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दस साल बाद दोहराया इतिहास, अभय चोपड़ा को फिर दुबकना पड़ रहा गुमनामी में

हर समाज की ही तरह बौलीवुड में बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है. मगर बौलीवुड में पिछले दस वर्ष के अंतराल में दूसरी बार ऐसा हो रहा है, जब बौलीवुड से जुड़े एक अतिशक्तिशाली परिवार की तीसरी पीढ़ी को दो बार गुमनामी के अंधेरे में दुबकने पर मजबूर होना पड़ा हो, फिर भी वह चुप हो.

यह कोई कोरी कल्पना नही है, बल्कि बौलीवुड का एक ऐसा सच है, जिस पर ‘‘सरिता’’ पत्रिका आज पहली बार परदा उठा रही है. क्योंकि इस सच को जानते हुए भी बौलीवुड से जुड़े किसी भी शख्स ने कभी कोई आवाज नहीं उठाई.

चलिए, सबसे पहले तो हम उस शख्स का नाम उजागर कर देते हैं, जिससे जुड़ा यह सच है. जी हां यह शख्स कोई और नहीं बल्कि बौलीवुड के सर्वाधिक सफल व सामाजिक फिल्मों के सर्जक स्व. बलदेव राज चोपड़ा उर्फ बी आर चोपड़ा के पोते यानी कि फिल्म सर्जक स्व. रवि चोपड़ा के बेटे तथा स्व.बलदेव राज चोपड़ा के सबसे छोटे भाई व फिल्मकार स्व. यश चोपड़ा के भी पोते और फिल्मकार आदित्य चोपड़ा के भतीजे अभय चोपड़ा हैं,

जिनके निर्देशन में बनी नई फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ 3 नवंबर को प्रदर्शित होने वाली है.मगर अभय चोपड़ा को दस वर्ष के अंतराल में दूसरी बार गुमनामी के अंधेरे में दुबकने पर मजबूर होना पड़ा है.

सूत्रों के अनुसार अभय चोपड़ा ने अपने दादा व पिता की ही भांति बौलीवुड में फिल्मकार के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए विदेश में पढ़ाई की थी. विदेश में पढ़ाई के ही दौरान अभय चोपड़ा की दोस्ती मशहूर फिल्म सर्जक व अभिनेता स्व.राज कपूर के पोते और अभिनेता रिषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर से हुई थी.

सूत्रों के अनुसार विदेश से मुंबई वापस लौटने के बाद अभय चोपड़ा ने एक फिल्म ‘‘आखिरी फैसला’’ का निर्माण, लेखन व निर्देशन किया था. इस फिल्म का काफी हिस्सा मुंबई से सटे ठाणे के सेंट्रल जेल में फिल्माया गया था. फिल्म आखिरी फैसला में हीरो के रूप में मुख्य भूमिका रणबीर कपूर ने निभायी थी.

फिल्म में सुरेंद्र पाल और शरत सक्सेना की भी अहम भूमिकाएं थी. सूत्र दावा करते है कि इस फिल्म में वर्तमान समय में अभिनेता के रूप में शोहरत बतौर रहे अर्जुन कपूर सहायक निर्देशक के रूप में काम करते हुए क्लैप देने का काम किया था.

सूत्र बताते हैं इस फिल्म को किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में पुरस्कृत भी किया गया था. मगर फिल्म ‘‘आखिरी फैसला’’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो पाती, उससे पहले ही रणबीर कपूर को फिल्म्कार संजय लीला भंसाली की बड़ी फिल्म ‘‘सांवरिया’’ मिल गयी. फिल्म ‘‘सांवरिया’’ को रणबीर कपूर की लौंचिंग फिल्म के रूप में प्रचारित किया गया.

9 नवंबर 2007 को ‘‘सांवरिया’’ प्रदर्शित हुई थी, जिसे दर्शकों ने नकार दिया था. उधर अभय चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘‘आखिरी फैसला’’ कहां गयी, आज तक किसी को कुछ पता नहीं चला.

सूत्र दावा करते हैं कि फिल्म सांवरिया की शुरूआत जब हुई, तब तक अभय चोपड़ा के पिता रवि चोपड़ा आर्थिक संकट से गुजर रहे थे, पर वह हार मानने की बजाय हर मुसीबत से जूझते हुए नई फिल्में भी बना रहे थे.

रवि चोपड़ा की एक फिल्म‘‘बंदा यह बिंदास है’’तो अदालती चक्कर में 2009 में फंसी थी और यह फिल्म आज तक प्रदर्शित नहीं हो पायी. जबकि 12 नवंबर 2014 को रवि चोपड़ा का देहांत हो गया था.

सूत्र तो कई तरह की कहानी सुना रहे हैं, वह कितनी सच हैं, पता नहीं मगर हालात से लोग समझ सकते हैं कि क्यों 2007 में अभय चोपड़ा को गुमनामी के अंधेरे में दुबकना पड़ा था. अब पूरे दस वर्ष बाद एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है, पर उसकी शक्ल थोड़ी सी बदली हुई है.

1969 में बलदेव राज चोपड़ा ने ‘‘बी आर फिल्मस’’ के बैनर तले एक फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ का निर्माण किया था, जिसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. अब 1969 की फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ से प्रभावित होकर  इसी नाम से फिल्म का निर्माण किया गया है,जिसके पटकथा लेखक व निर्देशक अभय चोपड़ा हैं.

तीन नवंबर को प्रदर्शित हो रही इस फिल्म‘‘इत्तफाक’’की कहानी अभय चोपड़ा ने श्रेयश जैन व निखिल मेहरोत्रा के साथ मिलकर लिखी है. फिल्म का निर्माण करण जोहर, गौरी खान, रेणु रवि चोपड़ा, हीरु यश जोहर ने किया हैं. (यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हीरू यश जोहर, स्व. बलदेव राज चोपड़ा की सबसे छोटी बहन हैं. इस आधार पर रिश्ते में हीरू यश जोहर, अभय चोपड़ा की बुआ दादी और करण जोहर, अभय चोपडा के चाचा लगते हैं.)

अभय चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा, अक्षय खन्ना और सोनाक्षी सिन्हा की अहम भूमिकाएं हैं. मगर इस फिल्म के ट्रेलर लौंच के साथ ही करण जोहर की कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शन’ की तरफ से कह दिया गया कि वह इस रहस्य प्रधान फिल्म को किसी भी माध्यम पर प्रमोट नहीं करेंगे.

यानी कि फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ का ट्रेलर जरुर लोगों के सामने है. अन्यथा इस फिल्म को लेकर इस फिल्म से जुड़े किसी भी शख्स ने मीडिया से कोई बात नहीं की. फिल्म को प्रमोट करने के लिए अब तक कोई गतिविधि नहीं गयी?

अब यदि इस फिल्म ने बाक्स औफिस पर रिकार्ड तोड़ सफलता दर्ज करा दी, तब तो लोग पूछेंगे कि फिल्म का निर्देशक कौन है अन्यथा एक बार फिर नुकसान अभय चोपड़ा का होगा. यानी कि एक बार फिर अभय चोपड़ा गुमनामी के अंधेरे कोने में दुबकने के लिए मजबूर होंगे.

इस तरह सूत्र इस तरफ इशारा तो कर रहे हैं कि एक बार फिर इतिहास अपने आपको दोहरा रहा है. पर हमारे सूत्र यह नहीं बता रहे हैं कि इस बार अभय चोपड़ा को गुमनाम अंधेरे कोने में दुबकने के लिए किसने या किन हालातों ने मजबूर किया है. आखिर अभय चोपड़ा खुद मीडिया के सामने क्यों नहीं आ रहे हैं

अब अभय चोपड़ा के मन में क्या चल रहा है, यह तो वही बेहतर जानें…

गौरी खान की हैलोवीन पार्टी में छाया बेटी सुहाना का गोल्डन अवतार

बौलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बेटी सुहाना अपने लुक्‍स और खूबसूरत अंदाज के चलते अक्‍सर सुर्खियों में रहती हैं.

हर जगह अपने अंदाज से छा जाने वाली सुहाना इस बार भी अपने गोल्डन अवतार से मम्मी गौरी खान की पार्टी में छा गईं.

बता दें कि शुक्रवार रात गौरी खान ने हैलोवीन पार्टी दी थी जिसे उन्होंने खुद डिजाइन किया था. गौरी खान द्वारा होस्‍ट की गई इस पार्टी में यूं तो बौलीवुड के कई सितारे पहुंचे लेकिन बेटी सुहाना का हौट लुक सारी लाइमलाइट ले गया. मम्मी की इस हैलोवीन पार्टी में सुहाना गोल्‍डन अवतार में नजर आईं. गोल्‍डन कलर की वनपीस बाडीकान ड्रेस के साथ हाई हील्‍स में वह काफी खूबसूरत नजर आ रही थीं.

मुंबई में हुई इस पार्टी में एक बार फिर से सुहाना खान ने सारी नजरों को अपनी तरफ मोड़ लिया. आप भी देखें मम्‍मी गौरी की पार्टी में किस खूबसूरत अंदाज में दिखीं सुहाना खान.

गौरी खान की हैलोवीन पार्टी में सुहाना खान कुछ ऐसे रेड कारपेट पर नजर आईं.

गौरी खान के साथ सुहाना खान.

