नेताओं के करीब रहने वाले ज्यादातर नौकरशाहों के मन में जब सियासी महत्त्वाकांक्षा हिलोरें मारती है तो वे सियासतदां बनने को निकल पड़ते हैं. सवाल है कि अब तक जितने भी नौकरशाह सियासी अखाड़े में कूदे हैं उन में से कितनों ने ढर्रे पर घिस रही सियासत को बदला है या फिर देश का कोई भला किया है? पड़ताल कर रहे हैं बीरेंद्र बरियार ज्योति.

COMMENT