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खरीदारी में जरूरी है समझदारी

शौ पिंग का शौक भला किसे नहीं होता. बस, यह बात अलग है कि किसी को कपड़े खरीदने का शौक होता है तो किसी को ज्वैलरी का. अच्छा ग्राहक वही है जो शौपिंग तो करे, लेकिन अपनी पौकेट का भी ध्यान रखे ताकि शौपिंग के बाद टैंशन न हो. यह बात टीनएजर्स पर तो और भी ज्यादा लागू होती है, क्योंकि उन्हें गिनीगिनाई पौकेटमनी जो मिलती है और उसे ही उन्हें इस तरह खर्च करना होता है जिस से गर्लफ्रैंड भी खुश हो सके और अपने ऐंजौयमैंट पर भी वे पूरा खर्च कर सकें. आइए जानें, कैसे करें शौपिंग :

इंटरनैट का इस्तेमाल करें : आप जो भी सामान खरीदना चाहते हैं उस की जानकारी के लिए एक बार इंटरनैट का इस्तेमाल जरूर करें. इस से आप को अलगअलग ब्रैंड्स के प्रोडक्ट की कीमत का पता चल जाएगा. इसे तुलनात्मक खरीदारी कहा जाता है. आमतौर पर हम एक मल्टीब्रैंडेड स्टोर पर चले जाते हैं और वहां एक ही प्रोडक्ट के विकल्प तलाशते हैं ऐसे में स्टोर के पास पूरा मौका होता है कि वह आप की जेब टटोल कर ब्रैंडेड प्रोडक्ट्स की अलगअलग कीमत बताए. इसलिए इंटरनैट पर कीमत की जानकारी लेना आप की जेब को हलका नहीं होने देगा.

शौपिंग की जगह तय करें : शौपिंग से पहले हम अकसर यह नहीं सोचते कि हमें कहां से क्या खरीदना है. शौपिंग वाले दिन हम पर्स ले कर घर से चल देते हैं मौल्स और स्टोर्स में जगहजगह चक्कर लगाने लगते हैं. आखिर में जो दिखाई दे जाता है उसे खरीद लेते हैं. इस से न सिर्फ समय बल्कि पैसा भी बरबाद होता है इसलिए पहले यह तय कर लें कि आप को कहां से सामान खरीदना है. इस से आप को अच्छी चीजें खरीदने में भी आसानी होगी.

सूची तैयार करें : आप उन जगहों की सूची बना लें जहां आप की पसंद का सामान सही दाम में मिलता है, इस से समय और पैसे दोनों की बचत होती है और सामान भी अच्छी क्वालिटी का मिल जाता है.

बजट 20 फीसदी कम करें : शौपिंग पर निकलने से पहले आराम से बैठ कर बजट तैयार करें कि आप को किस के लिए क्या और कितना खरीदना है. सूची तैयार करते समय ध्यान रखें कि चीजों को प्राथमिकता देते हुए लिखें, ताकि सही समय पर सही चीज खरीदी जा सके. चीजों पर कितना खर्च होगा, उसे जोड़ें और अब 20 फीसदी कम कर दें. खयाल रखें कि अब जो खर्च आया है, उसी पर टिके रहें. सीजन में जहां भी सेल लगी हो उस का ध्यान रखें और अपने बजट व पसंद के मुताबिक खरीदारी करें. खरीदारी के दौरान अपने बजट पर बारबार ध्यान दें ताकि आप बजट से ज्यादा न खर्च दें.

रिटर्न पौलिसी भी जानें : अगर घर जाने पर कोई सामान पसंद नहीं आया तो वह कितने दिन में वापस किया जा सकता है, इस के बारे में भी बात करें. वापस करने पर पैसे मिलेंगे या फिर कोई पर्ची आदि मिलेगी यह भी पूछें.

लेटैस्ट ट्रैंड क्या है पता करें : शौपिंग पर जाने से पहले अखबारों में आने वाले विज्ञापन, इंटरनैट पर सर्च कर लें कि मार्केट में लेटैस्ट क्या चल रहा है ताकि आप कोई आउट औफ फैशन चीज न खरीद लाएं.

सेल में करें समझदारी से शौपिंग : सेल के सीजन में ग्राहकों को लुभाने के लिए कई लुभावने औफर होते हैं. जैसे 2 शर्ट खरीदने पर 1 शर्ट फ्री आदि. 2 शर्ट की जरूरत न होने पर भी हम लालच में खरीद लेते हैं और अपना बजट बिगाड़ लेते हैं इसलिए इस तरह के प्रलोभन में न आएं और उतना ही खरीदें जितनी आप को जरूरत हो.

कौपीराइट मार्क देखें : वैबसाइट के होमपेज पर कौपीराइट मार्क भी जरूर देखें. कौपीराइट साल, मौजूदा साल या एक साल से ज्यादा पुराना न हो. साथ ही वैबसाइट पर कस्टमर केयर का नंबर दिया है या नहीं, यह भी देखना जरूरी है.

शिपिंग औफर : कई साइट्स आप को प्रोडक्ट लेने पर फ्री शिपिंग चार्ज की सुविधा देती हैं जिस से प्रोडक्ट की कीमत और भी कम हो जाती है. अगर फ्री शिपिंग नहीं है तो हमेशा प्रोडक्ट की कीमत शिपिंग चार्ज को जोड़ कर ही देखें, क्योंकि शिपिंग का खर्च भी आप की जेब पर ही पड़ रहा है.