गौरी खान की इस पार्टी में इसी साल तलाक के बाद अलग हो चुके अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा भी नजर आईं.

इसके अलावा इस पार्टी में, एक्‍ट्रेस इलियाना डीक्रूज, ऋतिक की एक्‍स वाइफ सुजैन खान, संजय कपूर, सोहेल खान की पत्‍नी सीमा खान, बिग बौस की एक्‍स कंटैस्‍टेंट मंदाना करीमी और सना खान भी नजर आईं.

सना खान, इलियाना डीक्रूज और मंदाना करीमी.

गौरी खान के साथ सुजैन खान

17 साल की सुहाना इन दिनों अपने परिवार के साथ खूबसूरत लम्‍हें बिता रही हैं. वह मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई करती हैं. शाहरुख खान की बेटी सुहाना अपने एक्टिंग में सफर शुरू करने की बात कह चुकी हैं और शाहरुख ने भी यह साफ कर दिया है कि वह जो करना चाहती है वह कर सकती है.

अब यूट्यूब नहीं होगा बंद, चाहे हो जाए स्क्रीन लौक

वीडियो स्ट्रीमिंग एप यूट्यूब का इस्तेमाल इन दिनों चलन में है. फ्री या किफायती दरों पर मिलने वाले डेटा के दौर में आज हर कोई वीडियो देखने या औडियो सुनने के लिए इसे अपने मोबाइल स्क्रीन पर धड़ल्ले से प्ले कर रहा है.

लेकिन एक खास बात यह है कि अगर आप यूट्यूब पर कोई गाना सुन रहे हैं को उसे सुनने के लिए आपको अपनी मोबाइल स्क्रीन को औन ही रखना होता है क्योंकि जैसे ही स्क्रीन लौक होती है यूट्यूब रुक जाता है.

यानी अगर आप यूट्यूब वीडियो देख रहे हैं तो फिर आप उसके अलावा मोबाइल के किसी अन्य फीचर का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. लेकिन हम अपनी इस खबर में आपको ऐसी ट्रिक बता रहे है जिसकी मदद से फोन का इस्तेमाल करते हुए आप यूट्यूब पर वीडियो देख या सुन सकते हैं.

एंड्रौयड फोन के लिए

  • इसके लिए सबसे पहले अपना क्रोम ब्राउजर खोलें और com पर नेविगेट करें.
  • स्क्रीन के ऊपर दायीं ओर दिए गए तीन डौट मेनू बटन को क्लिक करें. अब मेन्यू में नीचे “Request desktop site” औप्शन पर जाएं और इसे औन करने के लिए इस पर टैप करें
  • अब आप उस गाने को चुनें जिसे आप प्ले करना चाहते हैं. यूट्यूब के नोटिफिकेशन को दिखाने के लिए किसी भी पौपअप को स्वीकार करें.
  • गाने प्ले होने के बाद, क्रोम एप को बैकग्राउंड में छोड़ दे और अब आप दूसरे फीचर्स इस्तेमाल कर सकते हैं. पहली बार में प्लेबैक रूक जाएगा लेकिन आप फोन के नोटिफिकेशन मेन्यू की जरिए ट्रैक को कंट्रोल कर सकते हैं.

एंड्रौयड फोन की तरह iOS यूजर्स भी अपने फोन में इस ट्रिक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आईफोन यूजर्स को नया मोबाइल ब्राउजर Dolphin डाउनलोड करना होगा.

iOS फोन के लिए

  • अपने फोन में ब्राउजर को डाउनलोड करने के बाद com पर जाएं. जिस गाने को आप सुनना चाहते हैं उसे प्ले करें और पेज को छोड़ दे. आप iOS कंट्रोल सेंटर के माध्यम से प्लेबैक को कंट्रोल कर सकते हैं.
  • आप अपने फोन को एक तरफ रख सकते हैं और गाना औटोमेटिक प्ले होता रहेगा. आप इसे लौकस्क्रीन से कंट्रोल कर सकते हैं.
  • इस तरह आप फोन की स्क्रीन बंद होने के बाद भी अपनी पसंद की वीडियो को यूट्यूब में प्ले कर सकते हैं.

कुदरत के अदभुत नजारों का संगम अंडमान निकोबार

दूर तक फैला साफ समुद्र, साफस्वच्छ हवा, तरहतरह के समुद्री पक्षी, दूर तक फैले जंगल, काजू और नारियल के पेड़ और मनमोहक नजारों के साथ लजीज समुद्री व्यंजनों का अगर लुफ्त लेना है तो एक बार अंडमाननिकोबार की सैर जरूर कीजिए.

यहां का नीला पानी और शांत समुद्र किसी भी माने में मारीशस, मालदीव, मलेशिया या सैशल्स से कम नहीं. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को स्नेह से ‘एमरल्ड आइलैंड्स’ (पन्ने जैसे द्वीप) कहा जाता है. इस की खासीयत है इस की अनुपम सुंदरता और चकित कर देने वाली वनस्पति तथा जीवजंतु. यहां के आकर्षक स्थान, सूर्य को चूमते समुद्री तट, मनमोहक पिकनिक स्पौट्स और कई अन्य आश्चर्य हैं, जो सैलानियों को बरबस आकर्र्षित करते हैं. समुद्री तट अपने विस्तार और सुनहरी रेत की वजह से मनमोहक बन गए हैं.

प्रमुख पर्यटन स्थल

पोर्ट ब्लेयर: कभी काले पानी की सजा की संज्ञा से पहचाने जाने वाले आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पोर्ट ब्लेयर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूहों की राजधानी है. यह जगह सैलानियों के घूमने के लिए प्रमुख है. यहां पर्यटकों की सुविधाओं और उन के मनोरंजन के कई इंतजाम किए गए हैं.

यहां जलक्रीड़ा की भी व्यवस्था है, जो एक अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र है. पोर्ट ब्लेयर से 35 किलोमीटर दक्षिण में स्थित चिडि़या टापू, जिसे सनसैट पौइंट भी कहते हैं अपने मनमोहक समुद्री तटों के लिए मशहूर है. कोरबिन कोव, माउंट हैरिट, रोस टापू, मधुबन तट तथा काला पत्थर पोर्ट ब्लेयर के अन्य लोकप्रिय स्थल हैं. पोर्ट ब्लेयर में ही ऐसे कई होटल हैं जहां आप ठहर कर अपनी यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं.

सैल्युलर जेल: अंडमान की यात्रा पर जाने वाला हर पर्यटक सैल्युलर जेल की चौखट पर सिर जरूर नवाता है. पोर्ट ब्लेयर में मौजूद सैल्युलर जेल यहां की ऐतिहासिक धरोहरों में सब से प्रमुख है. यह स्वतंत्रता सेनानियों पर अंगरेजी हुकूमत के अत्याचार की मूक गवाह है. यहां बंद किए जाने वाले सेनानियों को तरहतरह से प्रताडि़त किया जाता था. 1906 में बन कर तैयार हुई इस सैल्युलर जेल में बंद होने की सजा को ही काला पानी कहा जाता रहा है.

हैवलौक द्वीप: यहां के स्वच्छ निर्मल पानी का सौंदर्य सैलानियों का मन मोह लेता है. इन द्वीपों में कई बार तैरती हुई डौल्फिनों के झुंड देखे जा सकते हैं. शीशे की तरह साफ पानी के नीचे जलीय पौधे व रंगीन मछलियों को तैरते देख कर पर्यटक अपनी बाहरी दुनिया को भूल जाते हैं.

लंबा द्वीप: अंडमान में मनोरम दृश्य देखने वालों के लिए लंबा द्वीप यानी लौंग आइलैंड सब से पसंदीदा जगहों में से एक है. पर्यटक इस जगह पर इस इलाके में पाई जाने वाली डौल्फिनें देखने जुटते हैं. लालाजी बे पर रेतीला समुद्री तट भी लौंग आइलैंड पर एक महत्त्वपूर्ण जगह है.

महात्मा गांधी मरीन नैशनल पार्क: अंडमान के मनोरम दृश्यों में शामिल है-महात्मा गांधी मरीन नैशनल पार्क. यह नैशनल पार्क वांडूर में है. यह खुले समुद्र और संकरी खाड़ी के साथ ही 15 द्वीपों से मिल कर बना है. पर्यटक इस जगह दुर्लभ मूंगों की खूबसूरती देखने और अंडमान के समुद्री जीवों की आकर्षक जिंदगी देखने आते हैं.

ऐंथ्रोपोलौजिकल म्यूजियम: एेंथ्रोपोलौजिकल म्यूजियम यानी मानवशास्त्रीय संग्रहालय में अंडमान के आदि युग के जीवन के अवशेष मिलते हैं. इस वजह से यहां अंडमान की अलगअलग आदिम जातियों की कलाकृतियां, बरतन, कपड़े, मूर्तियां आदि देखने को मिलती हैं.

निकोबार में देखने लायक जगहें

इस द्वीप के प्रमुख आकर्षणों में पक्षी और फूल प्रमुख हैं, जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. निकोबार के मनोरम दृश्यों में विविधता लिए समुद्री तट भी शामिल हैं. कोई भी व्यक्ति यहां आ कर इस द्वीप की शांत प्राकृतिक सुंदरता का आनंद उठा सकता है. निकोबार द्वीप में दूरदूर तक मनोरम खूबसूरती और काव्यात्मक सुंदरता फैली हुई है.

