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GST को समझने का ये है सबसे आसान तरीका

संसद के सेंट्रल हॉल में शुक्रवार को आधी रात को जीएसटी को लॉन्च किया गया. हालांकि अब भी बड़ी संख्या में लोगों को इसके प्रावधानों को लेकर कुछ भ्रम हैं. तो यहां हमसे जानिए जीएसटी से जुड़े आपके सभी सवालों के जवाब.

जानें किन वस्तुओं पर लगेगा कितना टैक्स..

इन वस्तुओं पर नहीं लगेगा कोई टैक्स : फ्रेश मीट, फिश चिकन, अंडा, दूध, बटर मिल्क, दही, शहद, फल एवं सब्जियां, आटा, बेसन, ब्रेड, प्रसाद, नमक, बिंदी, सिंदूर, स्टांप. न्यायिक दस्तावेज, प्रिंटेड बुक्स, अखबार, चूड़िया और हैंडलूम जैसे तमाम रोजमर्रा की जरूरतों के आइटम्स को जीएसटी के दायरे से ही बाहर रखा गया है.

इन पर लगेगा 5 पर्सेंट का टैक्स : फिश फिलेट, क्रीम, स्किम्ड मिल्ड पाउडर, ब्रैंडेड पनीर, फ्रोजन सब्जियां, कॉफी, चाय, मसाले, पिज्जा ब्रेड, रस, साबूदाना, केरोसिन, कोयला, दवाएं, स्टेंट और लाइफबोट्स जैसे आइटम्स को टैक्स की सबसे निचली 5 पर्सेंट की दर में रखा गया है.

ऐसी जरूरी चीजों पर 12 पर्सेंट टैक्स : फ्रोजन मीट प्रॉडक्ट्स, बटर, पैकेज्ड ड्राई फ्रूट्स, ऐनिमल फैट, सॉस, फ्रूट जूस, भुजिया, नमकीन, आयुर्वेदिक दवाएं, टूथ पाउडर, अगरबत्ती, कलर बुक्स, पिक्चर बुक्स, छाता, सिलाई मशीन और सेल फोन जैसी जरूरी आइटम्स को 12 पर्सेंट के स्लैब में रखा गया है.

मिडिल क्लास की इन चीजों पर 18 पर्सेंट टैक्स : फ्लेवर्ड रिफाइंड शुगर, पास्ता, कॉर्नफ्लेक्स, पेस्ट्रीज और केक, प्रिजर्व्ड वेजिटेबल्स, जैम, सॉस, सूप, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड मिक्सेज, मिनरल वॉटर, टिशू, लिफाफे, नोट बुक्स, स्टील प्रॉडक्ट्स, प्रिंटेड सर्किट्स, कैमरा, स्पीकर और मॉनिटर्स पर 18 फीसदी जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया है.

इन पर लगेगा सबसे ज्यादा 28 फीसदी कर : चुइंग गम, गुड़, कोकोआ रहित चॉकलेट, पान मसाला, वातित जल, पेंट, डीओडरन्ट, शेविंग क्रीम, हेयर शैम्पू, डाइ, सनस्क्रीन, वॉलपेपर, सेरेमिक टाइल्स, वॉटर हीटर, डिशवॉशर, सिलाई मशीन, वॉशिंग मशीन, एटीएम, वेंडिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, शेवर्स, हेयर क्लिपर्स, ऑटोमोबाइल्स, मोटरसाइकल, निजी इस्तेमाल के लिए एयरक्राफ्ट और नौकाविहार को लग्जरी मानते हुए जीएसटी काउंसिल ने 28 फीसदी का टैक्स लगाने का फैसला लिया है.

हमसे जानें क्या हुआ महंगा और क्या हुआ सस्ता :

यहां झेलनी होगी आपको महंगाई की मार

– बैंकिंग और टेलिकॉम जैसी सेवाएं महंगी हो जाएंगी. इसके अलावा फ्लैट्स, रेडिमेट गारमेंट्स, मंथली मोबाइल बिल और ट्यूशन फीस पर भी टैक्स बढ़ जाएगा.

– 1 जुलाई से जब आप एसी रेस्तरां में जाएं तो 18 पर्सेंट टैक्स के लिए तैयार रहें. हां, यदि आप गैर-एसी रेस्तरां में जाते हैं तो 6 पर्सेंट की बचत करते हुए सिर्फ 12 पर्सेंट ही चुकाना होगा.

– मोबाइल बिल, ट्यूशन फीस और सलून पर भी आपको 18 पर्सेंट टैक्स देना होगा. अब तक इन पर 15 फीसदी टैक्स ही रहा है.

– 1,000 रुपये से अधिक की कीमत के कपड़ों की खरीद पर भी अब आपको 12 पर्सेंट टैक्स देना होगा. अब तक इस पर 6 फीसदी स्टेट वैट ही लगता था. ध्यान दें कि 1,000 से कम के परिधानों पर 5 पर्सेंट की दर से ही टैक्स लगेगा.

