आज किरण को लंबे समय बाद मार्केट में सब्जी खरीदते देखा. वे काफी थकी और उदास दिख रही थीं. मैं ने पूछा, ‘‘आप की तबीयत तो ठीक है न?’’

वे कहने लगीं, ‘‘रोहन और अदिति अपनी आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली अपने मामामामी के पास शिफ्ट हो गए हैं. बच्चों के बिना घर का खालीपन खाने को दौड़ता है.’’ उन की आवाज में उदासीनता और अकेलेपन की पीड़ा का भाव साफ झलक रहा था.

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