औनलाइन रिव्यू पढ़ें : किसी भी औनलाइन शौपिंग वैबसाइट पर अपने क्रैडिट कार्ड की जानकारी देने से पहले उस के बारे में लोगों के रिव्यू जरूर पढ़ लें.

कंपनी की शर्तों पर भी ध्यान दें : शौपिंग वैबसाइट्स 500 रुपए से अधिक की खरीदारी पर ज्यादातर डिलीवरी फ्री रखती हैं जिसे कस्टमर एक बड़ी सुविधा के रूप में देखता है, लेकिन कभीकभार फ्री डिलीवरी के साथ शर्तें भी लिखी होती हैं, जिन को कस्टमर तवज्जो नहीं देते और देख कर भी नहीं पढ़ते, जिस के कारण कस्टमर को अनजाने में अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ते हैं.

पेटीएम से करें शौपिंग और बनें स्मार्ट ग्राहक : पेटीएम एक प्रकार का औनलाइन बटुआ है, जिस में आप पैसे रख सकते हैं और फिर इस पैसे के जरिए औनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. हालांकि इस बटुए में पैसे डालने के लिए आप को डैबिट कार्ड, क्रैडिट कार्ड या फिर औनलाइन बैंकिंग का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन एक बार आप इस में पैसे डाल दें तो फिर आप सिर्फ पेटीएम के जरिए ही उसे खर्च कर सकते हैं.

इस में पैसे रखने की सीमा करीब 10 हजार रुपए है जिसे कुछ कागजी कार्यवाही करने के बाद बढ़ाया जा सकता है. पेटीएम के जरिए आप अपने रोजमर्रा के काम बिना समय गवाए कर सकते हैं. जैसे कि मोबाइल रिचार्ज कराना, बिल भरना, औनलाइन शौपिंग करना, सिनेमा के टिकट बुक कराना और अब तो चाय वाले से ले कर किराना स्टोर तक पेटीएम से भुगतान ले रहे हैं

भ्रामक सेल का सच

जब डिस्काउंट इतना धांसू हो तो कोई भी इंप्रैस हुए बिना कैसे रह पाएगा, तभी तो अखबार में आए पंपलैट से सेल की बात पढ़ कर सुचिता खुद को रोक नहीं पाई और तुरंत अपनी फ्रैंड्स को फोन मिला कर इस बंपर सेल का फायदा उठाने का प्लान बना डाला.

सुचिता की यह बात सुन कर उस की सभी फ्रैंड्स फूली नहीं समाईं, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इस के कारण वे कम बजट में ज्यादा चीजें जो खरीद पाएंगी. इस बात को ले कर वे इतनी ऐक्साइटिड थीं कि दिन में 12 बजे से पहले ही सेल वाली जगह पहुंच गईं. इतनी हड़बड़ाहट थी कि उन्होंने बिना सोचेसमझे ढेरों चीजें खरीद लीं और यह भी नहीं सोचा कि इस की उन्हें जरूरत है भी या नहीं.

खरीदारी कर जब घर आ कर देखा तो अधिकांश कपड़े डिफैक्टिड थे और कई चीजें ऐक्सपायरी हो चुकी थीं, जिसे देखना वे भूल गई थीं, लेकिन अब पछतावे के सिवा उन के पास कुछ नहीं था, क्योंकि ऐक्सचैंज का कोई औप्शन नहीं था.

सभी सुचिता को कोस रही थीं, लेकिन कहते हैं न कि अब पछताए होत क्या जब चिडि़या चुग गई खेत. ऐसे में उन्होंने सबक लिया कि आगे से कभी सस्ते के चक्कर में डिस्काउंट देने वाली ऐसी भ्रामक सेल के जाल में नहीं फंसेंगी.

आप के साथ भी ऐसा कुछ न हो, इसलिए चाहे टीवी पर डिस्काउंट के नाम पर आप को फंसाने की कितनी भी कोशिश की जाए, आप उस में न फंसें.

क्यों है डिस्काउंट का लालच भ्रामक

खराब चीजें मिलती हैं

अकसर सेल में वही चीजें बेची जाती हैं जो बिक नहीं रही होतीं, ऐसी चीजें या तो औफ फैशन होती हैं या फिर उन में कोई न कोई डिफैक्ट होता है, लेकिन इस बात से आप अनजान रहते हैं.

ऐसा ही सोहिका के साथ हुआ. वह एक शू शौप में बाहर सेल का बैनर देख कर बड़ी खुशीखुशी अंदर घुसी.

अंदर जा कर देखा तो एक से बढ़ कर एक सैंडिल, चप्पलें थीं जिन्हें देख कर वह खुद को रोक न पाई और एकसाथ 3 जोड़ी चप्पलें खरीद लीं, लेकिन जब उन्हें यूज किया तो पता चला कि वह बहुत स्लिप हो रही थी जिसे 2 बार भी बड़ी मुश्किल से पहना गया, ऐसे में खुद पर गुस्सा उतारने के सिवा उस के पास कोई रास्ता नहीं था, लेकिन एक बार को तो वह सेल के नाम पर लुट ही गई थी.

डिस्काउंट के नाम पर फूल बनाने की कोशिश

डिस्काउंट के नाम पर फंसा कर आप को अकसर फूल बनाया जाता है, क्योंकि तब आप यह भूल जाते हैं कि कोई भी दुकानदार अपना नुकसान कर के आप को कोई चीज नहीं बेचेगा. अकसर होता यह है कि पहले से ही चीजों के प्राइज बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन आप को लगता है कि एक के साथ एक फ्री मिल रहा है तो इस का मतलब हमें काफी फायदा हो रहा है.