– जीएसटी की व्यवस्था में दुकान या फ्लैट खरीदने पर 12 फीसदी टैक्स देना होगा. फिलहाल यह करीब 6 पर्सेंट है.

GST से ये चीजें हो गई हैं सस्ती

– 81 पर्सेंट आइटम्स 18 फीसदी से कम के स्लैब में होंगे. खासतौर पर वेइंग मशीनरी, स्टैटिक कन्वर्टर्स, इलेक्ट्रिक ट्रांसफॉर्मर्स, वाइंडिंग वायर्स, ट्रांसफॉर्मस इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस, पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेज द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले टू-वे रेडियो सस्ते हो जाएंगे.

– पोस्टेज और रेवेन्यू स्टांप्स भी सस्ते हो जाएंगे. इन पर 5 पर्सेंट ही टैक्स लगेगा.

– कटलरी, केचअप, सॉसेज और अचार आदि भी सस्ते होंगे. इन्हें 12 पर्सेंट के स्लैब में रखा जाएगा.

– सॉल्ट, चिल्ड्रंस पिक्चर, ड्रॉइंग और कलर बुक्स को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है. प्लेइंग कार्ड्स, चेस बोर्ड, कैरम बोर्ड और अन्य बोर्ड गेम्स को घटाकर 12 पर्सेंट के स्लैब में रखा गया है.

जीएसटी को सहूलियत से सत्यनारायण की कथा से समझें

आधी रात को संसद के सेंट्रल हाल में एक सरकारी डाक्यूमेंटरी रिलीज (लॉन्च) हुई जिसे अब हम सभी जीएसटी के नाम से जानने लगे हैं. इस लोकतान्त्रिक अनुष्ठान में आहुतियां डालने तमाम सांसदों के अलावा कुछ खास किस्म के यजमान भी खास तौर से आमंत्रित थें. इन सभी ने सर झुकाकर वित्त मंत्री अरुण जेटली जिन्हें सोशल मीडिया पर सक्रिय आम लोग लाड़ से अरुण जेबलूटली भी कहने लगे हैं के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के भी प्रवचन सुनें. इन प्रवचनों में जीएसटी के फायदे गिनाए गए और उसके इतिहास पर भी संक्षिप्त प्रकाश जगमगाती रोशनियों के बीच डाला गया.

ऐसे दरबार त्रेता और द्वापर युग में भी सजते थे जिनमें राजा के अलावा राजर्षि, विद्वान और साधू संत वगैरह प्रजा पर छाए संकटों पर चर्चा करते थें पर उनके दिमाग में खजाना भरने के खुराफाती आइडिये होते थे. गहन विचार विमर्श के बाद आखिर में तय होता था कि चूंकि राज्य में पाप बढ़ रहे हैं इसलिए धर्म का नाश हो रहा है. इससे बचने के लिए राजा को चाहिए कि वह प्रजा का ध्यान बटाए रखे और कर थोप दे जिससे प्रजा मेहनत कर ज्यादा से ज्यादा धन कमाए. राजा देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ हवन पूजा पाठ आदि भी करवाएं इससे उसका ध्यान प्रजा की बदहाली पर नहीं जाएगा.

सेंट्रल हॉल लोकतान्त्रिक जमावड़ा था जिसमें तीनों वक्ता जीएसटी के फायदे गिनाते रहें. इनमें प्रमुख और लोकप्रिय यह था कि हो न हो जीएसटी नाम के इस ब्र्ह्मास्त्र से जरूर गरीबी दूर हो जाएगी. इधर इस आयोजन का सीधा प्रसारण देख रही पब्लिक यह समझने की नाकाम कोशिश करती रही कि आखिर जीएसटी है क्या बला जिसका हल्ला तो खूब मच रहा है पर तकनीकी तौर पर या सरल तरीके से इसे कोई नहीं समझा पा रहा.

लोगों को इतना ही समझ आया कि अभी तक जो सैकड़ों तरह के टैक्स देने पड़ते थें उनकी जगह अब एक ही टैक्स देना पड़ेगा इससे कुछ चीजें सस्ती और कुछ महंगी हो जाएंगी. गांव देहात के लोगों ने एक कहावत के जरिये इसे समझाया कि सास मरी और बहू के बच्चा हुआ इस तरह घर में तीन प्राणी थे, तीन ही रहे कोई नफा नुकसान नहीं हुआ.

लेकिन व्यापारी वर्ग की आशंकाएं मीडिया के जरिये व्यक्त हो रहीं हैं जिनका जबाब या समाधान अर्थ शास्त्र के अच्छे अच्छे पंडों के पास नहीं कि अगर बेसन पर टैक्स दिया है तो क्या पकोड़ों पर भी देना पड़ेगा अगर हां तो क्यों ऐसी जीएसटी से फायदा क्या जिसमें चावल के घोल और इडली दोनों पर कर देना पड़े. उम्मीद है इन बचकाने और कुछ दूसरे गूढ़ सवालों के जबाब वक्त रहते उन्हें मिल जाएंगे. ऐसी शंका रूपी जिज्ञासाओं को शांत करने प्रधानमंत्री ने अपने भाषण कम प्रवचन में गीता, ऋग्वेद और चाणक्य तक का हवाला दिया पर बात लोगों के गले उतरी नहीं.