इंदिरा पौइंट

यहां के कुछ पर्यटन केंद्र खासे लोकप्रिय हैं, जहां साल भर पर्यटकों का जमावड़ा रहता है. इन जगहों में इंदिरा पौइंट भी शामिल है, जहां लोग बारबार जाना पसंद करते हैं. इंदिरा पौइंट एक विशाल लाइटहाउस है. आसमान छूती इस की इमारत सब से खूबसूरत जगहों में से एक है. आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच समुद्री तट प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं. इस समुद्र तटीय इलाके में आप को बिना प्रदूषण वाले वातावरण में कुछ वक्त बिताने का मौका मिलता है.

इंदिरा पौइंट लाइटहाउस 1972 में बना था. मलक्का से आने वाले जहाजों के लिए तब से यह एक महत्त्वपूर्ण लैंडमार्क है. इस लाइट स्टेशन को पहले पार्संस पौइंट और फिर पाइगमेलियन पौइंट कहा जाता था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इस जगह आ चुकी हैं. इसी वजह से इस का नाम उन पर रखा गया.

कार निकोबार

मूलरूप से यह निकोबार द्वीप समूह का मुख्यालय है. कोई भी व्यक्ति कार निकोबार द्वीप पर प्रकृति की गोद में अपनी छुट्टियां खुशी के साथ बिता सकता है. यह उर्वर जमीन नारियल पेड़ों से ढकी है. यहां समुद्री पानी का शोर भी पर्यटकों के दिमाग पर हावी रहता है. प्रकृति की रहस्यमय सुंदरता को निकोबार जिले के कार निकोबार द्वीप पर ज्यादा करीब से अनुभव किया जा सकता है.

पोर्ट ब्लेयर से इस द्वीप तक पहुंचने में समुद्र के रास्ते 16 घंटे का वक्त लगता है. निकोबारी झोंपडि़यों में रहना यहां का सब से खास अनुभव है, जिन्हें बांस के बेस पर बनाया जाता है. इस में फर्श से दाखिल होते हैं. झोंपड़ी लकड़ी से बनी होती है.

कटचाल

कटचाल द्वीप की खूबसूरती अतुलनीय है. यह 174.4 वर्ग किलोमीटर में फैला है. बेमिसाल खूबसूरती की वजह से यह द्वीप दुनिया भर के पर्यटकों में खासा लोकप्रिय है. कटचाल द्वीप खूबसूरत प्राकृतिक सुंदरता से भरा है. समुद्र का पानी क्रिस्टल क्लीयर है. समुद्री तट पर सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा आप के दिमाग में अविस्मरणीय अनुभव दे जाएगा.

ग्रेट निकोबार द्वीप

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कई द्वीप आते हैं. इन में ही एक है ग्रेट निकोबार द्वीप. दुनिया के अलगअलग कोनों से हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. उन का उद्देश्य यही होता है कि ग्रेट निकोबार की अनदेखी प्राकृतिक सुंदरता को निहारना.

कार्बिन कोव्स समुद्र तट

हरेभरे वृक्षों से घिरा यह समुद्र तट एक मनोरम स्थान है. यहां समुद्र में डुबकी लगा कर पानी के नीचे की दुनिया का अवलोकन किया जा सकता है. यहां से सूर्यास्त का अद्भुत नजारा काफी आकर्षक प्रतीत होता है. यह बीच अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए लोकप्रिय है.

रोज द्वीप

यह द्वीप ब्रिटिश वास्तुशिल्प के खंडहरों के लिए प्रसिद्घ है. रोज द्वीप 200 एकड़ में फैला हुआ है. फिनिक्स उपसागर से नाव के माध्यम से चंद मिनटों में रोज द्वीप पहुंचा जा सकता है. सुबह के समय यह द्वीप पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है.

बैरन द्वीप का ज्वालामुखी

यहां भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है. यह द्वीप लगभग 3 किलोमीटर में फैला है. यहां का ज्वालामुखी 28 मई, 2005 में फटा था. तब से अब तक इस से लावा निकल रहा है. बैरन द्वीप पर आग का लावा उगल रहा ज्वालामुखी देख कर पर्यटक बहुत अचंभित होते हैं.

डिगलीपुर

यह स्थान संतरों, चावलों और समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्घ है. यहां का सैडल पीक आसपास के द्वीपों से सब से ऊंचा पौइंट है, जो 732 मीटर ऊंचा है. अंडमान की एकमात्र नदी कलपोंग यहां से बहती है.

वाइपर द्वीप

यहां किसी जमाने में गुलाम भारत से लाए गए बंदियों को पोर्ट ब्लेयर के पास वाइपर द्वीप पर उतारा जाता था. अब यह पिकनिक स्थल के रूप में विकसित हो चुका है. यहां आज भी अंगरेजी शासन के दौरान बने टूटेफूटे फांसी के फंदे निर्मम अतीत के साक्षी बने खड़े हैं. यहीं पर शेर अली को भी फांसी दी गई थी, जिस ने 1872 में भारत के गवर्नर जनरल लौर्ड मेयो की हत्या की थी.

रैडस्किन द्वीप

आइलैंड टूरिज्म फैस्टिवल यहां मनाया जाने वाला मुख्य उत्सव है. अंडमाननिकोबार प्रशासन की आरे से आयोजित यह उत्सव हर साल

30 दिसंबर को शुरू हो कर 15 जनवरी तक चलता है. इस उत्सव के अंतर्गत प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा कई तरह की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं. इस उत्सव में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के अलावा स्थानीय जनजातीय कलाकारों की भी भरपूर भागीदारी होती है.

अंडमान और निकोबार प्रशासन साल भर पर्यटकों का दिल खोल कर स्वागत करता है. पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख साधन टूरिज्म ही है. पूरा साल देश और विदेश से लाखों पर्यटक छुट्टियां बिताने यहां आते हैं.

कहां ठहरें

इस केंद्र शासित प्रदेश में कई श्रेणी के होटल हैं, जो इन द्वीपों पर आने वाले पर्यटकों को सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराते हैं. इस के अलावा यहां रिजोर्ट्स, रेस्तरां और कैफे हैं, जो सभी तरह के पर्यटकों की जरूरतों को पूरा करते हैं. अंडमान और निकोबार में अंडमान टील हाउस, हवाबिल नैस्ट, टर्टल रिजोर्ट और सरकारी सर्किट हाउस ठहरने के लिए अच्छी जगहें हैं. पर्यटकों के ठहरने की सब से अच्छी और आधुनिक सुविधाओं से संपन्न जगह साउथ अंडमान व पोर्ट ब्लेयर के आसपास हैं. हैवलौक और कैंपबेल के आसपास भी अच्छी और सस्ती सुविधाएं हैं. बजट के हिसाब से यहां ठहरने के साधन मौजूद हैं.

– अतुल सिंघल 

(लेखक अंडमाननिकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल के ओएसडी हैं)

गैंगस्टरों का गढ़ बनता पंजाब और पुलिस की बढ़ती परेशानी

जरा नब्बे के दशक की मुंबई को याद करें. महानगर मुंबई में सक्रिय दरजनों छोटेबडे़ क्रिमिनल गैंग के खौफ ने लोगों की नींद उड़ा रखी थी. अपहरण, फिरौती, हफ्तावसूली आम बात थी. क्रिमिनल गैंग के बीच की रंजिश और अंडरवर्ल्ड में वर्चस्व की लड़ाई को ले कर खूनी गैंगवार भी अपने चरम पर था. उस समय मुंबई में इतने क्रिमिनल गैंग सक्रिय थे कि पुलिस के लिए उन्हें सूचीबद्ध करना मुश्किल हो रहा था. फिर भी अंडरवर्ल्ड में दाऊद, छोटा राजन, सुलेमान, छोटा शकील और अरुण गावली जैसे बड़े नाम थे.

इस समय पंजाब में भी नब्बे के दशक वाले मुंबई जैसी हालत बन चुके हैं, जो काफी चिंताजनक होने के साथसाथ हैरान करने वाली बात है. पंजाब ने अतीत में सिख चरमपंथियों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का खूनी और हिंसक दौर अवश्य देखा था, लेकिन संगठित, आक्रामक और खुल्लमखुल्ला कानून एवं व्यवस्था को चुनौती देने वाले संगठित अपराध के मामले में उस का कोई इतिहास नहीं रहा है.

मादक पदार्थों के धंधे ने पंजाब में अनेक क्रिमिनल गैंग पैदा किए हैं. कल तक जो आपराधिक मानसिकता वाले नौजवान आतंकवाद की तरफ आकर्षित हो रहे थे, वे अब मादक पदार्थों के धंधे में ऊंचे मुनाफे को देखते हुए क्रिमिनल गैंग तैयार करने लगे हैं.

देखते ही देखते पंजाब में अनेक खतरनाक क्रिमिनल गैंग तैयार हो गए और पुलिस एक तरह से कुंभकर्णी नींद सोती रही. इन क्रिमिनल गैंगों को किसी न किसी रूप से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था. शायद यह भी एक बड़ी वजह थी कि पुलिस लगातार चुनौती बनते जा रहे गैंगों के विरुद्ध प्रभावी काररवाई नहीं कर सकी और ये गैंग दुस्साहसी और खतरनाक होते गए.

