आमतौर पर लोग दूसरों को सुनना पसंद नहीं करते. वे या तो उन की बातें अनसुनी करते हैं या अपनी बात को ही उन के सामने रखने पर जोर देते हैं, किंतु जितना जरूरी अच्छा वक्ता होना है उतना ही अच्छा श्रोता होना भी है. बोलना हर किसी को बहुत पसंद होता है. यही नहीं, कुछ लोग तो इतना बोलते हैं कि वे अपने आगे किसी दूसरे को बोलने का मौका तक नहीं देते. इस का साक्षात उदाहरण है महिलाओं की किटी पार्टी जिस में मानो एकदूसरे से बढ़चढ़ कर बोलने की प्रतिद्वंद्विता ही लगी रहती है. परंतु, अकसर, अधिक बोलने की आदत होने के कारण वे अपना ही नुकसान कर बैठते हैं. जरूरत से ज्यादा बोलने का नुकसान अधिक बोलने की आदत के कारण अकसर लोग सामने वाले से जरूरी बात करना या कहना भूल जाते हैं. अकसर सामने वाले को अपने बारे में अनावश्यक व्यक्तिगत बातें भी बता जाते हैं.

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