जीएसटी को सरलता पूर्वक समझने के लिए जरूरी है कि सत्यनारायण की कथा का पुण्य स्मरण किया जाये क्योंकि जो बात धर्म के जरिये समझी जा सकती है उसके लिए अर्थशास्त्र का मुंह ताकना तुक की बात नहीं. सत्यनारायण की पावन, पुण्य और तारने वाली कथा के विधान में पंडा पहले यजमान को संकल्प दिलाता है फिर घंटे दो घंटे तक एक नियमित अंतराल से घंटा बजाकर दक्षिणा चढ़वाता रहता है. गणेश और कलश स्थापना की दक्षिणा फिर नवग्रह स्थापना की और फिर तरह तरह के दानों के जरिये वह दो चार हजार रुपये समेट ही ले जाता है.

इधर कुछ दिनों से इस कथा का आर्थिक विधान कुछ कुछ बदला है जिसके तहत खुद यजमान यह पेशकश करने लगा है कि पंडित जी बार बार जेब में हाथ मत डलवाओ एक मुश्त रकम बता दो. पंडित सधे सौदेवाज की तरह ग्यारह हजार बताता हैं फिर यजमान की आस्था डगमगाते देख इक्यावन सौ में मान जाता हैं. यहां अहम बात दक्षिणाओं के केंद्रीय या सरलीकरण की है. जीएसटी में नया कुछ नहीं है बल्कि वह सत्यनारायण की कथा जैसी ही है कि इकट्ठा दो और झंझट से बचो.

चूंकि कोई भी बात कर्मकांडो के जरिये जल्द समझ आती है इसलिए जीएसटी पर बवाल मचाने से कोई फायदा नहीं. इसे अस्थि विसर्जन से और सहजता से समझा जा सकता है इलाहाबाद और हरिद्वार मृतक की अस्थियां ले जाने वाले अब भावुक कम व्यावहारिक ज्यादा हो चले हैं इसलिए गौ-दान, भू-दान, वस्त्र-दान, शैय्या-दान जैसे दो दर्जन दानों के चक्कर में पड़ने के बजाय वे भाव ताव कर पंडे को एकमुश्त दान देने लगे हैं इससे पैसे की हो न हो पर वक्त की बचत जरूर हो जाती है और मृतक को मोक्ष मुक्ति मिलने में भी कोई धार्मिक बाधा आड़े नहीं आती.

इसके बाद भी जिन्हें जीएसटी समझ न आए तो उन्हें इसे समझने की कोशिश ही नहीं करनी चाहिए लेकिन इतना जरूर समझ लेना चाहिए कि सरकार पंडा है वह पुराने तरीके से टैक्स नहीं चाहती इसलिए देना तो उसके तरीके से ही पड़ेगा.

मुझे किसी खास जॉनर से कोई लगाव नहीं है : अक्षय खन्ना

अभिनेता अक्षय खन्ना के करियर पर यदि नजर दौड़ाई जाए, तो एक बात साफ तौर पर उभरकर आती है कि उन्होंने ज्यादातर डार्क शेड्स वाले किरदार निभाते हुए, खुद को इंज्वॉय किया है, पर वे ऐसा नहीं मानते. उनकी नजर में वे हर तरह के किरदारों को निभाना इंज्वॉय करते हैं. इसी के चलते उन्होंने डार्क व संजीदा किरदारों के अलावा हास्य व नकारात्मक किरदार भी निभाए हैं. गत वर्ष प्रदर्शित फिल्म ‘ढिशूम’में वे डॉन बने थे. अब श्रीदेवी के साथ फिल्म ‘‘मॉम’’ में वे पुलिस अफसर के किरदार में नजर आएंगे.

उनसे हुई हमारी बातचीत के कुछ अंश…

बीस वर्ष के अपने अभिनय करियर को आप किस तरह से देखते हैं?

– आप जैसा जवाब चाहते हैं,वैसा मैं जवाब नही देने वाला.मैं उससे कुछ अलग हटकर जवाब देना चाहूंगा. हर वर्ष हिंदी या तमिल या तेलगू या मलयालम सिनेमा के परदे पर जो नए चेहरे आते हैं, उनमें से एक दो चेहरों को दर्षक देखना पसंद करता है, पर पिछले बीस वर्ष से दर्शकों ने मुझे हर फिल्म में देखना पसंद किया.