कुकुरमुत्तों की तरह पंजाब में क्रिमिनल गैंग पैदा हुए तो जल्दी ही जरायम की दुनिया में वर्चस्व को ले कर उन में आपसी मारकाट शुरू हो गई. यह गैंगवार पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया. खूनी गैंगवार को रोकने के लिए पुलिस पर जब दबाव पड़ा तो उस ने कुछ गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर के जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.crime news

पर गैंगस्टरों के खिलाफ कोई भी काररवाई करने में पुलिस ने बड़ी देर कर दी. गैंगस्टर अब तक बडे़ खतरनाक और दुस्साहसी हो चुके थे. सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करने वाले गैंगस्टरों की धमक और हिम्मत का सही अंदाजा पुलिस को उस समय कुछकुछ हुआ, जब वे पुलिस पर हमला कर के हिरासत से अपने साथियों को छुड़ाने के साथ अपने विरोधियों को मारने जैसी अत्यंत दुस्साहस से भरी काररवाइयां करने लगे.

सभी गैंगस्टर कमोवेश जवान हैं और उन के काम करने का स्टाइल फिल्मों से प्रभावित लगता है. वे सोशल मीडिया पर पुलिस को खुल्लमखुल्ला चुनौती देते हुए विरोधी ग्रुप के लोगों की हत्या करने और जेल में बंद अपने साथियों को छुड़ाने जैसी बात कहने लगे हैं. पुलिस ने शुरू में ऐसी धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया. आतंकवाद जैसा गंभीर समस्या का सामना कर चुकी पंजाब पुलिस का खयाल था कि गैंगस्टरों में इतनी हिम्मत नहीं कि जेलों में बंद अपने साथियों को जेल से छुड़ा सकें.

पुलिस का उक्त खयाल उस की खुशफहमी ही साबित हुआ. गैंगस्टरों ने जैसा कहा, वैसा कर के दिखा भी दिया. आतंकवादी भी ऐसी हिम्मत कर सके थे, जैसी हिम्मत इन गैंगस्टरों ने कर दिखाई. पंजाब की नाभा जेल काफी सुरक्षित मानी जाती रही है.

नाभा जेल को सुरक्षित और अभेद्य समझते हुए खूंखार और खतरनाक अपराधियों को उसी में रखने को सुरक्षा एजेंसियां प्राय: प्राथमिकता देती रही हैं. गिरफ्तारी के बाद पंजाब के खतरनाक विक्की गौंडर गैंग के कुछ खूंखार सदस्यों को इसी जेल में रखा गया था.

27 नवंबर, 2016 को चौंकाने वाली अप्रत्याशित काररवाई करते हुए विक्की गौंडर गैंग के सदस्यों ने पूरी तैयारी के साथ बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली नाभा जेल पर धावा बोल कर सारी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए वहां बंद अपने 6 साथियों को छुड़ा कर फिल्मी अंदाज में भाग खड़े हुए. गौंडर गैंग के सारे सदस्य पुलिस की वरदी में आए थे.

नाभा जेल की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि पंजाब में सक्रिय क्रिमिनल गैंग कितने खतरनाक हो चुके हैं और वे जैसा कहते हैं, वैसा करने में समर्थ भी हैं. नाभा जेल से अपराधियों को भगाने के मास्टरमाइंड विक्की गौंडर ने इस के बाद विरोधी गैंग के लोगों पर हमले शुरू कर के गैंगवार को और भयानक रूप दे दिया.

सारी कोशिशों के बाद भी पुलिस खतरनाक और तेजतर्रार गैंगस्टरों के सामने असहाय और फिसड्डी साबित हुई. पुलिस की सारी सावधानियां और दावों के बावजूद नाभा जेल से अपराधियों को भगाने के लिए जिम्मेदार गैंगस्टर विक्की गौंडर ने अपने कुछ साथियों के साथ मिल कर 20 अप्रैल, 2017 को गुरदासपुर के गांव कोठे पराला में दुश्मन गैंग के सरगना हरप्रीत उर्फ सूबेदार और उस के 2 साथियों सुखचैन तथा हैप्पी को सरेआम मौत के घाट उतार दिया.crime news

इतना ही नहीं, अपने खूनी कारनामे को महिमामंडित करते हुए इस घटना को फेसबुक पर भी डाला. इस वारदात के बाद पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि गैंगस्टरों को ले कर पंजाब में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अगर शीघ्र ही इस से निपटा नहीं गया तो पंजाब की शांति को एक बार फिर से खतरा हो सकता है. हिंसा, हिंसा है, यह आप की मर्जी है कि इस पर आतंकवाद का ठप्पा लगाएं या आम अपराध का.

पंजाब में गैंगवार की स्थिति कितनी विस्फोटक और गंभीर हो रही है, इस का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंजाब सरकार मकोका की तर्ज पर पकोका कानून बनाने की तैयारी कर रही है. स्मरण रहे कि मकोका की मदद से मुंबई पुलिस को अपराधियों से निपटने में आसानी हुई थी.

पंजाब पुलिस की माने तो इस समय पंजाब में 60 के करीब छोटेबड़े गैंग सक्रिय हैं. इन गैंगों से जुड़े 35 गैंगस्टर को पुलिस बेहद खतरनाक मानती है और शीघ्र ही उन्हें जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहती है. गैंगस्टरों को काबू किए बिना नशे के कारोबार पर अंकुश लगाना मुश्किल है.

पंजाब के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की छवि अपराधियों के प्रति कठोर रवैया रखने वाले प्रशासक वाली रही है. हालिया चुनाव उन्होंने पंजाब के लिए नासूर बन चुके नशे के मुद्दे पर जीता है. ऐसे में नशे की समस्या के साथसाथ गैंगस्टरों से भी निपटना उन के लिए दोहरी चुनौती है.   crime news

पैसे के लिए वन्यजीवों की तस्करी करने वाहे गिरोह का भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से पुलिस प्रशासन काफी सख्त था. नतीजा यह हुआ कि अन्य राज्यों की सीमाओं से गुजरने वाले वाहनों पर खास नजर रखी जाने लगी. मीरजापुर के एसपी कलानिधि नैथानी ने भी अपने यहां सभी थानाप्रभारियों को सख्त निर्देश दे रखा था कि बाहर से आने वाले वाहनों पर सख्त नजर रखी जाए. 8 जनवरी, 2017 को यातायात प्रभारी देवेंद्र प्रताप सिंह मंगला सिंह, दिनेश यादव, गोविंद चौबे तथा भरूहना चौकीप्रभारी पंकज कुमार राय के साथ भरूहना चौराहे पर आनेजाने वाले वाहनों की जांच कर रहे थे. जांच के दौरान चुनार-वाराणसी की ओर से आने वाली एक इनोवा कार को रोका गया.

इस की वजह यह थी कि उस की नंबर प्लेट पर इस तरह मिट्टी लगाई गई थी ताकि उस का नंबर जल्दी से दिखाई न दे. सिपाहियों ने कार रुकवाई तो उस में ड्राइवर सहित 3 लोग सवार थे. सिपाहियों ने कार में पीछे झांका तो उस में 4-5 बड़ेबड़े कार्टून रखे दिखाई दिए.

सिपाहियों ने नंबर प्लेट की मिट्टी पैर से हटाई तो पता चला कि कार आंध्र प्रदेश की थी. उस में बैठे लोग संदिग्ध लगे तो पुलिस ने कार में बैठे लोगों से कार की डिक्की खोलने को कहा. जब उन लोगों ने डिक्की खोलने में आनाकानी की तो पुलिस का शक बढ़ गया. पुलिस को मामला कुछ गड़बड़ लगा.

मीरजापुर जनपद नक्सल प्रभावित सोनभद्र और चंदौली जिलों से सटा होने के साथसाथ मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड से ले कर छत्तीसगढ़ के नजदीक है, इसलिए मादक पदार्थों, विस्फोटक पदार्थों से ले कर वन्यजीवों की खाल, अवैध शस्त्र आदि के तस्कर इधर से गुजरते हैं.crime news

इन्हीं बातों को ध्यान में रख कर पुलिस ने थोड़ी सख्ती से डिक्की खोलने को कहा तो ड्राइवर बोला, ‘‘साहब, उस में कुछ खास नहीं है. थोड़ा घरेलू सामान है, जिसे हम घर ले जा रहे हैं.’’

‘‘घरेलू सामान है तो दिखाने में क्या हर्ज है. चलो, तुम डिक्की नहीं खोलना चाहते तो हमीं खोल कर देख लेते हैं.’’ कार के पास खड़े एक सिपाही ने कहा ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ कर उस ने डिक्की खोल भी दी. इसी के साथ उस ने कार के पिछले हिस्से में रखे कार्टूनों में से जैसे ही एक कार्टून पर पड़ा बोरा उठाया, अंदर से शेर के गुर्राने जैसी आवाज आई. सिपाही डर कर पीछे हट गया.

जानवर के गुर्राने की आवाज वाहनों की जांच में लगे अन्य पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने ही नहीं, वहां खड़े तमाशा देख रहे अन्य लोगों ने भी सुन ली थी. इसलिए पुलिस अधिकारी जहां कार के करीब पहुंच गए, वहीं तमाशबीन भी नजदीक आ गए थे.