अगर आप त्योहारों के समय लगने वाली सेल पर गौर करें तो आप को पता चल जाएगा कि चीजों के जो रेट फैस्टिवल सेल में लगे होते हैं वे पहले की तुलना में डबल होते हैं, जिस का नुकसान सिर्फ और सिर्फ ग्राहक को होता है. इसलिए समझदार बन कर शौपिंग करें न कि फूल बन कर आ जाएं.

जरूरत से ज्यादा खरीदारी

अकसर आप बड़ेबड़े डिस्काउंट देख कर उन के जाल में बड़ी आसानी से फंस जाते हैं और ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं जो आप के लिए यूजलैस होती हैं. जैसे अगर आप को पैक्ड फूड पर 50त्न डिस्काउंट मिल रहा होता है तो आप सोचते हैं कि एक के बजाय 5-6 पैकेट एकसाथ खरीद लूं, लेकिन जब घर आ कर सोचते हैं कि इस का तो कोई यूज नहीं है क्योंकि हमारे यहां इसे खाने वाला जो नहीं है, जिस से सिर्फ आप के पैसे ही बरबाद होते हैं.

ऐक्सपायरी प्रौडक्ट खरीदने से सेहत को नुकसान

अकसर आप देखते होंगे कि जब भी कोई प्रौडक्ट ऐक्सपायरी होने वाला होता है तो उसे क्लीयरैंस सेल में 50, 60, 70त्न तक के डिस्काउंट पर शौपिंग मौल्स में बेचा जाता है. इतने भारी डिस्काउंट के चक्कर में आप ढेरों खानपान की चीजें खरीद डालते हैं.

खरीदते समय आप यह नहीं सोचते कि इतनी चीजें जो आप ने खरीदी हैं उन्हें आप को ऐक्सपायरी खत्म होने से पहलेपहले खाना भी पड़ेगा. जल्दीजल्दी खत्म करने के चक्कर में आप अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ ही करते हैं. इसलिए सस्ते के चक्कर में ऐसी बेवकूफी न करें.

नो रिफंड, नो ऐक्सचेंज

चाहे सेल औफलाइन हो या फिर औनलाइन, एक बात तो तय है कि एक बार खरीदी गई चीज न तो रिफंड होती है, न ही ऐक्सचेंज और न ही आप बारगेनिंग कर पाते हैं. ऐसे में जब आप घर आ कर देखते हैं कि पीस में डिफैक्ट है या फिर साइज में प्रौब्लम है, तब भी आप उसे ऐक्सचेंज नहीं कर पाते, जिस से पैसे भी लग जाते हैं और चीज भी पसंद की नहीं मिल पाती.

क्वालिटी से समझौता

डिस्काउंट में जरूरी नहीं कि आप को ब्रैंडेड चीजें ही मिलें. सेल में मिक्स सामान बेचा जाता है, जिस से आप को डिस्काउंट के चक्कर में हर हाल में क्वालिटी से समझौता करना ही पड़ता है, जिस से जो कुछ आप ने खरीदा है उस का कोई खास फायदा नहीं मिल पाता.

बेची जाती हैं यूज्ड चीजें

कई बार तो यह भी देखने में आता है कि डिस्काउंट में यूज्ड कपड़े वगैरा ज्यादा बेचे जाते हैं. बस, उन्हें इतनी अच्छी तरह प्रैजेंट किया जाता है कि कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा पाता कि कपड़े पुराने हैं या नए. इस से सिर्फ आप ही लुटते हैं.

हड़बड़ी में खरीदते हैं

जब भी हम सेल की बात सुनते हैं तो हमारा मन खुशी के मारे फूला नहीं समाता. हमें लगता है कि हम जल्दी से वहां पहुंच जाएं और सभी चीजें खरीद डालें. इस चक्कर में हम हड़बड़ी में शौपिंग कर के न कलर चैक करते हैं, न साइज और न यह देखते हैं कि इस में कोई डिफैक्ट तो नहीं है, जिस से हम अपना बजट तो बिगाड़ते ही हैं साथ ही नुकसान भी उठा बैठते हैं.

इस तरह डिस्काउंट का लालच आप के लिए नुकसानदायक ही साबित होता है.                        

क्या आपके फोन में जीपीएस ठीक से काम नहीं करता?

आज आप कहीं भी निकलते हैं, तो रास्ते में रुक कर किसी से पता पूछने की बजाय मोबाइल जीपीएस का सहारा लेना ज्यादा पसंद करते हैं. जीपीएस का उपयोग करने के दौरान आपको यह डर नहीं होता कि कोई आपके गंतव्य की गलत जानकारी दे देगा. आप घर से निकलने के साथ ही पूरा पता और नक्शा अपने फोन पर सर्च कर लेते हैं, जिससे कि आपका फोन हर छोटे-बड़े मोड़ और रास्तों की जानकारी देता रहे. इतना ही नहीं, आज फोन में कई एप्लिकेशन्स हैं, जो लोकेशन सर्विस का उपयोग करते हैं. ऐसे में यदि जीपीएस सिग्नल में थोड़ी भी परेशानी हो, तो आपके लिए बड़ी मुश्किल हो जाती है. जानिए कैसे जीपीएस सिग्नल को बेहतर किया जा सकता है.
 
क्या है जीपीएस?
 
