करीब 20 साल के बाद बिहार की राजनीति ने करवट बदली है और पुराने साथी से सियासी दुश्मन बनने और फिर दोस्त बनने तक लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने लंबा सफर तय कर लिया है. कांगे्रस और रामविलास पासवान के साथ छोड़ने के बाद अकेले पड़े लालू और भाजपा से अलग होने के बाद अलगथलग पड़े नीतीश ने अपनेअपने सियासी वजूद को बचाने के लिए एकदूसरे से हाथ मिलाना मुनासिब समझा. जिस जंगलराज के खिलाफ आवाज उठा कर नीतीश सत्ता तक पहुंचे थे, अब उसी जंगलराज के जिम्मेदार दलों के साथ हाथ मिला कर सियासी नैया पार लगाने की उम्मीद पाल बैठे हैं.

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