दूसरी बात कला के अलग अलग फार्म हैं. कलाकर चाहे  जिस किस्म का आर्टिस्ट हो,चित्रकार हो डांसर हो या गायक हो या अभिनेता हो, निर्देशक हो या कवि या लेखक ही क्यों न हो. उसके लिए महत्वपूर्ण होता है कि एक्सप्रेस करने की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए. हर कलाकार के करियर की अपनी अवधि होती है. लता मंगेशकर या आशा भोसले का करियर साठ वर्ष तक चलता रहा, आज भी बंद नहीं है. कुछ कलाकारों का करियर सिर्फ एक दो साल या ज्यादा से ज्यादा पांच वर्ष ही है, तो कुछ दस से 25 वर्ष तक है. यह सब उनकी अपनी तकदीर है. सबसे बड़ी अहमियत यह है कि जब तकदीर आपको कुछ देती है, उस वक्त का आप उपयोग किस तरह से करते हैं? मान लीजिए, आप चित्रकार हैं. आपकी एक तस्वीर दस हजार में बिक गयी. दूसरी तस्वीर बिकी ही नहीं. यानि कि सफलता असफलता की गणित लगाने की बजाय कलाकार को अपनी यात्रा को इंज्वॉय करना चाहिए. मैं वही करता आ रहा हूं.

आप किस आधार फिल्मों का चयन करते हैं?

– मुझे जो कहानी, पटकथा व किरदार पसंद आ जाए, वह कर लेता हूं. एक कलाकार होने के नाते आप जितने अच्छे व प्रतिभाशाली लोगों को अपने इर्द गिर्द जोड़ेगे, उतनी ही आपकी प्रतिभा निखर कर आएगी. यहां लोगों से मेरा मतलब फिल्म निर्माता, निर्देशक, मेकअप मैन वगैरह से है. ये बात हर क्षेत्र में लागू होती है, फिर चाहे आप बिजनेस कर रहे हों या दुकान चला रहे हों. यदि आपके आसपास के लोग बेहतरीन हैं, तो आपकी प्रतिभा निखरती है. आपका काम बेहतर होगा, पर यदि आपके आसपास के लोग प्रतिभाशाली नहीं हैं, तो आपका कमतर काम भी चल जाता है.

पर इतना सब करने के बावजूद फिल्में असफल हो जाती हैं?

– सिर्फ मेरे साथ ही नहीं, बल्कि विश्व के हर कलाकार के साथ अक्सर होता है कि वह सोच समझकर बेहतरीन फिल्मों में काम करते हैं, पर फिल्म दर्शक को पसंद नहीं आती है. आप ये मानकर चलें कि कोई भी रचनात्मक शख्स यह सोच कर फिल्म नहीं बनाता या काम नहीं करता कि वह बुरी फिल्म बनाएगा या उसकी फिल्म तो असफल होनी ही है.

आपने कॉमेडी, गंभीर, संजीदा, निगेटिव हर तरह के किरदार निभाए. किस तरह के किरदार निभाते हुए आप सबसे ज्यादा इंज्वॉय करते हैं?

– देखिए, आप चाहे जिस तरह का किरदार निभाओ, पर जो बुनियादी प्रक्रिया है,वह एक ही रहती है. वह नहीं बदलता. मेरा ऐसा मानना है. हो सकता है कि दूसरे कलाकारों का मानना हो कि उनके लिए किसी खास तरह के किरदार निभाना ज्यादा आसान या मुश्किल हो. मेरा इंज्वॉयमेंट है शूटिंग पर जाना. मेरा इंज्वॉयमेंट है सेट पर रहना और काम करना है, फिर चाहे वह कॉमेडी हो या ड्रामा. एक्शन हो या थ्रिलर या कि प्रेम कहानी हो. मुझे किसी खास जॉनर से कोई लगाव नहीं है. मैं तो विवधितापूर्ण काम करने में ही यकीन करता हूं. इस ढंग से मैंने कभी सोचा भी नहीं.

जब फिल्म ‘‘मॉम’’ ऑफर मिला, तो आप किस बात से भावनात्मक स्तर पर इसके साथ जुड़े?

– बेसिकली तो स्क्रिप्ट ही मायने रखती है. एक बार स्क्रिप्ट का मसला पार हो गया, तो बाकी चीजें ठीक हो जाती हैं.कई बार आपको लगता होगा कि काश इसमें ऐसा नहीं ऐसा होता या इस किरदार में यह कलाकार नहीं दूसरा कलाकार होता या निर्देशक अलग होता, वगैरह-वगैरह.. मैं आपको ये सब इसलिए बता रहा हूं, क्योंकि इस फिल्म का जो पूरा सेट-अप है, उसमें मुझे एक भी चीज ऐसी नहीं लगी कि काश ये नहीं यह होता. मुझे कोई कमी महसूस नहीं हुई.

फिल्म ‘‘मॉम’’ को लेकर क्या कहेंगे?

– यह एक पारिवारिक भावना प्रधान ड्रामा से युक्त रोमांचक फिल्म है.

अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

– एक अपराध की जॉंच करने वाला पुलिस अफसर बना हूं. इससे अधिक किरदार या फिल्म के कथानक पर रोशनी डालकर फिल्म के प्रति दर्शकों की उत्सुकता को खत्म नहीं करना चाहता.