जीपीएस का आशय है ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम. यह तकनीक आपकी उपस्थिति को बताता है, जैसे- आप कहां हैं और किस दिशा में बढ़ रहे हैं आदि. जीपीएस तकनीक का डेवलपमेंट सबसे पहले यूएस आर्मी द्वारा किया गया था. वर्ष 1973 में अमेरिकन आर्मी ने इसे नेवी के लिए बनाया था, लेकिन 1995 में इस सेवा को आम उपभोक्ताओं के लिए भी पेश किया गया.
 
स्मार्टफोन में जीपीएस : स्मार्टफोन में जीपीएस के लिए एक सेंसर लगा होता है. यह सेंसर अंतरिक्ष में स्थापित जीपीएस से कम्युनिकेशन कर आपकी उपस्थिति को बताता है. इस सेंसर को फोन में लगे अन्य हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर द्वारा कंट्रोल किया जाता है. ऐसे में कभी-कभी जीपीएस सिग्नल में समस्या आ जाती है. ऐसे में यहां दिए गए तरीके से इसका समाधान कर सकते हैं.
 
पता करें जीपीएस की परेशानी : यदि आपके फोन के जीपीएस में कोई भी समस्या है, तो उसका भी पता लगा सकते हैं. हालांकि, इसके लिए फोन में जीपीएस इसेन्शल एप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा. इससे जीपीएस में समस्या कमजोर सिग्नल की वजह से है या फिर यह हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर की वजह से, इसकी जानकारी मिल जाएगी. एप मेन्यू में सैटेलाइट का विकल्प मिलेगा. उस पर क्लिक करने से फोन सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाएगा. यदि फोन सैटेलाइट से कनेक्ट नहीं हो रहा है, तो इसका मतलब है कि फोन के आसपास कोई मेटैलिक वस्तु है, जो सिग्नल को रोक रहा है. स्मार्टफोन केस या फिर कुछ और भी हो सकता है. ऐसे में फोन केस को हटाएं. यदि सैटेलाइट सही दिखा रहा है, लेकिन जीपीएस सही तरह से कार्य नहीं कर रहा है, तो समझें कि यह सॉफ्टवेटर की समस्या है.
 
जीपीएस डाटा को करें रिफ्रेश : कभी-कभी सैटेलाइट सिग्नल न होने की वजह से भी फोन का जीपीएस फ्रीज हो जाता है. ऐसी स्थिति में फोन में जीपीस स्टेटस या टूलबॉक्स जैसे एप्स डाउनलोड कर सकते हैं. ये फोन के जीपीएस डाटा को क्लियर कर उसे फिर से सैटेलाइट से कनेक्ट करने में सक्षम बनाते हैं.
 
जीपीएस को रखें हाई एक्यूरेसी मोड पर : कई बार लोग फोन में बैटरी की खपत को कम करने के लिए जीपीएस सिग्नल को हाई एक्यूरेसी मोड से हटा देते हैं. बैटरी बचाने के लिए तो यह सही है, लेकिन इससे कभी-कभी जीपीएस सटीक जानकारी नहीं देता. यदि कभी लाकेशन सर्च के दौरान आपको लगता है कि जीपीएस सही तरह से कार्य नहीं कर रहा है, तो हाई एक्यूरेसी पर ही उसे रखें. हाई एक्यूरेसी का विकल्प आपको फोन की सेटिंग में जाकर लोकेशन में मिलेगा.

जानें प्रो कबड्डी लीग 2017 का पूरा कार्यक्रम

क्रिकेट बेशक देश का नंबर एक खेल माना जाता है लेकिन प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) ने मात्र चार वर्षों में इतनी लोकप्रियता हासिल कर ली है कि वह क्रिकेट को ही चुनौती देने के लिये तैयार हो गया है.

वीवो प्रो कबड्डी लीग का पांचवां संस्करण जुलाई में बड़े और भव्य पैमाने पर शुरू होने जा रहा है. इसके आयोजकों ने पांचवें संस्करण की तैयारी के लिये आयोजित एक सम्मेलन में विस्तृत रूप से जानकारी ली. इस दौरान लीग से जुड़े हुये अंशधारक और अनुभवी तथा युवा खिलाड़ी भी मौजूद थें.

लीग कमिश्नर अनुपम गोस्वामी ने बताया कि इस बार टूर्नामेंट जुलाई से अक्टूबर तक 13 सप्ताह चलेगा जिसमें 12 टीमें 130 से ज्यादा मैच खेलेंगी. पिछले चौथे सत्र में आठ टीमें थीं और पांच सप्ताह तक 65 मैच खेले गये थे.

जानें पूरा कार्यक्रम

पीकेएल के पांचवें सीजन के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है. कबड्डी लीग सीजन-5 की शुरुआत 28 जुलाई से हैदराबाद में होगी. इस बार कबड्डी लीग में 12 टीमों को दो जोन में विभाजित किया गया है. प्रत्येक जोन में छह टीमों को रखा गया है.

लीग के पिछले सीजन में दूसरे और तीसरे स्थान पर रही टीमों को जोन-ए में शामिल किया गया है, वहीं जोन-बी में विजेता और चौथे स्थान पर रही टीम को जगह मिली है. इसके अलावा, चार नई टीमों गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को भी दो अलग-अलग जोन में रखा गया है.

सीजन-5 के कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जोन की टीमें अपने-अपने जोन की अन्य टीमों के साथ तीन-तीन मैच खेलेंगी. इस तरह प्रत्येक जोन के अंदर हर टीम कुल 15 मैच खेलेगी. इसके अलावा, दोनों जोन की टीमें एक-दूसरे के साथ एक-एक मैच खेलेंगी. इसके अलावा हर टीम को ड्रॉ के तहत एक मैच खेलना होगा. ऐसे में प्रतियोगिता में शामिल हर टीम को कुल 22 मैच खेलने हैं.

