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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर मंडरा रहा है ये खतरा

माइक ब्रेयरली ओर ब्रैंडन मैकलम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर संभावित संकट की चेतावनी दी है और कहा है कि यह खेल जल्द ही उस स्तर पर पहुंच सकता है जहां उसे विश्व भर में टी20 लीग से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी.

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ब्रेयरली ने एमसीसी विश्व क्रिकेट समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी अंतिम बैठक में कहा कि जिन देशों के पास अपने चोटी के खिलाड़ियों को भुगतान करने के लिये पैसे की कमी होगी वे खिलाड़ी अपने देशों पर इन घरेलू टूर्नामेंटों को तरजीह दे सकते हैं.

उन्होंने कहा, 'यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए खतरा है केवल टेस्ट क्रिकेट ही नहीं बल्कि वनडे और टी20 के लिए भी.' समिति में शामिल न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान मैकलम ने कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए दक्षिण अफ्रीकी टीम में एबी डिविलियर्स टेस्ट क्रिकेट के लिए एक और चेतावनी है.

उन्होंने कहा, 'मैं टी20 लीग को किसी भी तरह से बड़ा खतरा नहीं मानता लेकिन टेस्ट क्रिकेट भी महत्वपूर्ण है और वह कैसा बना रहे यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है.'

राजकुमार एक जिंदादिल इंसान थे

21 वर्ष पहले 3 जुलाई 1996 को डायलौग किंग राजकुमार फिल्मी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए. लेकिन आज भी हमारे दिलों दिमाग में अपना मकाम बनाए हुए हैं. राजकुमार के जिंदगी का खुशनुमा सफर सब-इंस्पेक्टर से शुरू होकर फिल्मी दुनिया तक बेहद रोमांचक रहा. राजकुमार के डायलौग आज भी लोगों के जुबां में होते हैं. राजकुमार अच्छे एक्टर के साथ ही जिंदादिल इंसान भी थे

राजकुमार की एक्टिंग स्टाईल, उनके सफेद जूते और उनके डायलॉग आज तक दर्शकों के जेहन में जिंदा हैं. इस रिपोर्ट में दिखाते हैं, उनके जिंदादिल व्यक्तित्व के अनोखे अंदाज. पढ़िए राजकुमार के 11 सुपरहिट डायलॉग जो हिंदी सिनेमा में हमेशा के लिए अमर हो गए.

चिनॉय सेठ, जिनके घर शीशे के बने होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते. फिल्म 'वक्त'

आपके पैर बहुत खूबसूरत हैं. इन्हें ज़मीन पर मत रखिए, मैले हो जाएंगे. फिल्म 'पाकीजा'

हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे. लेकिन वह वक्त भी हमारा होगा. बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी. फिल्म 'सौदागर'

काश कि तुमने हमे आवाज दी होती तो हम मौत की नींद से भी उठकर चले आते. फिल्म 'सौदागर'

हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है. दुश्मन से सीधी बात करती है. फिल्म 'तिरंगा'

हम आंखो से सुरमा नहीं चुराते. हम आंखें ही चुरा लेते हैं. फिल्म 'तिरंगा'

हम तुम्हें वह मौत देंगे जो न तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी और न ही किसी मुजरिम ने सोची होगी. फिल्म 'तिरंगा'दादा तो इस दुनिया में दो ही हैं.

एक ऊपर वाला और दूसरा मैं. फिल्म 'मरते दम तक'

 हम कुत्तों से बात नहीं करते. 'मरते दम तक'

बाजार के किसी सड़क छाप दर्जी को बुलाकर उसे अपने कफन का नाप दे दो. 'मरते दम तक'

हम तुम्हें ऐसी मौत मारेंगे कि तुम्हारी आने वाली नस्लों की नींद भी उस मौत को सोचकर उड़ जाएगी. फिल्म 'मरते दम तक'.

