धर्म की दुकानदारी अंधभक्तों की भीड़ को सुख के सपने दिखाने पर टिकी है और बौद्ध धर्म इस बीमारी का अपवाद नहीं है. बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा भोपाल में नया कुछ नहीं बोले,  धर्म गुरुओं के पास नया कुछ बोलने को है भी नहीं. तमाम धर्म गुरु अपने बासे सिद्धांतों को नए शब्द देकर परोसते रहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे होटल ढाबे वाले रात की बासी दाल सब्जी को दोबारा फ्राय कर पैसा बनाते हैं. ग्राहक भी गरम और चटपटा खाकर जीभ के स्तर पर संतुष्ट हो लेता है, दिक्कत तब खड़ी होती है जब कभी ज्यादा बासी खाना पेट में जाकर बीमार कर देता है.

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