ये सभी मैच हैदराबाद, बेंगलुरू, अहमदाबाद, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, हरियाणा, रांची, दिल्ली, चेन्नई, जयपुर और पुणे में खेले जाएंगे. इस बार पटना के स्थान पर रांची को नए आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है. इस लीग में प्रत्येक जोन की शीर्ष तीन टीमें नॉकआउट दौर में खेलेंगी.

क्वालीफायर-1 में जोन-ए की दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम का सामना जोन-बी की तीसरे स्थान वाली टीम से होगा, वहीं दूसरे क्वालीफायर में जोन-ए में तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम जोन-बी की दूसरे स्थान पर काबिज टीम से भिड़ेगी.

लीग का तीसरा क्वालीफायर दोनों जोन की शीर्ष स्थान पर रहने वाली टीमों के बीच खेला जाएगा. इसमें जीतने वाली टीम सीधे पाइनल में प्रवेश करेगी. इसके अलावा, पहले और दूसरे क्वालीफायर में जीतने वाली टीमें इलिमिनेटर-1 में एक-दूसरे के आमने-सामने होंगी. इसमें इलिमिनटेर की विजेता टीम का सामना तीसरे क्वालीफायर में हारने वाली टीम से होगा.

टूर्नामेंट के क्वालीफायर और इलिमिनेटर-1 मैच मुंबई में खेले जाएंगे. इसके अलावा, इलिमिनेटर-2 और फाइनल मैच चेन्नई में खेला जाएगा. 28 अक्टूबर को लीग का खिताबी मुकाबला होगा.

देश में दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल बना कबड्डी

आयोजकों ने सम्मेलन के दौरान कई दिलचस्प आंकड़े दिये जिससे यह साबित होता है कि यह खेल क्रिकेट के बाद देश में टीवी पर देखा जाने वाला दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल बन गया है. यह भी दिलचस्प है कि प्रो कबड्डी लीग के अगले पांच साल का टाइटल प्रायोजक चीनी मोबाइल निर्माता कंपनी वीवो है और इसी वीवो कंपनी ने इंडियन प्रीमियर लीग(आईपीएल) के अगले पांच साल के लिये टाइटल अधिकार खरीदे हैं. क्रिकेट और कबड्डी के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाये तो आईपीएल में आठ टीमें अपने 10 सत्र में लगभग 60 मैच खेले जबकि प्रो कबड्डी के पिछले सत्र में आठ टीमों ने 65 मैच खेले थे. 

आईपीएल की बराबरी करती है प्रायोजकों की संख्या

प्रो कबड्डी के पांचवें सत्र में जहां टीमों की संख्या बढ़कर 12 पहुंच गयी है वहां देखना दिलचस्प होगा कि आईपीएल के अगले सत्र में जब चेन्नई, राजस्थान की निलंबित टीमें वापिस लौटेंगीं तो टीमों की संख्या कितनी रखी जाएगी और उनके मैच कितने होंगे. प्रो कबड्डी लीग के आयोजकों ने दर्शक क्षमता और प्रायोजकों को लेकर कुछ आंकड़े भी जारी किये हैं.

टूर्नामेंट के दूसरे सत्र में जहां लीग के पास नौ प्रायोजक थे वहीं पांचवें सत्र में उसके प्रायोजकों की संख्या बढ़कर 24 पहुंच गयी है जो आईपीएल की बराबरी करती है. पिछले साल हुई महिला कबड्डी लीग की टीवी पर दर्शक क्षमता 2016 के यूरो कप फुटबॉल से कहीं अधिक थी. इसके अलावा गत वर्ष अहमदाबाद में हुये कबड्डी विश्वकप को 11 करोड़ 40 लाख लोगों ने टीवी पर देखा था जिससे यह देश का दूसरा सबसे बड़ा खेल बन गया है.

मुसलिम नीति को लेकर दोराहे पर भाजपा

उत्तर प्रदेश में भाजपा मुसलिम नीति को लेकर दोराहे पर है. एक तरफ भाजपा यह साबित करना चाहती है कि तीन तलाक को लेकर मुसलिम समुदाय में उसकी पैठ बढ़ी है, दूसरी तरफ वह यह भी दिखाना चाहती है कि मुसलिम बिरादरी से उसकी दूरी कायम है. उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईद के मौके पर मुख्यमंत्री आवास पर ईद से जुड़ा कोई कार्यक्रम नहीं किया. इससे यह संदेश गया कि भाजपा ऐसे आयोजनों के खिलाफ है. दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने राजभवन में ईद से जुड़ा आयोजन किया.

ईद के दिन मुख्यमंत्री लखनऊ की ईदगाह जाकर ईद की शुभकामना देते लोगों से गले मिलते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईदगाह भले नहीं गये पर उप मुख्यमंत्री डाक्टर दिनेश शर्मा और राज्यपाल राम नाइक दोनों ही ईदगाह गये लोगों से मिले. मुसलिम नीति को लेकर भाजपा का उहापोह विधानसभा चुनावों के समय से चल रहा है. विधानसभा चुनावों में भाजपा ने एक भी मुसलिम को चुनाव लड़ने का टिकट नहीं दिया. जब सरकार बनाने का नम्बर आया तो भाजपा ने मोहसिन रजा को मंत्री बना दिया.

राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा मुसलिम नीति को लेकर दोराहे पर खड़ी है, वह मुसलिम से दूरी बनाकर अपने परंपरागत वोट बैंक हिन्दुओं को खुश रखना चाहती है. दूसरी तरफ समाज को यह संदेश देना चाहती है कि वह सबका साथ सबका विकास की नीति पर चल रही है. ऐसे में एक तरफ योगी आदित्यनाथ के जरीये ईदगाह न जाकर एक संदेश देती है तो दूसरी ओर राज्यपाल राम नाइक और उप मुख्यमंत्री और डाक्टर दिनेश शर्मा ईदगाह जाकर लखनऊ की गंगा जमुनी सभ्यता की बात करते हैं.

भाजपा सीधे तौर पर अपने हिन्दु वोट बैंक और मुसलिम वर्ग के बीच संतुलन साधने का काम कर रही है. ऐसे में वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जरीये हिन्दूवर्ग को खुश करने की कोशिश में है और डाक्टर दिनेश शर्मा के जरीये वह मुसलिम बिरादरी को खुश करना चाहती है. यह बातें धीरे धीरे सबकी समझ में आने लगी हैं. ऐसे में अब भाजपा की दोहरी नीति खुल कर सामने आ रही है. जिसका प्रभाव प्रदेश की विकास और कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है.

जिस समय प्रदेश सरकार अपने 100 दिन पूरे होने का जश्न मना रही थी उस समय ही रायबरेली में चुनावी संघर्ष में 5 लोगों को जला कर मार दिया गया. राजधानी लखनऊ में लडकी से सरेराह बलात्कार की कोशिश असफल रहने के बाद उसकी हत्या कर दी गई. छोटी बच्ची के साथ हत्या की घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया. बरेली में हिन्दू युवावहिनी के कार्यकर्ता थाने में घुस कर बवाल करने लगे. पुलिस पर हमला किया. जिस दिन सरकार के 100 दिन पूरे हुये उस दिन की यह घटनाये हैं. प्रदेश में बहुत सारे दावों के बाद भी कानून व्यवस्था के हालात नहीं सुधरे हैं. भाजपा अपना कोई प्रभाव छोड़ नहीं पा रही है. केवल धर्म के नाम पर वोटबैंक के सहारे जीत हासिल करना संभव नहीं है.         

जब थर्ड अंपायर की अनुपस्थिति ने बल्लेबाज को दिया जीवनदान

महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप का आयोजन इंग्लैंड में किया जा रहा है. महिला वर्ल्ड कप होने के कारण इसे इतनी प्रसिद्धि नहीं मिल पा रही जितनी की पुरुष क्रिकेट टूर्नामेंट को मिलती है. हम यह भी जानते हैं कि क्रिकेट (पुरुष टूर्नामेंट) में जब भी कुछ रोचक होता है तो वह खासा सुर्खियां बटोरता है लेकिन महिला क्रिकेट के साथ ऐसा होना मुश्किल है.

इंग्लैंड में हो रहे विश्व कप में कुछ ऐसा हुआ जिस पर यकीन कर पाना मुश्किल है. यह कुछ ऐसी घटना थी जिसके बारे में जान आप भी हैरान हो जाएंगे. विस्तार से जानें पूरा वाक्या.

ऑस्ट्रेलिया ने महिला विश्व कप-2017 में निकोल बोल्टन (नाबाद 107) और बेथ मूनी (70) की बदौलत महिला क्रिकेट विश्व कप के चौथे मैच में वेस्टइंडीज को आठ विकेट से मात दे दी. मगर इस मैच में एक ऐसा शर्मनाक वाकया हुआ, जिसे शायद क्रिकेट इतिहास में कभी भुलाया नहीं जा सकता.

दरअसल हुआ यूं कि इस मैच में मैदानी अंपायर के अलावा कोई भी थर्ड अंपायर नहीं था. जब 14वें ओवर में वेस्टइंडीज की बल्लेबाज चेडिन नेशन ने गेंद को स्केवयर लेग की तरफ मारकर 2 रन लेने की कोशिश की तो उस दौरान फील्डर ने बॉल सीधे विकेटकीपर के दस्तानों में फेंकी और विकेटकीपर ने बिना देरी किए स्टंप्स भी बिखेर दिए.

मगर मैदानी अंपायर कैथी क्रॉस ने बल्लेबाज को नॉट आउट करार दिया. क्योंकि थर्ड अंपायर की गैरमौजूदगी के चलते डिसीजन रैफर नहीं किया जा सकता था, जबकि बल्लेबाज साफ तौर पर आउट था.

बता दें कि पहली पारी खेलने उतरी कैरेबियाई महिला टीम पूरे 50 ओवर नहीं खेल सकी और 47.5 ओवरों में 204 के कुल योग पर पवेलियन लौट गई. वेस्टइंडीज के लिए सलामी बल्लेबाज हेली मैथ्यूज (46), कप्तान टेलर (45), चेडियान नेशन (39) ने उपयोगी पारियां खेलीं.

वेस्टइंडीज की छह बल्लेबाजी दहाई तक भी नहीं पहुंच सकीं. ऑस्ट्रेलिया के लिए एलिस पेरी ने सर्वाधिक तीन विकेट चटकाए, जबकि जेस जोनासेन और क्रिस्टेन बीम्स को दो-दो विकेट मिले. वेस्टइंडीज की दो बल्लेबाज रन आउट हो पवेलियन लौटीं.

