एक मिडिल क्लास फैमिली के हाथ में सच में कुछ नहीं बचता है, पर रोज 10-20 या हर महीने 500-1,000 रुपए तक की बचत की ही जा सकती है. कई औरतें तमाम खर्चों के बाद भी कुछ न कुछ बचत कर ही लेती हैं. खर्च का कोई अंत नहीं है और हर महीने कुछ न कुछ नया खर्च सामने आ खड़ा होता है. इस के बाद भी बचत करने की सोच हो तो कुछ न कुछ बचत की ही जा सकती है, जो मौकेबेमौके काम दे ही जाती है.

हर औरत को कुछ न कुछ बचत करने की आदत डालनी ही चाहिए. औरत को ही क्यों मर्द और बच्चों को भी बचत की आदत बना लेनी चाहिए. इस से अचानक आई माली परेशानी से बचा जा सकता है.

अक्षरा हासन के हवा में उड़ने का सच क्या है?

लगभग डेढ़ साल पहले अक्षरा हासन से उनकी पहली फिल्म ‘‘शमिताभ’’ के प्रदर्शन से पहले मुलाकात हुई थी, उस वक्त अक्षरा हासन के साथ हमारी करीबन एक घंटे बातचीत हुई थी और तब अक्षरा हासन ने अपने दर्द को भी बयां किया था. उस वक्त वह हमारे साथ बहुत अच्छे ढंग से पेश आयीं थीं. इस फिल्म की असफलता के बाद वह एक आध फिल्म में नजर आयीं. अब उनकी दूसरी फिल्म ‘‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’’ प्रदर्शित होने वाली है. जिसमें कोई बड़ा स्टार कलाकार नहीं है. बल्कि उनके साथ नसिरूद्दीन शाह के बेटे विवान शाह हैं, जिनकी अपनी कोई पहचान नहीं बन पायी है. यानी कि अब तक अक्षरा हासन के करियर में ऐसा कुछ नहीं हुआ है, जिससे उनका दिमाग खराब हो. मगर अक्षरा हासन को लेकर जिस तरह की खबरें आ रही हैं, वह चैंकाने वाली हैं. इन खबरों से तो यही जाहिर होता है कि वह स्टार कलाकार से भी बड़ी अदाकारा की तरह व्यवहार करने लगी हैं.

सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले फिल्म ‘‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’’ के प्रचार के लिए फिल्म की पी आर ने कुछ पत्रकारों के साथ अक्षरा हासन के इंटरव्यू रखे थे. सूत्रों के अनुसार उस दिन अक्षरा हासन ने पत्रकारों के सामने ही फिल्म के वितरक सनी खन्ना के साथ तेज आवाज में बहस की और कह दिया कि वह शाम छ: बजे के बाद पत्रकारों को इंटरव्यू देने के लिए नहीं रूक सकती. सूत्रों के अनुसार छ: बजने पर एक पत्रकार वहां पर मौजूद था, जो कि अक्षरा का इंटरव्यू लेना चाह रहा था. मगर छ: बजते ही अक्षरा अपने घर के लिए चल दी. इस पर सनी खन्ना ने उनसे रूकने के लिए कहा, तो अक्षरा ने तेज आवाज में सनी खन्ना से कहा कि, ‘‘आपको समझ में नहीं आता कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, फिर भी मैंने इतना समय दिया. अब यदि आप और फिल्म की पी आर ने सब कुछ सही ढंग से व्यवस्था नहीं की, तो मुझे क्यों दोष दे रहे हैं. आपको मेरे स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए.’’ अक्षरा जब सनी खन्ना से बात कर रह थी, तो उस वक्त वहां मौजूद पत्रकार ने अक्षरा को टोका, तो अक्षरा ने उससे कहा कि मैं आपसे कुछ नहीं कह रही हूं. इसलिए उसे बीच में नहीं बोलना चाहिए. बहरहाल, सनी खन्ना से बहस खत्म होने के बाद अक्षरा हासन ने उस पत्रकार के साथ बैठकर आराम से बात की और उसके बाद वह अपने घर के लिए रवाना हुई.