आपके शौक?

– मैं तैराकी भी करता हूं. स्क्वैश भी खेलता हूं. जिम भी करता हूं.

क्यों धीरे चार्ज होता है आपका स्मार्टफोन?

स्मार्टफोन को लेकर अक्सर कई उपयोगकर्ताओं की ये शिकायत होती है कि उनका फोन स्लो चार्ज हो रहा है. जब-जब ऐसा होने लगता है तो कई यूजर्स तो ये मान लेते हैं कि फोन की बैटरी या चार्जर में खराबी आ गई है. हम आपको बता देना चाहते हैं कि जरूरी नहीं कि हर बार ऐसा ही हो.

दरअसल, फोन चार्जिंग के दौरान कई बार आपसे कुछ ऐसी गलतियां होती है जिनकी वजह से आपका स्मार्टफोन स्लो चार्ज होता है. हम यहां आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिन्हें फॉलो करने पर फोन तेजी से चार्ज होगा.

फास्ट चार्जिंग एडॉप्टर

मार्केट में अब फास्ट चार्ज करने वाले चार्जर या एडॉप्टर आते हैं. इनमें फोन को तेजी से चार्ज किया जा सकता है. आफ इसे बाजार से आसानी से खरीद सकते हैं.

ऑरिजनल चार्जर का इस्तेमाल

फोन को हमेशा उसके साथ आइ चार्जर से ही चार्ज करें. दूसरी कंपनी के चार्जर से अक्सर फोन स्लो चार्ज होता है और फोन की बैटरी के खराब होने की संभावना भी बहुत बढ़ जाती है.

एरोप्लेन मोड का उपयोग

अपने फोन को चार्ज करते वक्त एरोप्लेन मोड का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से फोन ऑन भी रहेगा, लेकिन फोन में नेटवर्क नहीं आएगा.

करें वाई फाई ब्लूटूथ ऑफ

अपना फोन चार्ज करते समय वाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी को बंद कर लें. ऐसा करने से फोन बहुत जल्दी चार्ज होता है.

एनएफसी

फोन की सेटिंग में मौजूद डेटा एक्चेन्ज मोड यानि कि एनएफसी को, फोन चार्ज करने के दौरान ऑफ रखें.

बैटरी सेवर मोड का इस्तेमाल है बेहतर

आप ये भी कर सकते हैं कि फोन को चार्ज करते वक्त फोन का बैटरी सेवर मोड ऑन करके रख सकते हैं.

ब्राइटनैस रखें कम

चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल न करें. यदि आप ऐसा करते भी हैं तो फोन की ब्राइटनैस कम कर लें. इससे भी आपका फोन तेजी से चार्ज होगा.

एक बेहतरीन गायक के रूप में ऐश्वर्या राय बच्चन

ये बात तो आप सभी जानते हैं कि ऐश्वर्या राय बच्चन आखरी बार करण जोहर की फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' में नजर आईं थीं. अब आने वाली फिल्म फैनी खान की प्रोड्यूसर प्रेरणा खान ने ये पुष्टी कर दी है कि अनिल कपूर अभिनीत इस फिल्म में ऐश्वर्या, फैनी खान का किरदार निभाएंगी. फैनी खान, जो कि एक संघर्षरत गायक हैं और संगीत की दुनिया में अपनी बेटी को एक बड़ा नाम बनाना चाहती है.

हम आपको बता देना चाहते हैं कि इस फिल्म से अतुल मांजरेकर, फिल्म निर्देशन में अपना डेब्यू करने जा रहे हैं. फिल्म फैनी खान, साल 2000 में बनी डच फिल्म ‘एव्रीबडी इज फेमस (Everybody’s Famous)’ का हिन्दी वर्जन होगा.

फिलहाल तो अभिनेत्री अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क में छुट्टियां बिता रही हैं और वापस लौटते ही वे इस म्यूजिकल-ड्रामा फिल्म की तैयारियों में लग जाएंगी. खबरों के अनुसार इस फिल्म में ऐश्वर्या एक बिल्कुल नये अवतार में नजर आने वाली हैं.

कुछ समय पहले ऐश्वर्या राय के गायन में डेब्यू करने की खबरे भी आ रहीं थीं और ये अटकले लगाई जा रहीं थीं कि वे इस फिल्म में गाना भी गाने वाली हैं पर इस बात का पूरी तरह खंडन करते हुए, फिल्म प्रोडेयूसर प्रेरणा ने बता दिया कि अभी के लिए ऐश्वर्या केवल गायक का किरदार निभाएंगी.

अनिल कपूर इस फिल्म की शूटिंग अगस्त के पहले महीने से शुरु करने जा रहे हैं और उम्मीद है कि फिल्म की शूटिंग अक्टूबर के आखिर तक खत्म हो जाएगी. इस फिल्म से पहले अनिल कपूर और ऐश्वर्या को एक साथ स्क्रीन शेयर करते हुए साल 1999 में सुभाष घई की फिल्म 'ताल' और साल 2000 में सतीश कौशिक निर्मित फिल्म 'हमारा दिल आपके पास है', में देखा गया था.