इसके जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 38.1 ओवरों में दो विकेट खोकर 205 रन बनाते हुए आसान जीत हासिल की. ऑस्ट्रेलिया को उसकी सलामी बल्लेबाजों मूनी और बोल्टन ने शानदार शुरुआत दिलाई. दोनों ने 171 रनों की बेहतरीन साझेदारी कर टीम की जीत पक्की कर दी. 85 गेंदों में सात चौके और एक छक्का लगाकर बेहतरीन अंदाज में खेल रहीं मूनी 31वें ओवरी की पहली गेंद पर कैरेबियाई कप्तान टेलर का शिकार हुईं.

जीत हासिल करने से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इसके बाद कप्तान मेग लैनिंग (12) के रूप में एकमात्र विकेट और गंवाया. टेलर ने ही लैनिंग का विकेट भी लिया. अंत तक नाबाद रहते हुए टीम को जीत दिलाने वाली बोल्टन ने अपनी नायाब शतकीय पारी में 116 गेंदों का सामना कर 14 चौके लगाए.

दर्शन कुमार में खूबियां हजार

‘मैरी कौम’, ‘एनएच 10’, ‘सरबजीत’, ‘मिर्जा जूलिएट’ जैसी फिल्मों में अलग अलग किरदार निभा चुके दर्शन कुमार की ऐक्टिंग की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान है. उन्होंने तकरीबन 15 सालों तक थिएटर से जुड़े रह कर  काफी नाम कमाया है. मजेदार बात यह है कि गैरफिल्मी और गैरकला परिवार से संबंध रखने वाले दर्शन कुमार जब 5वीं क्लास में पढ़ते थे, तब से उन्होंने कविताएं लिखना और अपनी लिखी हुई कविताओं पर नाटक बना कर उन्हें पेश करना शुरू कर दिया था. दर्शन कुमार ने बताया, ‘‘मैं जब 5वीं जमात में पढ़ता था, तब से कविताएं लिखता आ रहा हूं. मैं अपनी लिखी कविताओं को नाटक के तौर पेश किया करता था. इस के लिए मुझे काफी अवार्ड भी मिले. मुझ से कहा गया था कि तुम इसे गंभीरता से लो, तभी तो मैं ने ‘ऐक्ट वन’ ग्रुप जौइन किया था.

‘‘थिएटर का मेरा अनुभव यह है कि मैं ने सब से पहले दिल्ली में एनके शर्मा का ‘ऐक्ट वन’ ग्रुप जौइन किया था, जो बहुत ही कठिन टास्क मास्टर माने जाते हैं. ‘ऐक्ट वन’ का रिकौर्ड है कि एक महीने के अंदर किसी भी कलाकार को लीड किरदार निभाने का मौका नहीं मिला. मगर मुझे एक महीने के अंदर ही नाटक में लीड किरदार निभाने का मौका मिल गया था.

‘‘एनके शर्मा बहुत ही खतरनाक ट्रेनिंग कराते हैं. पूरी तरह से संतुष्ट होने पर ही वे किसी कलाकार को लीड किरदार के लिए चुनते हैं.’’

आप किस तरह से कविताएं लिखते और पेश करते थे  इस सवाल के जवाब में दर्शन कुमार ने कहा, ‘‘मैं कविताएं लिखता था, फिर उन्हें नाटक के रूप में पेश करता था. मैं कभी पंछी तो कभी किताब बनता था. यह मेरे लिए एक अनूठी कोशिश थी.

‘‘12वीं क्लास तक मैं इस तरह से करता रहा और कालेज पहुंचने के बाद मैं थिएटर से जुड़ गया.’’

कालेज पहुंचने के बाद से दर्शन कुमार थिएटर में मसरूफ हो गए. अब वे कविताएं भले ही न लिख रहे हों, पर उन्होंने लिखना बंद नहीं किया है. दर्शन कुमार कहते हैं, ‘‘देखिए, कविताएं लिखने का मतलब यह था कि मैं अपने मन के भावों को शब्दों में कैद कर दूं. उस वक्त मैं बच्चा था, तो कहानी वगैरह कुछ बड़ा लिख नहीं पाता था, पर अब मेरे मन में जो विचार, जो कहानी आती है, उसे मैं जरूर लिखता रहता हूं.

‘‘मैं ने एक फिल्म की पटकथा भी लिख डाली है और इन दिनों मैं एक दूसरी फिल्म की पटकथा भी लिख रहा हूं. अब मेरी कविताओं के बजाय फिल्म पटकथा लेखन में दिलचस्पी हो गई है.’’

लेखन करने वाले लोगों में पढ़ने की भी दिलचस्पी होती है. आप क्या पढ़ना पसंद करते हैं  इस पर दर्शन कुमार ने कहा, ‘‘मैं कहानियां बहुत पढ़ता हूं. मुझे ‘इस्मिता चुगताई’ की कहानियां पढ़ना बहुत पसंद है. मंटो की कहानियां भी बहुत पसंद हैं. इस के अलावा मैं कई नए लेखकों की कहानियां भी पढ़ता रहता हूं.’’

अपने कपड़े उतारकर ये क्या कर रही हैं भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा, वायरल हुआ वीडियो

बिग बॉस-10 की सबसे चर्चित कंटेस्टेंट रहीं मोनालिसा एक भोजपुरी एक्ट्रेस हैं. जब से मोना ने बिग बॉस में एंट्री की थी तब से उनके नए-नए वीडियो सामने आते रहते हैं. इस बार भी उनका एक वीडियो सामने आया है जिसमे वह कपड़े उतारती नजर आ रही हैं. यह वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है.