पुलिस अधिकारियों ने जब सभी कार्टूनों पर पड़ा बोरा हटाया तो अंदर जो दिखाई दिया, उसे देख कर सब के सब हैरान रह गए. सभी कार्टूनों में पिंजरे रखे थे, जिन में दुर्लभ प्रजाति के जानवर बंद थे. पुलिस उन्हें गौर से देख रही थी कि तभी मौका पा कर गाड़ी में सवार 3 लोगों में से 2 लोग कार की चाबी ले कर भाग निकले. संयोग से एक आदमी पुलिस के हाथ लग गया.

दुर्लभ वन्यजीवों के साथ एक आदमी के पकड़े जाने की सूचना देवेंद्र प्रताप सिंह ने एसपी कलानिधि नैथानी को देने के साथ पुलिस लाइन से क्रेन मंगवा भी ली. क्रेन की मदद से इनोवा कार संख्या एपी28डी सी-3173 को पुलिस लाइन ले जाया गया.

सूचना पा कर डीएफओ के.के. पांडेय, सीओ (नगर) बृजेश कुमार तथा क्राइम ब्रांच प्रभारी विजय प्रताप सिंह भी पुलिस लाइन पहुंच गए. देखतेदेखते शेर जैसे दिखने वाले दुर्लभ जीव के बरामद होने की सूचना पूरे शहर में फैल गई.

इस के बाद पुलिस लाइन के आसपास की सड़कों पर भीड़ लगने लगी. सूचना पा कर एसपी कलानिधि नैथानी, एएसपी आशुतोष शुक्ल, सीओ बी.के. त्रिपाठी भी पुलिस लाइन पहुंच गए थे. अधिकारियों की उपस्थिति में कार से पिंजरे बाहर निकाले गए. कार की तलाशी में 32 बोर का एक रिवौल्वर और कुछ कारतूस भी बरामद हुए.

इस सब से साफ हो गया कि यह दुर्लभ प्रजाति के जानवरों की तस्करी का मामला है. पुलिस ने इन जानवरों के साथ जिस आदमी को पकड़ा था, उस का नाम अब्दुल आरिफ था. वह हैदराबाद का रहने वाला था. पूछताछ में पता चला कि उस के फरार हुए साथियों के नाम फहीम और इमरान थे.

अगले दिन एसपी कलानिधि नैथानी और वन अधिकारियों की उपस्थिति में पकड़े गए वन्यजीव तस्कर अब्दुल आरिफ से विस्तार से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने वन्यजीवों की तस्करी से जुड़ी चौंकाने वाली जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस प्रकार थी—

आंध्र प्रदेश के जिला हैदराबाद के थाना कालापत्थर का एक गांव है ताड़वन. इसी गांव में मोहम्मद अब्दुल वाशिद अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटे और 2 बेटियां थीं. अब्दुल वाशिद ने समय से सभी बच्चों की शादी कर के अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली थी.crime news

शादियां हुईं तो परिवार बढ़ा, परिवार बढ़ा तो खर्चे भी बढ़े. ऐसे में अब्दुल वाशिद के 2 बेटे हैदराबाद जा कर रोजीरोजगार से लग गए. लेकिन सब से छोटे बेटे अब्दुल आरिफ को छोटेमोटे कामों से जैसे नफरत थी. वह हमेशा बड़ा आदमी बनने और करोड़ों में खेलने के सपने देखता था. यही वजह थी कि लोग उसे शेखचिल्ली कहने लगे थे.

इसी सब के चलते उस की मुलाकात फिरोज से हुई. दोनों की सोच एक जैसी थी, इसलिए जल्दी ही उन में दोस्ती हो गई. काम की बात चली तो फिरोज ने कहा, ‘‘मेरा कहा मानो तो मैं तुम्हें एक काम बताऊं. उस में थोड़ा रिस्क तो है, लेकिन पैसा बहुत है. अगर चालाकी से काम किया जाएगा तो रिस्क भी खत्म हो जाएगा.’’

‘‘पहले काम तो बताओ. बिना रिस्क के वैसे भी पैसा कहां मिलता है. अगर मोटी कमाई करनी है तो रिस्क तो उठाना ही पड़ेगा.’’ आरिफ ने कहा.

‘‘काम कोई खास मेहनत का नहीं है, उस में सिर्फ सावधानी की जरूरत है. काम करने लगोगे तो पैसों की बरसात होने लगेगी.’’ फिरोज ने कहा.

‘‘यार पहेलियां मत बुझाओ, काम बताओ. मैं पैसों के लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’ आरिफ ने उत्तेजित हो कर कहा.

‘‘काम कोई मुश्किल नहीं है, सिर्फ जंगली जानवरों को कार से ले आना है.’’

‘‘तुम कह रहे हो कि काम कोई मुश्किल वाला नहीं है. मैं जंगली जानवरों को कैसे पकड़ कर लाऊंगा?’’ आरिफ ने हैरानी से कहा.

‘‘जंगली जानवरों को तुम्हें पकड़ना नहीं है. पकड़ेगा कोई और, तुम्हें सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह कार से पहुंचाना है. इस के लिए तुम्हें आनेजाने के खर्च के साथसाथ जानवर जरूरत की जगह पहुंचाने के लिए मोटी रकम मिलेगी.’’ फिरोज ने कहा.

फिरोज द्वारा बताया गया यह काम अब्दुल आरिफ को पसंद आ गया तो वह काम करने को तैयार हो गया. इस के बाद फिरोज ने उस की मुलाकात मोहम्मद अब्दुल रहमान से करा दी. वह कालापत्थर के अलीबाग के रहने वाले अब्दुल अजीज का बेटा था. बातचीत के बाद आरिफ काम पर लग गया.

रहमान ने ही आरिफ को फहीम और इमरान के साथ पटना के रहने वाले डब्लू के यहां भेजा. आरिफ और उस के साथी उस इनोवा कार पर वाराणसी से सवार हुए थे. उस कार में जानवर हैं, इस की गंध किसी को न मिले, इस के लिए उस में तेज सुगंध वाला परफ्यूम छिड़क दिया गया था.

इन वन्यजीवों को बिहार से हैदराबाद तक पहुंचाने के लिए आरिफ को 50 हजार रुपए के अलावा रास्ते का पूरा खर्च दिया जाता. इस के अलावा प्रति जानवर 6 हजार रुपए इनाम भी मिलता. लेकिन आरिफ पुलिस को यह नहीं बता सका कि इन जानवरों का क्या किया जाएगा.

पूछताछ के बाद वन्यजीवों को वनविभाग को सौंप दिया गया. आरिफ के बयान के आधार पर देहात कोतवाली में उस के अलावा रहमान, इमरान, डब्लू और फहीम के खिलाफ भादंवि की धारा 9/51, 40, 39डी, 43, 48ए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मुकदमा दर्ज कर के आरिफ को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

अब्दुल आरिफ तो पकड़ा गया था, लेकिन उस के साथी फरार हो गए थे. एसपी कलानिधि नैथानी उन्हें भी पकड़ना चाहते थे. उन्हें उन के मोबाइल नंबर आरिफ से मिल गए थे. इसलिए उन्हें पकड़ने के लिए स्वाट, सर्विलांस तथा देहात कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम बना कर उन के पीछे लगा दी गई थी.

इस का नतीजा यह निकला कि 18 जनवरी को भरूहना चौकीप्रभारी पंकज कुमार राय ने आरिफ के साथी फहीम को मीरजापुर रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया. पूछताछ के बाद उसे भी जेल भेज दिया गया.

फहीम और आरिफ से पूछताछ में जो जानकारी मिली, उस के अनुसार ये जो जानवर ले जा रहे थे, उन्हें बंगाल के जंगलों से पकड़ा गया था. हैदराबाद इस तरह के जानवरों का बड़ा बाजार है. बिहार और बंगाल के जंगलों से पकड़े गए वन्यजीवों का उपयोग शक्तिवर्धक दवा बनाने में किया जाता है.

इन्हें पकड़ने के लिए पूरा एक रैकेट काम करता है. कुछ वनकर्मियों से भी इन की मिलीभगत होती है. इस रैकेट के बारे में किसी को भी पूरी जानकारी नहीं होती. हर व्यक्ति का काम बंटा होता है और हर आदमी को सिर्फ अपने काम के बारे में जानकारी होती है.

गिरफ्तार आरिफ और फहीम से 6 दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव बरामद हुए थे. इन में 5 कैरेकल कैट (जंगली बिल्ली) तथा 1 लैपर्ड कैट का बच्चा था. इन्हें न्यायालय के आदेश पर लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान भेज दिया गया था.crime news

इन जंगली जानवरों को हैदराबाद से पानी के जहाज से अन्य देशों में भेजा जाना था. वन्यजीव तस्करों का नेटवर्क भारत ही नहीं, नेपाल तक फैला है. तस्कर अपने एजेंटों के माध्यम से दुर्लभ और खूंखार जानवरों को खरीद कर लाखों कमाते हैं.

खूंखार जंगली जावरों को 10 लाख से एक करोड़ रुपए तक में बेचा जाता है. अब तक ये शेर, कैरेकल (एक प्रकार की जंगली बिल्ली), चीता, तेंदुआ सहित कई अन्य जानवरों की तस्करी कर चुके हैं.

तस्करों के पास से बरामद जंगली बिल्लियां दुर्लभ प्रजाति की थीं. उन की संख्या देश भर में 200 से भी कम है. पता चला है कि कुछ निजी चिडि़याघर चलाने वाले भी ऐसे जानवरों को खरीद कर अपने यहां रखते हैं. इस के लिए वे तस्करों को लाखों रुपए देते हैं.