इस मसले पर जब हमने जांच पड़ताल की, तो अक्षरा हासन के नजदीकी लोगो के अनुसार फिल्म की पी आर बहुत गलत ढंग से पेश आ रही है. अक्षरा के करीबी का मानना है कि फिल्म की प्रचारक खुद को किसी स्टार से कम नहीं समझती है. वह गलत ढंग से बातों को रखती है. उसे पता था कि अक्षरा हासन की तबियत ठीक नहीं है, फिर भी वह फिल्म के प्रचार के लिए पत्रकारों के संग बात कर रही थी, तो उसे उस दिन उसी तरह से व्यवस्था करनी चाहिए थी. फिर अक्षरा ने वहां मौजूद हर पत्रकार से बात की, पर पी आर और फिल्म वितरक सनी खन्ना ही गलत व्यवहार कर रहे थे. अब सच क्या है, पता नहीं.

बैंकों से जुड़ी ये 10 बातें जानते हैं आप

रुपयों से मोहब्बत और नोटों से आशिकी… पैसा किसे पसंद नहीं है? पैसे तो आजकल सांसों से भी ज्यादा जरूरी हैं, तभी तो सांस लिए बिना न जाने कितने लोग मशीन सरीखे रोजाना दफ्तर जाते हैं और सूरज ढलते लौट आते हैं. खैर ये उनका निजी जीवन है. आपकी हर वित्तीय जरूरत को पूरा करने वाले बैंक के बारे में आप कितना जानते हैं? बैंक आपकी हर छोटी बड़ी जरूरत का ध्यान रखता है, तो आपको भी बैंक के बारे में कुछ बातें तो जरूर पता होनी चाहिए.

बैंक अकाउंट किसी की भी जिन्दगी का एक अहम हिस्सा है. अब तो सरकार ने भी इसे आपकी जिन्दगी के साथ जोड़ने के लिए कमर कस ली है. सरकार ने ऐसी कई योजनायें बनाई हैं, जिसका फायदा उठाने के लिए आपके पास बैंक अकाउंट का होना जरूरी है. सरकार ने जन धन योजना जैसी योजना लाकर गरीबों को एक मौका भी दिया कि वे अपना बैंक खाता खुलवा लें, पर जैसा कि देशवासियों की आदत है, उन खातों में भी जमाखोरी की कई घटनायें सामने आईं. नोटबंदी के बाद यह काले कारनामे सामने आए. बैंक अकाउंट किसी व्यक्ति के लिए उतना ही जरूरी है जितना की पैसे.

आजकल बैंक बहुत सारी सेवायें मुहैया कराते हैं. पर बैंक के मुख्य रूप से दो ही काम होते हैं-

1. लोगों से पैसे लेकर उसे सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर जमाकर्ता को पैसे देना.

2. जरूरतमंद और कर्ज वापस करने की काबिलियत रखने वाले लोगों को उचित ब्याज पर कर्ज देना.

नियमों की रीढ़ की हड्डी पर खड़े और पैसों को नस में नस भरे बैंक का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है. आप 500, 2000 और इतिहास के पन्ने में दर्ज 1000 के नकली नोटों को तो खूब पहचानते होंगे. पर क्या आप बैंकों के बारे में इन अनोखे पहलुओं को जानते हैं? पढ़िए बैंकों से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें-

1. विश्व का सबसे पहला बैंक

बेबीलोन, मिस्त्र और ग्रीस के लोग बैंकिंग से जुड़े थे. उस जमाने में मंदिरों में लोग अपने पैसे जमा रखते थे. गौरतलब है कि हिन्दुस्तान में लोग आज भी अपने निजी पैसों की सलामती के लिए मंदिर में पैसे रखते हैं. बस वापस मंदिर से पैसे वापस नहीं लेते, और पत्थर की मूरत के लिए लोहे की पेटी में धन दौलत भर जाते हैं.