इस वीडियो को इंटरनेट पर बहुत बार देखा जा चुका है. बताया जा रहा है यह सीन मोनालिसा की किसी फिल्म में फिल्माया गया है. इस बार वह इस वीडियो की वजह से सोशल मीडिया पर छा रही हैं. इस वीडियो में मोनालिसा कपड़े उतार कर आईने में देख रही हैं. वीडियो को अब तक 34 लाख लोग देख चुके हैं.

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सरकार की मंशा पर संदेह

सरकार चिकित्सा को सुलभ व सस्ता करने के लिए कानून बनाने जा रही है कि डाक्टर मरीजों को नुसखा या प्रिस्क्रिप्शन देते समय दवाओं के ब्रैंड नाम न लिख कर कैमिकल नाम लिखें ताकि मरीज वे दवाएं किसी भी कंपनी की खरीद सकें. ब्रैंडेड दवाइयां देने के चलन के कारण मैडिकल उद्योग में बहुत बेईमानी फैली हुई है और सरकार की सोच है कि इस से यह रुकेगी और इलाज सस्ता हो जाएगा. आरोप है कि ब्रैंडेड दवाइयां बहुत महंगी होती हैं, क्योंकि दवा कंपनियां डाक्टरों को घूस दे कर उन्हें महंगी ब्रैंडेड दवाइयां लिखने को प्रेरित करती हैं. इस के लिए डाक्टरों को महंगे उपहार भी दिए जाते हैं, नकद कमीशन भी दिया जाता है और निशुल्क विदेश यात्राएं भी कराई जाती हैं.

इंडियन जर्नल औफ फार्माकोलौजी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐंटी ऐलर्जी की दवा एलेरिड टैबलेट की 10 गोलियों का पत्ता 35 में बिकता है, तो अच्छी कंपनी के जैनेरिक नाम से यह 2.50 में थोक बाजार में मिल सकता है. महंगी दवाओं में यह अंतर और ज्यादा है और चाहे नए उपचार आ गए हों, देश की गरीब जनता को अभी भी बेइलाज मरना पड़ता है. पर इस का हल फार्मा कंपनियों को निचोड़ना नहीं है. फार्मा कंपनियां बहुत ही प्रतियोगी वातावरण में काम करती हैं और एक ब्रैंडेड दवा के कई पर्याय मिलते हैं. कई बार कई कंपनियां मिल कर कार्टेल बना लेती हैं पर इस के बावजूद जमीनी हकीकत में उन्हें डिस्काउंट, उधारी, उपहारों पर निर्भर रहना ही पड़ता है. मोटा मुनाफा वे जरूर कमा रही हैं पर उस के पीछे दवा उद्योग का चरित्र है, लालच ही नहीं.

दवाओं को विकसित करने व उन्हें बीमारियों से बचाने योग्य बनाने में लाखों नहीं, अरबों रुपए खर्च करने पड़ते हैं. अगर संतोषजनक दवा बन भी जाए तो हर मरीज के लायक है या नहीं, यह पक्का नहीं होता. डाक्टरों को टे्रनिंग देने का भी काम मुश्किल होता है, क्योंकि डाक्टर तो सारे देश में फैले हैं. एक अच्छीभली दवा कब बेकार हो जाए या प्रतियोगी की बेहतर दवा आ जाए, इस का भरोसा नहीं होता. यह जोखिम अंतत: तो मरीज को ही झेलना पड़ेगा. दवाओं को सस्ती करने के चक्कर में कहीं ऐसा न हो कि दवा उद्योग उत्साह ही खो बैठे और दवाएं मिलना ही दूभर हो जाए और तब लोगों को मंदिरों, मसजिदों में दुआओं के सहारे इलाज खोजना पड़े 

सरकार का छिपा उद्देश्य कहीं यही तो नहीं कि जिस मंदिर के नाम पर वह सत्ता में आई, वे फलतेफूलते रहें.

घर में अकेली थी लड़की, पिज्जा देने आए लड़के को सैकस के लिए उकसाया और फिर…

आज हम आधुनिक तकनीक के युग में हैं. जहां एक बटन दबाते ही हम अपने सारे कार्य पूरे कर लेते हैं. आज हम घर बैठे-बैठे शॉपिंग कर लेते हैं और हमारा मार्किट में व्यर्थ जाने वाला समय बच जाता है. जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के साथ अपराध भी बढ़ें हैं. कई बार किया गया मजाक खुद पर ही भारी पड़ जाता है, खासतौर से अंजान व्यक्ति से किया गया मजाक. आइये देखें पूरी घटना. ऐसा ही एक वीडियो बड़ी ही तेजी से वायरल हो रहा है.

कई बार देखा गया है कि डिलीवरी बॉय लड़की को अकेला पाकर ऐसा कुछ करने लगते हैं जो उन्हें नहीं करना चाहिए. एक डिलीवरी बॉय पिज्जा डिलीवरी के लिए लड़की के घर आता है. पिज्जा बॉय को देखकर जाने लड़की को न जानें क्या सूझता है और वह उससे छेड़खानी करने लगती है और उसे खेल का नाम देती है.

लड़की उसे खेल में छेड़ती है, फिर लड़की पैसे लेने के लिए अन्दर जाती है तभी अचानक लड़के का न जाने ऐसा क्या सूझता हैं कि वह लड़की के पीछे सीधे उसके कमरे मे चला जाता है और वह कुछ ऐसा कर देता है जो उसे नही करना चाहिए या कहें तो जो सरासर गलत हैं.

आइये देखें क्या है इस वीडियो में…

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