सड़क पर सबके सामने कपड़े उतारकर लड़कों से ये क्या कह रही है लड़की, देखिए वीडियो

आज जमाना बदल गया है और जमाने के हिसाब से लोग भी बदल गए हैं. लड़के, लड़कियों के बीच एक समय तक पर्दा होता था. लड़कियां खुलकर अपनी कोई बात तक शेयर नहीं करतीं थीं, लेकिन आज देखिए कैसे एक लड़की के मुंह से वो सारे शब्द निकल जाते हैं जो भला लड़के के मुंह के क्या निकले हैं, जी हां ये हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि एक लड़की का वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, इस वीडियो में लड़की एक लड़के से ऐसे कुछ शब्द बोल रही है जिसे सुनने के बाद आपको शर्म आ जाएगी.

दरअसल वीडियो में लड़की जब लड़के से कहती है कि मेरी ब्रा का हुक बंद कर दो तो लड़का शर्म के मारे लाल हो जाता है, लेकिन वीडियो में तो अभी ट्विवस्ट बाकी है. लड़की फिर यहीं नहीं रुकती है, बल्कि राह चलते हर शख़्स से यही सवाल कर रही है कि क्या आप मेरी ब्रा…खोल देंगे?

लड़की सड़क पर चलते लड़कियों को भी नहीं छोड़ रही है, एक दो नहीं बल्कि, कई लोगों से सिर्फ यह कह रही है. इस वीडियो को देखने के बाद आप हंसी के मारे पागल हो जाएंगे. इस लड़की का एक ही शब्द आपको पागल कर देगा कि ‘क्या आप मेरी ब्रा का हुक बंद कर देंगे?’

आप भी देखिए यह मजेदार वीडियो

पढ़े सो पंडित होय

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजनीतिक व सांस्कृतिक पाखंड का भांडाफोड़ करने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गीता और उपनिषद पढ़ने का ऐलान कर डाला है. गीता में कृष्ण ने साफसाफ कहा है कि ये भाईभतीजे, सालेबहनोई, मामाभांजा आदि सब शरीर हैं, तू इन की परवा मत कर, हथियार उठा और इन का वध कर डाल, तभी कर्मण्य कहलाएगा. तू इन्हें नहीं मारेगा तो ये तुझे मार डालेंगे. सोलह दिन कुरुक्षेत्र की धूल फांकने के बाद अर्जुन का भ्रम दूर हो गया जिस से हुआ महाभारत. देश का माहौल और राहुल गांधी की उम्र गीता जैसे भारीभरकम धर्मग्रंथ पढ़ने की नहीं है क्योंकि लोकतंत्र में असल सारथी जनता होती है. बेहतर होगा कि राहुल गांधी बजाय वेदव्यास के, कबीर को पढ़ें जो एक दोहे में सार की बात कह गए कि ‘ढाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय.’

दलित शर्ट का सच

दलितों की चिंता में कई लोग और दल इतना दुबला चुके हैं कि अब तो उन का दिखना ही बंद हो गया है. लेकिन दलित चिंतक चंद्रभान प्रसाद पहले शख्स हैं जो दलितों की चिंता में, आर्थिक रूप से ही सही, बेतहाशा मुटा रहे हैं. चंद्रभान की गिनती इनेगिने दलित करोड़पतियों में होती है जो दलितों के नाम पर आएदिन नएनए प्रयोग करते रहते हैं.

दलित, दलित का बनाया ही कपड़ा पहने, इस बाबत चंद्रभान ने औनलाइन दलित शर्ट्स पेश की हैं, जिन की कीमतें 400 रुपए से 1,600 रुपए तक होंगी. तमाम बातों से दूर दलित ब्रैंड शर्ट का सच यह है कि चंद्रभान जैसे लोगों को भी पंडेपुजारियों की तरह दलितों की नहीं, बल्कि पैसे वाले दलितों की जेब की चिंता ज्यादा है जो आज बाजार के बड़े ग्राहक हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि नीली और सफेद शर्टधारी दलितों को अब घोषित तौर पर भेदभाव से छुटकारा मिल जाएगा. ये वही चंद्रभान हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले ही दलित फूड लौंच किया था.

