चुनाव से पूर्व ओपिनियन पोल यानी सर्वेक्षण अंगूर जैसे हैं कि पक्ष में हों तो मीठे, खिलाफ  हों तो खट्टे. वैसे भी सर्वेक्षण कहते कुछ हैं और नतीजा होता है कुछ और. सवाल यह उठता है कि सर्वेक्षण के जरिए मतदाताओं का मूड भांपने का यह पैमाना सही है या फर्जी, पड़ताल कर रहे हैं जगदीश पंवार.

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