क्रिकेट में घोटाले के एक और मामले ने सियासी उबाल ला दिया है. आईपीएल के सरताज रहे ललित मोदी के साथ भाजपा की केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाजायज कारोबारी रिश्तों की बदनामी का दाग धुला भी नहीं था कि अब वित्त मंत्री अरुण जेटली के दामन पर क्रिकेट का कलंक चस्पां हो गया है.

बीसीसीआई, आईपीएल और राजस्थान, हिमाचल प्रदेश व जम्मूकश्मीर जैसे राज्य क्रिकेट संघों में व्याप्त अनियमितताओं के खुलासों के बाद ताजा मामला दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में भ्रष्टाचार का सामने आया है. मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार आमनेसामने हैं पर मामले में भाजपा मुसीबत से घिरी दिख रही है. उस के भ्रष्टाचारमुक्त भारत और अच्छे दिन आएंगे जैसे नारे झूठे साबित होते जा रहे है.

डीडीसीए में भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली कठघरे में हैं. जेटली करीब 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे हैं. उन पर सीधेसीधे आरोप तो नहीं हैं पर उन के कार्यकाल में हुए कोटला स्टेडियम के निर्माण व अन्य मामलों में हुई अनियमितताओं के चलते वे विपक्ष के निशाने पर हैं. जेटली पर आरोप कोई और नहीं, उन्हीं की पार्टी के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने लगाए हैं. दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने मामले की जांच शुरू कर केंद्र को और भड़का दिया. दिल्ली सरकार के जांच के आदेश के अधिकार पर ही सवाल उठाए गए और जेटली ने अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का दावा ठोंक दिया. इस मामले के बाद पहले से ही उभर रहे असंतोष के बीच भाजपा की सियासी और कानूनी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं.

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