पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न सिर्फ महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर है बल्कि सियासत में भी उन्हें हाशिए पर रखा गया है. ऐसे में अखिल भारतीय जाट महासभा का अनिला सिंह को उपाध्यक्ष बनाना कई मानों में दिलचस्प और खास है. कैसे, इस के लिए शैलेंद्र ने उन से बातचीत की.  पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आर्थिक और सामाजिक रूप से राज्य का सब से अहम हिस्सा माना जाता है. लेकिन पिछले कुछ समय से प्रदेश का यह खुशहाल हिस्सा कई तरह की परेशानियों में घिर गया है. औरतों पर पाबंदी, औनर किलिंग, सांप्रदायिक तनाव और खराब कानूनव्यवस्था ने यहां के सामाजिक ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई है.
महिला राजनीति के हिसाब से देखें तो यह क्षेत्र आगे नहीं रहा है. हालांकि अब यहां की सोच बदल रही है. अखिल भारतीय जाट महासभा ने मुजफ्फरनगर की रहने वाली अनिला सिंह को उपाध्यक्ष बनाया. क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि वे अमरोहा संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ें. इस संबंध में अनिला सिंह के साथ एक खास बातचीत हुई. पेश हैं कुछ अंश :
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महिला राजनीति हाशिए पर रहती है. ऐसे में आप को लोग अमरोहा से चुनाव लड़ाने के प्रयास में क्यों हैं?
मेरा नाम रातोंरात सामने नहीं आया है. मैं पिछले 6-7 सालों से अमरोहा और आसपास के क्षेत्रों में काम कर रही हूं. मेरा अपना अंत्योदय फाउंडेशन है. इस के जरिए मैं गरीब और कम पढे़लिखे लोगों के बीच काम कर रही हूं. इन सभी को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, उस की जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर मदद देने के लिए काम करती रही हूं. कई होनहार बच्चों की फीस दे कर उन को आगे बढ़ाने में सहारा दिया. विधवा पैंशन, वृद्धावस्था पैंशन दिलाने का काम भी किया है. मेरा क्षेत्र के लोगों से वादा है कि अमरोहा को आम फल पट्टी के रूप में विकसित करने का काम करूंगी.
अमरोहा के राजनीतिक हालात कैसे हैं?
अमरोहा में करीब 16 लाख वोटर हैं.5 विधानसभा सीटें हैं. इन सभी पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है.  समाजवादी पार्टी की तरफ से विधायक से मंत्री बने नेता की पत्नी लोकसभा का टिकट हासिल कर चुकी हैं. क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि मैं उन का मुकाबला करूं. अमरोहा के हालात बाकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे ही हैं. मुजफ्फरनगर दंगों के बाद अखिलेश सरकार के प्रति दोनों ही समुदायों में नाराजगी फैली हुई है. कानून व्यवस्था की खराब हालत से लोग परेशान हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर रहा है. इस की क्या वजह आप को लगती है?
यहां का एक तबका पैसे वाला रहा है. पहले वह खेतीकिसानी से पैसे वाला था. गन्ने की खेती इस क्षेत्र के लोगों के लिए सोना थी. कुछ सालों से गन्ने की खेती उतनी मुनाफे की नहीं रही है. दिल्ली और उस से लगे एनसीआर क्षेत्र में जमीन के अधिग्रहण से किसानों को पैसा मिला. शहरों का विकास हुआ तो लोगों की जमीन ही सोना बन गई. ऐसे तमाम लोग रातोंरात पैसे वाले हो गए. जिन की जमीन बिकी इन्हीं में से बहुत सारे लोग शराब और दूसरी बुराइयों में फंस कर अपराध की दिशा में बढ़ गए. यहां की औरतें खेत में काम करने जाती हैं. शौच करने भी उन को खेतों में जाना होता है. ऐसे में वे अपराधियों का आसानी से निशाना बन जाती हैं. अपराधीतत्त्व चेन स्नेचिंग और लूटपाट कर के अपनी जरूरतें पूरी करते हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश खाप पंचायतों के फैसलों, खासकर औनर किलिंग, को ले कर बदनाम रहा है. इस की क्या वजह है?
औनर किलिंग का मुद्दा लड़कियों की शादी की आजादी से जुड़ा है. समाज में हर जगह ऐसे ही हालात हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा हरियाणा से लगा है. वहां का समाज इस को ले कर बहुत सख्त है. उस का कुछ असर इधर भी दिखता है. औरतों की आजादी में कानून व्यवस्था का अहम रोल होता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ ज्यादा हिंसा होने के चलते मांबाप अपनी लड़कियों को बाहर आनेजाने, मोबाइल फोन रखने, शहरों जैसे कपडे़ पहनने से मना करते हैं. उन को लगता है कि ऐसा करने से वे ज्यादा सुरक्षित रह सकती हैं. अगर कानून व्यवस्था की हालत में सुधार हो तो बाकी प्रदेश की तरह यहां की लड़कियों को भी ज्यादा आजादी हासिल हो सकेगी. धीरेधीरे हालात बदल रहे हैं.

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