ये हैं प्रो कबड्डी लीग के 5 जांबाज खिलाड़ी

प्रो कबड्डी लीग सीजन पांच 28 जुलाई से शुरु होन जा रहा है. इस लीग के दौरान कबड्डी के धुरंधर अपनी ताकत दूसरी टीम के खिलाड़ियों पर दिखाते हुए नजर आएंगे. पिछले सीजन की बात करें तो कई ऐसे खिलाड़ी देखने को मिले थे जिन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाड़ियों को अकेले ही संभाल लिया था.

आज हम आपको ऐसे खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं जो कि अपने टेकनीक और काबिलियत के जरिए कबड्डी के मैदान पर काफी लंबे समय तक टिके रह सकते हैं.

धर्मराज चिरलाथन

42 वर्षीय धर्मराज चिरलाथन लीग के सबसे पुराने खिलाड़ी हैं. उनके टीमवाले उनको अन्ना कहकर बुलाते हैं. चिरलाथन बहुत ही शांत स्वभाव के हैं जो कि उनके खेल में भी दिखाई देता है. वह जिस तरह अपनी टीम के खिलाड़ियों से बात करते हैं उससे साफ दिखाई देता है कि वह अपने खेल के प्रति कितने समर्पित हैं. अगर आपने इन्हें कभी खेलते हुए देखा होगा तो आपको पता होगा कि चिरलाथन बेहतरीन डाइव कर कितनी आसानी से रेडर पर अपनी पकड़ बनाते हैं. चिरलाथन को इस सीजन में भी पुनेरी पलटन टीम के हिस्सा हैं.

फजल अतराछली

फजल अतराछली ईरान के कबड्डी प्लेयर हैं और इन्हें इस बार गुजरात की टीम ने खरीदा है. इससे पहले फजल पटना पाइरेट्स में थें. फजल एक बहुत ही बढ़िया डिफेंडर हैं. अगर एक बार सामने वाली टीम का रेडर एक कब्जे में आ जाता है तो उसका बचकर निकला काफी मुश्किल होता है. फजल हमेशा मेट पर लेफ्ट कॉर्नर संभालते हैं. जब कोई रेडर रेड करने के लिए आता है तो उन्हें रेडर पर अपनी पकड़ जमाने में कुछ ही सेकेंड लगते हैं. फजल अकेले ही रेडर को संभाल सकते हैं क्योंकि उनकी पकड़ काफी मजबूत है. इस बार गुजरात टीम में रहकर फजल अपना कैसा प्रदर्शन करके दिखाते हैं यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा.

राहुल चौधरी

तेलुगु टाइटन के कप्तान और सीजन चार के हाई रेड रिकॉर्ड रहे राहुल चौधरी को तो आप सभी जानते ही होंगे. राहुल बिजनौर के रहने वाले हैं और पिछले सीजन में इन्होंने 482 रेड प्वाइंट का रिकॉर्ड बनाया था. राहुल अबतक के सबसे कामयाब रेडर रहे हैं. राहुल ऐसे खिलाड़ी हैं जो कि अकेले एक पूरी टीम के बराबर हैं.

राहुल 2015 से तेलुगु टाइटन का हिस्सा हैं और इस बार भी इसी टीम का हिस्सा बने रहेंगे. राहुल राष्ट्रीय कबड्डी के सदस्य हैं और 2016 में हुए कबड्डी वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत को जीत दिलवाई थी.

जीवा कुमार

36 वर्षीय जीवा को डिफेंड करते हुए देखना एक बेहतरीन अनुभव है. जीवा जिस तरह पिछले सीजन में अपना प्रदर्शन दिखाया उसे देखकर लगता है कि इस सीजन में भी वे अपना बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे. जीवा का कहना है कि वे जब भी घर पर रहते हैं तो हमेशा ऑर्गेनिक फूड लेना ही पसंद करते हैं. इस प्रकार का खाना खाने से उन्हें अंदरुनी शक्ति मिलती है जो कि उनके खेल पर भी दिखाई देती है. जीवा बहुत ही अच्छी डाइव मारकर रेडर को पकड़ लेते हैं. उनकी पकड़ इतनी मजबूत होती है कि रेडर उनके चंगुल से निकल पाने में कामयाब नहीं हो पाता है. इस सीजन में जीवा उत्तर प्रदेश की टीम का हिस्सा होंगे.