– कथा पुलिस व मीडिया सूत्रों पर आधारित

जब एक मजबूर मर्द से हो गई एक बड़ी गलती

21 अप्रैल, 2017 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के थाना मिसरोद के थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह कुशवाह गश्त से लौट कर क्वार्टर पर जाने की तैयारी कर रहे थे कि 35-36 साल का एक आदमी उन के सामने आ खड़ा हुआ. उस के सीने से खून रिस रहा था. ऐसा लग रह था, जैसे उसे चाकू मारे गए हों, पर ठीक से लगे न हों. वहां गहरे घाव के बजाय गहरे खरोंच के निशान थे. उसे देख कर राजबहादुर सिंह को यह आपसी मारपीट का मामला लगा.

उस व्यक्ति ने अपना नाम सौदान सिंह कौरव बताया था. राजबहादुर सिंह ने थाने आने की वजह पूछी तो उस ने कहा, ‘‘साहब, मैं कौशलनगर के पास रहता हूं. आज रात 3 बजे 4 लोग मेरे घर में घुस आए और मेरी पत्नी मंगला से जबरदस्ती करने लगे. मैं ने और मेरी पत्नी ने विरोध किया तो उन्होंने हम दोनों की बुरी तरह से पिटाई कर दी. उस मारपीट में मेरी पत्नी को अधिक चोट लगी, जिस से वह बेहोश हो गई है.’’

घायल मंगला की मौत हो सकती थी, इसलिए थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह ने तुरंत एसआई राजकुमार दांगी को कौशलनगर भेजा. वहां पहुंच कर पता चला कि मकान की दूसरी मंजिल पर सौदान सिंह पत्नी मंगला और 2 बच्चों के साथ रहता था. राजकुमार कमरे पर पहुंचे तो देखा सामने पलंग पर मंगला लेटी थी. उन्होंने उसे नजदीक से देखा तो लगा वह मर चुकी है.

उन्होंने इधरउधर देखा तो कमरे की स्थिति देख कर कहीं से नहीं लगता था कि वहां किसी तरह का झगड़ा या मारपीट हुई थी. संदेह हुआ तो उन्होंने फोन द्वारा इस बात की जानकारी थानाप्रभारी राजबहादुर सिंह को दे दी.

मामला लूट और दुष्कर्म की कोशिश के साथ हत्या का था, इसलिए राजबहादुर सिंह ने तुरंत यह बात एसपी सिद्धार्थ बुहुगुणा एवं एसडीओपी अतीक अहमद को बताई और खुद सिपाहियों को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. अब तक वहां काफी भीड़ जमा हो चुकी थी.

राजबहादुर सिंह ने एक गहरी नजर सौदान सिंह के चेहरे पर डाली तो उन्हें उस के चेहरे पर छाए दुख के बादल बनावटी लगे. उन्हें अब तक की अपनी पुलिस की नौकरी में इतना तो अनुभव हो ही चुका था कि आदमी पत्नी के मरने पर किस तरह दुखी होता है.

उन्होंने सौदान सिंह के शरीर पर लगे चाकू के घावों को ध्यान से देखा तो उन्हें समझते देर नहीं लगी कि यह आदमी बहुत चालाक और मक्कार है. उस के घाव किसी दूसरे द्वारा मारे गए चाकू के नहीं हैं, इन्हें उस ने खुद चाकू मार कर बनाया है. लेकिन उन्होंने उस पर कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

उन्होंने मकान का निरीक्षण किया तो 2 कमरों के उस के मकान में बाहर के कमरे में डबलबैड के आकार का लंबाचौड़ा बिस्तर जमीन पर था. इस के अलावा किचन में भी एक बिस्तर जमीन पर ही लगा था. उस की ओर इशारा करते हुए राजबहादुर सिंह ने पूछा, ‘‘इधर कौन सोया था?’’

‘‘साहब, मैं यहीं सोता हूं.’’ सौदान सिंह ने कहा.

‘‘तुम यहां सोए थे तो तुम्हें घटना के बारे में कैसे पता चला?’’crime news

‘‘साहब, बाहर के कमरे में शोर हुआ तो मेरी आंखें खुल गईं. मैं उठ कर वहां पहुंचा तो देखा 4 युवक मेरी पत्नी के साथ जबरदस्ती कर रहे थे. वह उन का विरोध कर रही थी. मैं ने मंगला को बचाने की कोशिश की तो उन्होंने चाकू से मेरे ऊपर हमला कर दिया. अपने मकसद में सफल होते न देख उन्होंने मंगला पर भी हमला कर दिया.’’ सौदान ने कहा.

‘‘तुम्हारे बच्चे कहां हैं?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, वे तो मेरे मातापिता के पास लटेरी में हैं.’’

सौदान सिंह के इतना कहते ही थानाप्रभारी को समझते देर नहीं लगी कि मंगला की हत्या का आरोपी उन के सामने खड़ा है. क्योंकि बच्चे घर में होते तो वह पत्नी की हत्या नहीं कर सकता था. इस के अलावा उस ने जो अलग बिस्तर लगाया था, बच्चों के होने पर माना जाता कि एकांत पाने के लिए लगाया होगा. लेकिन जब बच्चे घर पर नहीं हैं तो अलग बिस्तर लगाने की क्या जरूरत थी?

पड़ोसियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि रात में किसी ने किसी तहर का शोरशराबा या चीखपुकार नहीं सुनी थी. राजबहादुर सिंह ने एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा को सारी जानकारी दी तो उन्होंने सौदान सिंह को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया.

राजबहादुर सिंह ने सौदान सिंह के मातापिता तथा मंगला के घर वालों को उस की हत्या की खबर दे दी थी. इस के बाद लाश का बारीकी से निरीक्षण कर घटनास्थल की औपचारिक काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था.

मंगला की हत्या की खबर पा कर सौदान सिंह का बड़ा भाई गोपाल सिंह तो भोपाल आ गया था, लेकिन मंगला के मायके से कोई नहीं आया था. राजबहादुर सिंह ने एक बार फिर सौदान सिंह से पूछताछ की, लेकिन मंझे हुए खिलाड़ी की तरह उस ने इस बार भी वही सारी बातें दोहरा दीं, जो वह पहले बता चुका था.

राजबहादुर सिंह ने कमरों के निरीक्षण में देखा था कि जिस कमरे में मंगला सोई थी, उस की कुंडी सहीसलामत थी. उसे बाहर से हाथ डाल कर नहीं खोला जा सकता था. सौदान सिंह ने बताया था कि रात को सोते समय बाहर वाला दरवाज अंदर से बंद था. राजबहादुर सिंह ने उस की आंखों में आंखें डाल कर पूछा, ‘‘रात को सोते समय दरवाजा अंदर से बंद था न?’’

‘‘जी साहब.’’

‘‘दरवाजा अंदर से बंद था तो वे लोग अंदर कैसे आए, क्या तुम ने दरवाजा खोल कर उन्हें अंदर बुलाया था?’’

‘‘नहीं…नहीं साहब, मैं तो अंदर वाले कमरे में सो रहा था.’’ सौदान सिंह ने घबरा कर कहा.

‘‘तो क्या दरवाजा मंगला ने खोला था?’’

‘‘हो सकता है, उसी ने खोला हो?’’ सौदान सिंह के मुंह से यह जवाब सुन कर राजबहादुर सिंह ने कहा, ‘‘इस का मतलब उन चारों को मंगला ने बुलाया था. अगर उन्हें उस ने बुलाया था तो उस ने शोर क्यों मचाया, उस की रजामंदी से चारों चुपचाप अपना काम कर के जा सकते थे.’’

सौदान सिंह थानाप्रभारी की इस बात का जवाब नहीं दे सका तो उन्होंने डांट कर कहा, ‘‘जो सच्चाई है, उसे खुद ही बता दो, वरना पुलिस सच्चाई उगलवाएगी तो तुम्हारी क्या हालत होगी, शायद तुम नहीं जानते. वैसे सच्चाई का पता हम सभी को चल चुका है. लेकिन हम तुम्हारे मुंह से हकीकत सुनना चाहते हैं कि तुम ने अपनी पत्नी की हत्या क्यों और कैसे की है?’’

सौदान सिंह तुरंत राजबहादुर सिंह के पैरों पर गिर कर रोते हुए बोला, ‘‘साहब, मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई. मैं ने ही मंगला की हत्या की है. साहब उस ने मुझे इस तरह मजबूर कर दिया था कि हत्या के अलावा मेरे पास कोई दूसरा उपाय ही नहीं बचा था. मैं मर्द हूं साहब, कितनी बेइज्जती सहता. बेइज्जती से तंग आ कर ही मैं ने उस की हत्या की है.’’

इस के बाद सौदान सिंह ने मंगला की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

सौदान सिंह मध्य प्रदेश के जिला विदिशा के थाना लटेरी के गांव सुनखेड़ा का रहने वाला था. प्राइमरी तक पढ़ा सौदान गांव में पिता के सथ कारपेंटर का काम करता था. इस के अलावा खेती की थोड़ी जमीन भी थी. इस तरह कुल मिला कर उस के परिवार की आराम से गुजरबसर हो जाती थी.