टौपर घोटाला पार्ट टू

सुशासन ब्रैंड नीतीश कुमार के कार्यकाल में ऐसा दूसरी बार हुआ कि बोर्ड की परीक्षा में जिस ने टौप किया वह फिसड्डी निकला. इस का यह मतलब नहीं कि किसी गणेश कुमार का कला संकाय से टौप कर जाना कोई करिश्माई बात थी, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मानें तो चूंकि बिहार में नकल पर कड़ाई की जा रही है, इसलिए ऐसा हुआ.

बात सिरे से ही समझ के बाहर है कि नकल रोकने से इस का क्या ताल्लुक और दूसरे, बिहार में ही टौपर विशेषज्ञ क्यों हैं. एक उदाहरण दूसरे राज्य का नीतीश ने गिनाया पर वह बेमेल था. अब सीधेसीधे तो वे मानने से रहे कि बिहार में भ्रष्टाचार फिर पैर पसार रहा है जिस पर इस दफा उन का जोर नहीं चल रहा.

सादगी — एक सनक

रीताब्रता बनर्जी सीपीएम के राज्यसभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता थे, पर अब नहीं हैं. उन्हें पार्टी ने 3 महीने के लिए सस्पैंड कर दिया है. उन का जुर्म सिर्फ विलासिता और रईसी से रहना है जो पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाता.

अब भला यह भी कोई बात हुई कि सीपीएम भी कट्टरवादियों की तरह पेश आते अपने कथित संविधान और सिद्धांतों पर अड़ी रहे और खुद कट्टरवादियों की खुल कर आलोचना करे. हर किसी को हक है कि वह अच्छा खाएपीए और विलासिता से रहे. सीपीएम में यह अधिकार या सुविधा नहीं है, इसलिए उस का हश्र भी सामने है कि वह धीरेधीरे लुप्त होती जा रही है. यों रईसी से तो पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी भी रहते हैं पर उन की सादगी, सादगी है और रीताब्रता की सादगी रईसी है. साफ दिख रहा है कि कट्टरवाद में भेदभाव यहां भी है.

भूमि के सामाजिक सरोकार

अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने सिर्फ एक फिल्म की है लेकिन एक फिल्म के बाद से ही वे सामाजिक सरोकार के सिनेमा से जुड़ने वाली अभिनेत्री बन गई हैं. हाल में उन की नई फिल्म ‘टौयलेट एक प्रेमकथा’ का ट्रेलर जारी हुआ है. यह फिल्म देश में टौयलेट की समस्या को ले कर बनाई गई है.

फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से मथुरा के एक इलाके में भूमि की शादी एक ऐसे घर में हो जाती है जहां शौचालय नहीं है. अपने इस मूल अधिकार और सुविधा के लिए भूमि किस तरह रुढि़वादी समाज से टकराती है और अपने पति का साथ छोड़ देती है, यह बड़े दिलचस्प अंदाज में दिखेगा.

देश में शौचालय वाकई बड़ी समस्या है और इसे मुद्दा बना कर फिल्म बनाना अच्छी पहल है. इस के अलावा भूमि अन्य माध्यमों के जरिए भी अपनी  अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं. वे जोया अख्तर की प्रेम और वासना पर आधारित एक शौर्ट फिल्म में भी काम कर रही हैं. वैसे, भूमि की पहली फिल्म ‘जोर लगा के हईशा’ में भी महिला सशक्तीकरण की बात दिखी थी. उम्मीद है कि भूमि आगे भी सामाजिक सरोकार वाली फिल्में करती रहेंगी.