विशाल माणे

यूमुंबा में सभी को अपने खेल का कायल कर चुके विशाल माणे अब पटना पाइरेट्स के लिए खेलते हुए दिखाई देंगे. फैजल अतराछली की जगह पर पटना की टीम ने विशाल माणे को अपनी टीम में लेने का बहुत ही अच्छा निर्णय लिया है क्योंकि विशाल यूमुंबा के बेहतरीन डिफेंडर में से एक थे. माणे मैदान में आगे आकर रेडर को टेकल करने की सक्षमता रखते हैं. वे रेडर को पकड़ने से पहले यह नहीं सोचते कि अगर रेडर द्वारा वे आउट हो गए तो क्या होगा. वे बस एकदम सामने से आकर रेडर को दबोच लेते हैं.

भारत के विभाजन की कहानी दर्शाती फिल्म ‘पार्टिशन: 1947’

हुमा कुरैशी की आने वाली फिल्‍म 'पार्टिशन: 1947' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और अब तक चर्चाओं से दूर रही फिल्‍म के ट्रेलर ने काफी सुर्खियां बटोर ली हैं. फिल्‍म का यह ट्रेलर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. ढाई मिनट के ट्रेलर में भारत के आखिरी वायसरॉय, लॉर्ड माउंटबेटन के समय की कहानी दिखाई गई हैं, जिन्‍हें ब्रिटिश के गुलाम भारत को आजाद भारत में बदलना था. माउंटबेटन को कैसे भारत में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच के टकराव को झेलना होता है और कैसे एक भारत को दो देशों में बांट दिया जाता है.

इस फिल्‍म में हुमा कुरैशी एक मुस्लिम महिला, आलिया का किरदार निभा रही हैं. वह एक ऐसे हिंदू शख्‍स से प्‍यार कर लेती हैं जो वायसरॉय के ऑफिस में काम करता है. बाद में इन दोनों को देश के विभाजन के चलते अलग होना पड़ता है.

'पार्टिशन: 1947' फिल्म विभाजन के दौरान वायसरॉय हाउस के भीतर होने वाली घटनाओं पर आ‍धारित फिल्‍म है. इस फिल्‍म का निर्देशन गुरिंदर चढ्ढा ने किया है. पहले यह फिल्‍म 'वायसरॉय हाउस' के नाम से रिलीज होने वाली थी. यह फिल्‍म दिवंगत भारतीय अभिनेता ओम पुरी की आखिरी फिल्‍मों में से एक है. इस फिल्‍म में ओम पुरी अ‍हम किरदार में नजर आने वाले हैं.

तीसरे वनडे में टीम इंडिया के नाम जुड़ेगा यह स्पेशल आंकड़ा

भारत और वेस्ट इंडीज के बीच पांच वनडे मैचों की सीरीज का तीसरा मैच आज यानी की 30 जून, 2017 को खेला जाएगा. इस मैच के साथ ही भारतीय टीम वनडे क्रिकेट में विदेशी जमीन पर 600 मैच खेलने वाली दूसरी टीम बन जाएगी. भारत से पहले सिर्फ पाकिस्तानी टीम यह मुकाम हासिल कर चुकी है.

भारत ने अभी तक कुल 914 मैच खेले हैं. जिनमें से 463 मैच में जीत तो 404 में हार मिली है. 40 मैच ऐसे हैं जिनका कोई नतीजा नहीं निकला.

घरेलू मैदान पर भारत ने कुल 315 वनडे मैच खेले हैं. इनमें से 183 में भारतीय टीम को जीत मिली है और 121 में हार. 2 मैच टाई रहे हैं और 9 का कोई नतीजा नहीं निकला.

अगर विदेशी जमीन पर खेले गए मैचों की बात करें तो भारत ने 599 में से 280 में जीत हासिल की है. 283 मैच में भारत हारा है और 5 मैच टाई रहे हैं. 31 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकला है.

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम ने विदेशी धरती पर कुल 700 मैच खेले हैं. पाकिस्तान ने इनमें से 354 मैच जीतें और 325 में हारे हैं. 7 मैच टाई रहे हैं और 14 का कोई नतीजा नहीं रहा.

इसके अलावा श्रीलंका ने 553 मैचों में 226 में जीत हासिल की है. वेस्ट इंडीज ने (519), ऑस्ट्रेलिया (473), न्यूजीलैंड ने (438) मैच विदेशी धरती पर खेले हैं. इंग्लैंड की टीम ने कुल 408 मैच अपनी जमीन के बाहर खेले हैं. इनमें से उसे 183 में जीत मिली है.

मैं 20 वर्षीय युवक हूं. मेरे अपनी चाची के साथ 2 वर्षों से शारीरिक संबंध हैं. क्या ये सब गलत है.

सवाल

मैं 20 वर्षीय युवक हूं. मेरे अपनी चाची के साथ 2 वर्षों से शारीरिक संबंध हैं और शारीरिक संबंधों के परिणामस्वरूप इस समय वे गर्भवती भी हैं. लेकिन इस अवस्था में भी वे मेरे साथ शारीरिक संबंध कायम रखना चाहती हैं. मैं मना करता हूं तो धमकी देती हैं कि वे हमारे संबंधों के बारे में पूरे परिवार को बता देंगी. मैं बहुत परेशान हूं औैर इस सब से निकलना चाहता हूं.