सौदान सिंह मातापिता के साथ खुश था. कोई 12 साल पहले उस की शादी भिंड की रहने वाली मंगला के साथ हो गई. पत्नी ने आते ही उस की जिंदगी बदल दी. वह इंटर तक पढ़ी थी. वह थी भी थोड़ी खूबसूरत. इसलिए उस के मित्र उस से जलने लगे थे.

जबकि सौदान उस से शादी कर के पछता रहा था. इस की वजह यह थी कि मंगला स्वच्छंद विचारों वाली थी. वह आजादी में विश्वास करती थी और ऐश की जिंदगी जीने की शौकीन थी. मंगला को अपनी सुंदरता का अहसास तब हुआ, जब गांव के लड़के उस के घर के चक्कर लगाने लगे. अपनी खूबसूरती का अहसास होते ही वह उन्हें अपनी खूबसूरती की झलक दिखा कर परेशान करने लगी थी. तभी घर वालों ने उस की शादी कर दी थी और इस तरह वह ससुराल आ गई.

ससुराल में मंगला सासससुर के रहते बिना सिर ढके से बाहर नहीं निकल सकती थी. जबकि स्वच्छंदता के लिए घर से बाहर जाना जरूरी था. इस के लिए मंगला ने अपने लिए पति के साथ शहर जाने का रास्ता निकाला.

सौदान सिंह से ज्यादा पढ़ीलिखी और उस से अधिक सुंदर होने की धौंस दे कर मंगला ने कहा, ‘‘मैं इस गांव में तुम्हारे साथ कब तक रह कर अपनी जिंदगी बेकार करूंगी. शहर चलो, गांव में कुछ नहीं रखा है. यहां रह कर हम न अपने लिए और न बच्चों के लिए 2 पैसे बचा पाएंगे. शहर में कमा कर कुछ जमा कर लेंगे.’’

लेकिन सौदान सिंह गांव में रहने वाले अपने मांबाप को छोड़ कर शहर नहीं जाना चाहता था. पर मंगला की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा. पत्नी के कहने पर 3 साल पहले सौदान सिंह भोपाल आ गया और कौशलनगर में किराए का मकान ले कर रहने लगा. उस ने टाइल्स लगाने का काम सीखा और इसे ही रोजीरोटी का साधन बना लिया.

सौदान सिंह अपने इस काम से इतना कमा लेता था कि उस की गृहस्थी अच्छे से चल रही थी. उस का सोचना था कि गांव से शहर आ कर मंगला सुधर जाएगी, लेकिन हुआ इस का उलटा. मंगला भोपाल आ कर सुधरने की कौन कहे, शहर आ कर उस की चाहतों ने और भी ऊंची उड़ान भरनी शुरू कर दी. उसे यहां कोई कुछ कहने टोकने वाला नहीं था.

2 बच्चों की मां होने के बावजूद उसे जवानी के न याद आ गए थे. एक ही इशारे में वह मनचलों को घायल कर देती थी. वहां भी मंगला ने अपने चाहने वालों की लाइन लगा दी थी. इस तरह की बातें ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रहतीं.

सौदान सिंह को जब पत्नी की हरकतों का पता चला तो उस ने उसे डांटाफटकारा ही नहीं, समझाया भी, पर उस पर न पति के समझाने का असर हुआ न डांटनेफटकारने का. क्योंकि वह तो उसे गंवार, जाहिल और मंदबुद्धि ही नहीं समझती थी, बल्कि बातबात में कम पढ़ेलिखे होने का ताना भी मारती थी.

दरअसल, मंगला पति पर हावी हो कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहती थी. लेकिन सौदान सिंह अकसर मंगला को टोकता रहता था.  आखिर खीझ कर मंगला ने सौदान सिंह को नीचा दिखाने का निर्णय कर अपने आशिकों को उस के सामने ही घर बुलाने लगी. यही नहीं, उस के सामने वह प्रेमियों के साथ बैडरूम में चली जाती थी.

इतने से भी उसे संतोष नहीं होता था. वह उसी के सामने मोबाइल पर अपने चाहने वालों से अश्लील बातें करती थी. सौदान सिंह मर्द था, पत्नी की इन गिरी हुई हरकतों से उसे गुस्सा तो बहुत आता था, पर बच्चों के बारे में सोच कर उस गुस्से को पी जाता था

पहले मंगला पति की ही उपेक्षा करती थी, लेन बाद में वह बच्चों की भी उपेक्षा करने लगी थी. वह सुबह ही काम पर चला जाता था. उस के जाने के बाद मंगला आशिकों के साथ घूमने निकल जाती थी. अगर बाहर नहीं जाती तो मोबाइल पर ही घंटों अपने चाहने वालों से बातें करती रहती थी.

ऐसे में मंगला को बच्चों के खानेपीने की भी चिंता नहीं रहती थी. अगर सौदान सिंह कुछ कहता तो वह उस से मारपीट करने पर उतारू हो जाती थी. कई बार तो उस पर हाथ भी उठा दिया था. मंगला को प्रेमियों से मिलने में किसी तरह की परेशानी न हो, इस के लिए उस ने नौकरी कर  ली. यह नौकरी उस के एक प्रेमी चंदेश ने लगवाई थी.

चंदेश हीरा कटाई की उस कंपनी में पहले से नौकरी करता था, उसी की सिफारिश पर मंगला को यह नौकरी मिली थी. इसी नौकरी की आड़ में मंगला और चंदेश की रासलीला आसानी से चल रही थी.

नौकरी लग जाने के बाद मंगला सौदान सिंह को और भी ज्यादा जलील करने लगी थी. वह उस से कहती थी कि हीरे की कद्र जौहरी ही करते हैं.

इधर मंगला का एक पुराना प्रेमी अमन भी आने लगा था. वह उस का शादी से पहले का प्रेमी था. शादी से पहले ही उस के मंगला से अवैध संबंध थे. अमन जब भी आता था, उस के घर पर ही रुकता था. मंगला के बारे में जब मोहल्ले की महिलाओं को पता चला तो वे उस के बारे में तरहतरह की बातें करने लगीं.

इस बदनामी से बचने के लिए सौदान सिंह ने मंगला से गांव चलने को कहा तो उस ने उसे धकियाते हुए कहा, ‘‘तुझे गांव जाना हो तो जा, मैं अब यहीं रहूंगी. मुझे अब तेरी जरूरत भी नहीं है.’’

धीरेधीरे मंगला की तानाशाही बढ़ती जा रही थी, जिस से सौदान सिंह काफी परेशान रहने लगा था. वह कईकई दिनों तक उसे अपने पास फटकने नहीं देती थी. वह जब भी उस के पास जाता, वह डांट कर कहती, ‘‘गंदे, जाहिल, तेरे शरीर से बदबू आती है. तू मेरे पास मत आया कर.’’crime news

सौदान सिंह को दुत्कार कर उस के सामने ही मंगला अपने प्रेमियों से हंसहंस कर अश्लील बातें करने लगी. पत्नी की इन हरकतों से तंग आ कर सौदान सिंह ने प्रण कर लिया कि अब इसे खत्म कर देगा. क्योंकि अगर अब यह उस की नहीं रही तो वह उसे किसी और के लिए भी नहीं छोड़ेगा. यही सोच कर उस ने 5 दिन पहले बच्चों को दादादादी के पास लटेरी पहुंचा दिया.

20 अप्रैल की रात खाना खा कर पतिपत्नी लेट गए. बच्चे घर पर नहीं थे, इसलिए सौदान सिंह ने मंगला से शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जाहिर की. लेकिन तभी मंगला के किसी प्रेमी का फोन आ गया. सौदान ने मंगला के हाथ से मोबाइल छीन कर फोन काटना चाहा तो उस ने उसे तमाचा मार दिया.

पतिपत्नी में झगड़ा होने लगा. सौदान सिंह ने गलती स्वीकार करते हुए एक बार फिर उस से शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जाहिर की. इस पर मंगला ने कहा, ‘‘अपनी औकात देखी है गंदी नाली के कीड़े. मेरे साथ संबंध बनाने के बारे में तूने सोच कैसे लिया. मैं तुझे अपना शरीर अब कभी नहीं छूने दूंगी.’’

मंगला की इस बात से सौदान सिंह हैरान रह गया. उस ने उसी समय तय कर लिया कि आज ही वह उसे खत्म कर देगा. उस ने लेट कर आंखें मूंद लीं. उस के बगल में लेटी मंगला अपने प्रेमी से फोन पर अश्लील बातें करती रही. करीब 45 मिनट तक मंगला ने फोन पर गंदीगंदी बातें कीं, जिन्हें सौदान सिंह सुनता रहा.

मंगला फोन काट कर सो गई. करीब 3, साढे़ 3 बजे सौदान उठा और पलंग के नीचे छिपा कर रखी लोहे की रौड निकाल कर पूरी ताकत से उस के सिर पर वार कर दिया. उसी एक वार में वह बेहोश हो गई. उसी बेहोशी की हालत में मंगला के सीने पर बैठ कर उस ने उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया.

पुलिस से बचने के लिए सौदान सिंह ने सीने पर चाकू मार कर घाव किए और थाने पहुंच कर पुलिस को लूट और जबरदस्ती की झूठी कहानी सुना दी. अपने बचाव के लिए उस ने दूसरे कमरे में खुद ही बिस्तर बिछाया था.