पर मध्य काल में कर्ज लेना पाप के समान माना जाता था. इसलिए कुछ देशों ने बैंकों की स्थापना पर प्रतिबंध भी लगा दिया था.

2. बैंक शब्द की उत्पति

मध्य काल में कर्ज लेना गुनाह था. पर जिस पर पाबंदी हो वो न किया तो क्या किया? इटली के कुछ पैसे बदलने वालों ने अपना बिजनेस रास्तों पर ही चलाना शुरु कर दिया. ये लोग बेंच पर ही पैसे बदलने का कारोबार करते थे. इटालवी में बेंच को ‘बैंको’ कहा जाता है. और इसी ‘बैंको’ से बैंक शब्द आया है.

3. दुनिया का पहला बैंक

दुनिया के पहले आधुनिक बैंक, ‘बैंको डे रिआल्टो’ की स्थापना 16वीं शताब्दी में वेनिस में की गई. इस बैंक में चेक सिस्टम भी था.

4. हुंडी से होता था पैसों का आदान-प्रदान

भारत में बैंकों ने 18वीं शताब्दी के अंत में रूख किया. उससे पहले ‘हुंडी’ से पैसों का आदान-प्रदान किया जाता था. हुंडी एक तरह का महाजनी चेक या हैंड नोट है. यह एक ऐसा पत्र है जो कोई महाजन किसी से कुछ ऋण लेने के समय उसके प्रमाणस्वरूप ऋण देने वाले को लिखकर देता था जिस पर धन को ब्याज समेत चुकाने का समय लिखा होता था.

5. भारत में बैंकिंग की शुरुआत

भारत में बैंकिंग की शुरुआत 18वीं शताब्दी के अंत में सन् 1786 में ‘द जनरल बैंक ऑफ इंडिया’ की स्थापना के साथ हुई. 1790 में ‘बैंक ऑफ हिन्दुस्तान’ की स्थापना की गई. गौरतलब है की अब ये दोनों बैंक बंद हो चुके हैं.

6. भारतीयों का पहला बैंक

1895 में लाहौर में पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना की गई. क्रांतिकारी लाला लाजपत राय ने इस बैंक की स्थापना की थी. इस बैंक की बागडोर पूरी तरह से भारतीयों के हाथ में थी. विभाजन से पहले यह देश का पहला बैंक था, जिसे भारतीय ही चलाते थे. 122 साल पुराने इस बैंक में आज भी काम काज होता है.

7. आरबीआई की स्थापना

1935 में देश के केन्द्रीय बैंक के रूप में आरबीआई की स्थापना की गई. 1949 में आरबीआई का राष्ट्रीयकरण किया गया. सर जॉन ऑस्बॉर्न स्मिथ आरबीआई के पहले गवर्नर थे. 1943 में सी.डी.देशमुख कोआरबीआई के पहलाभारतीय गवर्नर बनाया गया था.

8. चलन में थे 5,000 और 10,000 के नोट

आज 2000 के नोटों को लेकर इतना शोर-शराबा है. एक तरफ तो लोग छुट्टे नहीं देतेऔर दूसरी तरफ चूरन वाले नोट भी छपने लगे हैं. पर 1954-1978 के बीच 5,000 और 10,000 के नोट भी चलन में थे. आप ऐसे नोटों को देश के संग्रहालयों में देख सकते हैं.

9. आरबीआई नहीं छापता 1 रुपए के नोट

आरबीआई 2,2,10,20,50,100,500,2000 के नोट छापता है पर 1 रुपए के नोट नहीं छापता. 1 रुपए के नोट वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए जाते हैं जिस पर फाइनेंस सेक्रटरी के हस्ताक्षर होते हैं. इसकी एक सामान्य वजह है कि 1 रुपए के नोट को 1 रुपए का सिक्का ही समझा जाता है. 1934 के आरबीआई ऐक्ट के तहत आरबीआई सिक्के जारी नहीं कर सकता. आपको किसी भी सिक्के पर आरबीआई का चिह्न नहीं दिखेगा.