जवाब

पहले आप ने अपनी चाची के साथ शारीरिक संबंध बना कर बहुत बड़ी गलती की और चाची ने भी आप का फायदा उठाया. लेकिन अब जब स्थिति आप के नियंत्रण से बाहर हो गई है तो अब उस से निकलना चाहते हैं. माना कि इस सब में आप की चाची की भी गलती है लेकिन आप को उन का साथ नहीं देना चाहिए था. लेकिन अब पछताने से कुछ नहीं हो सकता.

वर्तमान स्थिति में अगर चाची आप को धमकी दे रही हैं परिवार वालों को सब सच बताने की तो इस में आप की बदनामी ज्यादा होगी हालांकि इस सब में उन की खुद की भी बदनामी होगी.

बहरहाल, इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए आप को साफ शब्दों में चाची को शारीरिक संबंधों के लिए न कहना होगा, वरना आप की चाची आप को भविष्य में भी ब्लैकमेल करती रहेंगी.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

अब आपका शहर तय करेगा आपकी सैलरी

क्या आपको इस बात की जानकारी है कि अब आपके शहर के हिसाब से आपकी सैलरी बढ़ेगी. यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किस कैटेगरी में आते हैं.

7वें वेतन आयोग के अनुसार देश के करीब 47 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी उनके शहर के हिसाब से बढ़ाई और तय की जाएगी. 7वें वेतन आयोग द्वारा देश के तमाम शहरों को, इस उद्देश्य के लिए तीन श्रेणियों, जिन्हें कथित तौर पर X, Y और Z नाम दिया गया है. में बांटा है.

एचआरए और महंगाई भत्ता

इस नए फैसले के मुताबिक एक्स, वाय और जेड श्रेणी के शहरों के लिए क्रमश: 24, 16 और 8 फीसदी एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) तय किया गया है.

एक्स श्रेणी के शहरों में कार्यरत कर्मचारियों को 5400, वाय श्रेणी के शहरों में कार्यरत कर्मचारियों को 3600 और जेड श्रेणी के शहरों में कार्यरत कर्मचारियों को 1800 रुपये से कम एचआरए नहीं मिलेगा.

इसका लाभ 7.5 लाख कर्मचारियों को हासिल होगा.

इसके अलावा महंगाई भत्ता दो चरणों में संशोधित होगा. महंगाई भत्ता 50 फीसदी से पार होने पर एक्स, वाय और जेड श्रेणी के शहरों में एचआरए क्रमश: 27, 18 और 9 फीसदी होगा. वहीं महंगाई भत्ता 100 फीसदी पार होने पर एचआरए क्रमश: 30, 20 और 10 फीसदी होगा. ये दरें तभी लागू होंगी जब महंगाई भत्ता क्रमश: 25 और 50 फीसदी की सीमा लांघ जाएगा.

इस तरह से शहरों के हिसाब से बढ़ेंगे भत्ते

उदाहरण के लिए आप नोएडा में हैं और आपकी बेसिक पे 18000 है तो आपको वाई श्रेणी के हिसाब से 16 फीसदी एचआरए और 18 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा.

तो आप भी जानिए किस श्रेणी में है आपका शहर…

एक्स कैटेगरी में आएंगे ये शहर

अभी तक की खबरों के मुताबिक अहमदाबाद , बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई पुणे इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं.

वाय कैटेगरी में शामिल हैं ये शहर

आगरा, अजमेर, इलाहाबाद, अमरावती, अमृतसर, आसनसोल, औरंगाबाद, बरेली, बेलगांव, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, भुबनेश्वर, बीकानेर, बोकारो, चंडीगढ़, कोयंबटूर, कटक, देहरादून, धनबाद, दुर्ग-भिलाई, दुर्गापुर, इरोड, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, गुलबर्गा, गुंटूर, गुड़गांव, गुवाहाटी, ग्वालियर, हुबली-धारवाड़, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जम्मू, जामनगर, जमशेदपुर, झांसी, जोधपुर, कानपुर, कन्नूर, काकीनाड़ा, कोच्ची, कोट्टायम, कोल्हापुर, कोल्लम, कोटा, कोझिकोड़, कुर्नूल, लखनऊ, लुधियाना, मदुरई, मलप्पुरम, मालेगांव, मैंगलोर, मेरठ, मुरादाबाद, मैसूर, नागपुर, नासिक, नल्लौर, नोएडा, पटना, पुदुच्चेरी, रायपुर, राजकोट, राजामुंद्री, रांची, राउरकेला, सालेम, सांगली, सिलिगुड़ी, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, तिरुअनंतपुरम, पलक्कड़, थ्रिसुर, तिरुचिरापल्ली, तिरुप्पुर, उज्जैन, वड़ोदरा, वाराणसी, वसई-विरार सिटी, विजयवाड़ा, विशाखापट्टनम, वारंगल.

अंतिम जेड कैटेगरी में देश के अन्य सभी शहरों को रखा गया है.

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