थानाप्रभारी ने सौदान सिंह की निशानदेही पर वह रौड बरामद कर ली थी, जिस से मंगला की हत्या की गई थी. पूछताछ और सारे साक्ष्य जुटा कर थाना मिसरौद पुलिस ने पत्नी के हत्यारे सौदान सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

सरकार का नोटबंदी और जीएसटी का लौलीपौप टांयटांय फिस

सरकार का नोटबंदी से काला बाजारियों को पकड़ने और जीएसटी से सारे देश को एक कर डालने का लौलीपौप टांयटांय फिस हो गया और गले में फांस बन कर अटका पड़ा है. ऐसा ही लौलीपौप मुफ्त बिजली साबित होगी. जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुफ्त पानी देने की घोषणा की थी, तो जिन लोगों ने उसे अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताया था, अब वे ही मुफ्त बिजली का ढिंढोरा पीट कर गरीबों के उत्थान की बात कर रहे हैं.

देश में बिजली की पैदाइश जरूरत से ज्यादा है, पर इसे घरघर, दुकानदुकान और फैक्टरीफैक्टरी पहुंचाना मुश्किल है. खर्चा तो तार डालने, खंभे खड़े करने, बिजली स्टेशन बनाने और रखरखाव में होता है और सरकार की कमर बिल न वसूलने पर नहीं, बल्कि इस सुविधा को घरघर पहुंचाने में टूट जाएगी.

बजाय इस के सरकार उद्योगों, व्यापारों और खेती को इतना ठीक करवाती कि हर जना अपनी खेती, अपना पानी, अपनी बिजली और अपना वाहन खुद खरीद कर सके, पर सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकारों की तरह मुफ्त बिजली बांटने पर जोर दिया है. 3 साल तक ढोल पीटने के बाद नरेंद्र मोदी अब समझ रहे हैं कि धर्म, राष्ट्रवाद और गौमाता के फरेब से जनता ऊब चुकी है और इसे सरकार से मुक्ति चाहिए जो दूसरी सरकारों की तरह यह दे ही नहीं सकती, इसलिए मुफ्त की बिजली का लौलीपौप दिया जा रहा है.

बिजली विज्ञान की सब से बड़ी देन है, जिस की वजह से सुरक्षा भी मिली है और रातदिन काम करने का मौका भी. किसानों को मौसम पर ही आंखें लगाए रखना जरूरी नहीं है. वे जब जरूरत हो, जमीन में छेद कर के पानी निकाल सकते हैं. बच्चे रातभर पढ़ सकते हैं. औरतें देर रात तक काम कर सकती हैं.

जिन घरों में बिजली के बिल देने लायक पैसे नहीं हैं, उन्हें मुफ्त बिजली मिले यह ठीक है, पर ऐसे घर हों ही क्यों? क्यों नहीं सरकार हर घर में एकदो नौकरियों का इंतजाम कर देती? क्यों नहीं सरकार बजाय व्यापारियों को कर्मचारी निकालने को मजबूर करने के उन्हें नए रखने के लिए इनाम देती, ताकि लोग ज्यादा नौकरियां पैदा करें?

मुफ्त की बिजली पर खर्च कोई ज्यादा नहीं होगा, पर जो लोग पहले मुफ्त पानी को ले कर आम आदमी पार्टी को कोस रहे थे, वे अब हक्केबक्के रह जाएंगे कि उन की चहेती पार्टी भी कर्मठता की जगह मुफ्तखोरी को बढ़ावा दे रही हैं. भारतीय जनता पार्टी की चिंता ठीक है क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी से जो माहौल पैदा हुआ है, वह गौभक्तों, विचारकों की हत्याओं, पूजापाठी स्टंटों के कारण अब और जहरीले धुएं से भर रहा है और पार्टी को अब बचाव के रास्ते ढूंढ़ने होंगे.

जनता को इस दौरान सरकार के हाथों कुछ खैरात मिल जाए, तो क्या हर्ज है?

अब यह बैंक दे रहा नकदी की होम डिलीवरी की सुविधा

आज कई सारे बैंक ऐसे हैं, जिन्होंने अब एटीएम निकासी पर शुल्क लेना शुरू कर दिया है. ऐसे में इंडसइंड बैंक ने अपने ग्राहको का पूरा खयाल रखने का मन बना लिया है. आपको बता दें कि इंडसइंड बैंक अपने ग्राहको को असीमित निकासी की सुविधा देने के साथ ही कई प्रीमियम बैंकिंग सर्विसेज भी मुफ्त में दे रहा है. इतना ही नहीं यह नकदी की होम डिलिवरी की सुविधा भी दे रहा है.

इंडस-इंड बैंक की वेबसाइट के अनुसार बैंक के ग्राहक अब देशभर में से किसी भी जगह से बैंक के एटीएम से असीमित निकासी की जा सकती है. इसके लिए आपसे कोई भी चार्ज नहीं लिया जाएगा. यह सेवा बिल्कुल मुफ्त होगी.

इंडसइंड बैंक आपके कैश की होम डिलिवरी भी करेगा. ग्राहक एक दिन में ही एक बार और अधिकतम एक लाख रुपये तक के ही कैश की मांग कर सकते है.

आप सीधे एग्जीक्यूटिव से संपर्क कर उनसे बात कर सकते हैं. आपको अन्य बैंकों की तरह आईवीआर को नहीं झेलना पड़ेगा.

बैंक अपको घर से नकद पिकअप की भी सुविधा भी दे रही है. ग्राहकों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बैंक को जानकारी देनी होगी. इसके बाद बैंक का एग्जीक्यूटिव खुद आपके घर पर आकर कैश को लेगा और आपके बैंक खाते में जमा कराएगा. जानकारी के लिए बता दें कि आप एक दिन में अधिकतम एक लाख रुपये तक नकद बैंक पिकअप करा सकते हैं साथ ही आप इस सेवा का फायदा एक दिन में एक ही बार लिया जा सकता है.

बैंक अपने ग्राहकों को नकद पिकअप के साथ साथ फ्री चेक पिकअप की सुविधा भी मुहैया करा रही है. इस सुविधा का लाभ प्रत्येक ग्राहक दिन में एक बार ले सकता है. इस प्रकार ग्राहक अपने घर पर बैठकर ही अपना चेक जमा करवा सकते हैं.

एक महीने के दौरान ग्राहक जितने भी चेक जारी करेंगे, उन सबके चेक के फोटो आपको बैंक स्टेटमेंट के साथ मिलेंगे. इसकी मदद से न केवल इश्यू किए गए चेक्स की कापी रहेगी, बल्कि ग्राहक को इन्हें याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

शिखर धवन ने इस खिलाड़ी को बताया डेथ ओवर का बादशाह

सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने भारत की छह विकेट की जीत के लिए गेंदबाजों को श्रेय देते हए कहा कि उन्होंने दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्टीय मैच में न्यूजीलैंड को कम स्कोर पर रोककर आधा काम कर दिया था. भारत ने पुणे में खेले गए दूसरे वनडे मैच में न्यूजीलैंड को हराकर तीन मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली.

अब निर्णायक मुकाबला 29 अक्टूबर को कानपुर में खेला जाएगा. धवन ने 68 और दिनेश कार्तिक ने 64 रन की नाबाद पारी खेली, जिससे भारत ने महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के स्टेडियम में चार ओवर रहते 230 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया था.

धवन ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘निश्चित रूप से, इन दिनों 230 रन का स्कोर ज्यादा नहीं है. गेंदबाजों ने सचमुच काफी अच्छा काम किया और फील्डरों ने भी उनका पूरा साथ दिया. गेंदबाजों ने हमारे लिए आधा काम कर दिया था. 230 रन के लक्ष्य का पीछा करने का दबाव निश्चित रूप से 300 रन के लक्ष्य का पीछा करने की तुलना में कम ही होगा.”

31 वर्षीय बल्लेबाज ने कहा, ‘‘भारत ने जब गेंदबाजी की तो कोई सीम मूवमेंट नहीं था और भारतीय गेंदबाजों ने बहुत ही कसी गेंदबाजी की और हमारे लिए अच्छा काम किया. हमने भी उनके तेज गेंदबाजों का अच्छी तरह सामना किया और उनके बल्लेबाजों की तुलना में अच्छा खेले.’’ धवन ने तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कमार की भी प्रशंसा की जिन्होंने 45 रन देकर तीन विकेट हासिल किए.

इस बल्लेबाज ने कहा, ‘‘उसने (भुवनेश्वर) ने अपना स्तर बढ़ा दिया है और मुझे लगता है कि वह काफी उच्च स्तर पर पहुंच गया है. उसका गेंदबाजी में नियंत्रण भी बहुत अच्छा है. यहां तक कि जब वह धीमी गेंद फेंकता है तो वह सुनिश्चित करता है कि यह सही लाइन एवं लेंथ में जाए.’’

उन्होंने आगे कहा कि, ”अगर डेथ ओवरों में गेंदबाजी की बात की जाए तो वो दुनिया के सबसे बेहतरीन डेथ ओवर गेंदबाज हैं. धवन ने कहा कि उन्होंने भुवनेश्वर कुमार को आईपीएल में लगातार डेथ ओवरों में यॉर्कर डालते देखा है और भारत के लिए खेलते हुए भी उन्होंने ऐसा किया है. वो लगातार काफी बेहतरीन तरीके से ऐसा कर रहे हैं.”

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