मनमोहन सिंह पर फिल्म

राजनेताओं पर अकसर फिल्में बनाई जाने की कड़ी में अब पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का नाम जुड़ गया है. बौलीवुड अभिनेता अनुपम खेर जल्द ही ‘द ऐक्सिडैंटल प्राइम मिनिस्टर’ किताब पर आधारित फिल्म में मनमोहन सिंह की भूमिका में नजर आएंगे. इस किताब को पत्रकार संजय बारू ने लिखा है. संजय 2004 से 2008 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार थे. जब यह किताब प्रकाशित हुई थी तब जम कर विवाद हुआ था. ऐसे में जब यह फिल्म रिलीज होगी तो कांग्रेस पार्टी के कई लोगों की तरफ से एतराज हो सकता है. मजेदार बात यह है कि फिल्म निर्माण से कई भाजपाई जुड़े हैं.

फिल्म में सोनिया गांधी का किरदार कौन निभा रहा है, इस की जानकारी अभी नहीं दी गई है. निर्देशक विजय रत्नाकर गुट्टे इस फिल्म को निर्देशित करेंगे. 

ऐसा भी होता है

मेरी  शादी को 30 साल हो गए. जब मेरी नईनई शादी हुई थी तब की बात है. मैं गांव में रहने वाली थी और मेरे पति शहर में रहते थे. तब गांव में गैस तो दूर, हमारे घर में स्टोव भी नहीं था. चूल्हे पर खाना बनता था.

जब मैं पति के साथ मुंबई आई तो पति ही स्टोव जला कर देते थे. तब मैं खाना बनाती थी.

एक दिन मेरे पति अपने एक दोस्त को ले कर घर आए और बोले कि अच्छी सी चाय बनाओ. तब हम एक ही कमरे में रहते थे. मैं कमरे से बाहर आ गई. मुझे रोना आ रहा था कि मैं क्या करूं  क्योंकि मुझे तो स्टोव जलाना भी नहीं आता था. इसी बीच मेरे पति बाहर आए और और फिर से बोले कि चाय बनाओ. मैं बोली, ‘‘स्टोव जला कर दो.’’ तब वे हंसने लगे और दोस्त के सामने बोले, ‘‘देखो, गांव की लड़की के साथ शादी की तो स्टोव भी जलाना पड़ता है.’’

रेखा इंगले

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मेरे पड़ोस में एक दंपती रहते हैं. वे पेशे से डाक्टर हैं. उन के एक लड़का है जिस का नाम आदित्य है. डाक्टर साहब के पिताजी उन के पास गांव से इलाज के लिए आए हुए थे. बड़े खुश थे, उन का इलाज भी हो रहा था और पोते के साथ समय भी अच्छा गुजर जाता था. एक दिन मैं ने पूछा, ‘‘चाचाजी, बेटाबहू दोनों अस्पताल चले जाते हैं, सुबहशाम क्लीनिक में रहते हैं और पोता स्कूल चला जाता है. ऐसे में आप का समय कैसे गुजरता है?’’

इस पर वे बोले, ‘‘बेटा, जब मैं छोटा था तो मुझे खिलौनों से बहुत प्रेम था. हमारे समय में इतने अच्छे खिलौने नहीं होते थे. हम लोग मिट्टी केखिलौने बना कर खेलते, पतंग उड़ाते, गिल्लीडंडा खेलते थे.

‘‘मेरा बेटा पैदा हुआ तो मैं पैसे के अभाव में उसे खिलौने खरीद कर नहीं

दे पाता था. हां, बेटा पढ़ने में बहुत होशियार था, तो डाक्टर बन गया. आज उस के पास इतना पैसा है कि वह हर अच्छे से अच्छा खिलौना बेटे आदित्य को खरीद कर देता है. आदित्य का कमरा खिलौनों से भरा हुआ है, परंतु उसे खिलौनों से प्रेम ही नहीं है. जब सब लोग काम पर चले जाते हैं तो मैं आदित्य के कमरे में बैठ कर उस के खिलौनों से खेलता हूं. खिलौनों से मेरा बचपन वापस लौट आया है.’’     

उपमा मिश्रा 

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