10. हर नोट पर भारत की पहचान

अगर आपने कभी गौर किया होगा तो आपको हर नोट पर भारत की एक पहचान दिखेगी. भारत में आरबीआई द्वारा छापे गए हर नोट पर किसी ऐतिहासिक इमारत, या भारत की कोई जगह का चित्र छापा जाता है. मिसाल के तौर पर 500 के नए नोट पर लाल किला छपा है वहीं 20 रुपए के नोट पर अंडमान द्वीप की तस्वीर छापी गई है.

इस लेख को पढ़ने के बाद आपके बैंक खाते का बैलेंस तो नहीं, पर आपके ज्ञान के खाते का बैलेंस जरूर बढ़ गया होगा. और अगर आप भी उन खुशकिस्मतों में से हैं, जिन्होंने बैंक का अकाउंट नहीं खुलवाया है, तो जरा बदकिस्मती झेलकर बैंक का अकाउंट खुलवा लीजिए. फायदा आप ही का है.

गर्मियों में शान से दौड़ेगी आपकी गाड़ी

गर्मी के मौसम में तो हमें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. तेज गर्मी की वजह से हर चीज के खराब होने का डर होता है. इस दौरान हमें अपने स्वास्थ्य का भी खास ख्याल रखना होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मी के दिनों में आपकी गाड़ियों पर भी कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं?

आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप गर्मियों में अपनी कार का खास ख्याल रख सकते हैं.

1. टायर प्रेशर

अक्सर लोग अपनी कार के टायर्स को नजरअंदाज कर जाते हैं. गर्मी के दिनों में अक्सर आपकी कार के टायर्स का, टायर प्रेशर अपने आप बढ़ता है. अब ऐसे में टायर फटने की संभावना भी बनी रहती है. अत: ऐसे में अपनी कार के टायर पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है.

2. जरूरी चेकलिस्ट

आपकी कार के टायर प्रेशर के अलावा कार के इंजन ऑयल को भी हमेशा चेक करते रहें. ये ना सिर्फ आपकी कार को चलाने में मदद करते हैं, बल्कि ये इंजन के पुर्जों को साफ और ठंडा रखने में भी मदद करते हैं.

3. एसी का रखें ख्‍याल

गर्मी के दिनों में कार में सबसे ज्यादा जरूरत एसी की ही होती है. गर्मी के मौसम में अपनी कार के एसी का खास ख्याल रखें ताकि आप कार का अपनी जरुरत के हिसाब से सही समय पर इस्तेमाल कर सकें.

4. पार्किंग

क्या आपको पता है कि गर्मी में ना सिर्फ कार को ठंडा रखना मुश्किल होता है, बल्कि गर्मी की वजह से कार की कॉस्मेटिक पर भी बुरा असर पड़ता है. इसलिए अपनी कार को हमेशा ठंडी जगह पार्क करने की कोशिश करें.

5. पॉलिश का करें इस्‍तेमाल

गर्मी के दिनों में आपको अपनी कार को नियमित तौर पर यूवी प्रोटेक्शन वाली पॉलिश से वैक्स करते रहना चाहिए. इससे कार को धूप से होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती. साथ ही आपकी कार का रंग उड़ने से भी बचेगा.

6. सनशेड का प्रयोग

कार मे उपलब्ध सनशेड का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे आपकी कार के केबिन में लगे प्लास्टिक को सुरक्षा मिलती है और इसे फटने या रंग उड़ने से बचाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल करने से आपकी कार गर्मी में थोड़ी ठंडी भी रहेगी.

7. शीशे को रखें बंद

हाईवे पर ड्राइव करने के दौरान हमेशा अपनी कार के शीशे को बंद रखें और कार का एसी चालू रखें. इससे आपकी कार के अंदर एयर-फ्लो बना रहता है. इसका मदद से आप गर्मी से भी बचते हैं और आपकी कार माइलेज भी अच्छा देगी.

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