समाज एक व्यक्तियों का समूह है जहां हम सभी प्रेम, सौहार्द और एक दूसरे का ख्याल रखते हैं और यही भिन्न भिन्न समाज के समूह मिलकर एक अच्छे और सभ्य देश का निर्माण करते हैं.समाज में सभी को एक दूसरे की भावना, जरूरत और सहूलियत का ध्यान रखना होता है. लेकिन कई बार जब हमारे आसपास कोई नया व्यक्ति आता है तो उसके बोलने से लेकर काम करने की आदतों तक सभी कुछ इतना अजीब होता है और लोग  असहज होने लगते हैं. और सबसे बड़ी बात कि अमुक व्यक्ति को इस बात की कोई भी परवाह नहीं होती है.
सोचे अगर ऐसे ही हर व्यक्ति केवल अपने ही बारें में सोच कर दूसरे को असहज करें तो हमारी सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह अस्त व्यस्त हो जाएगी.आइए बात करते हैं कुछ बेहद ही सामान्य बातों की जिनका ध्यान रखकर हम सभी एक सभ्य समाज का निर्माण कर सकते हैं..-
पड़ोसियों से बात करते समय रखें इन बातों का ध्यान 
हम अपने पड़ोसी या किसी भी व्यक्ति से बात करते समय ध्यान रखे कि आपकी बातें उन पर किसी भी तरह से कोई फब्तियां तो नहीं कस रही है. आम तौर ये आदतें लगभग सभी में पायी जाती है कि हमें जो हमसे बेहतर दिख रहा है या पसंद नहीं आ रहा है.. उसकी हम पीठ पीछे तो मज़ाक बनाते ही है.. साथ ही मौका पाने पर सामने से मज़ाक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. अगर कोई बेहतर है तो मज़ाक बनाने के बजाय उनसे सीखने की कोशिश करें या किसी से आपको परेशानी है तो उससे सीधे जाकर अपनी परेशानी पर बात करें.
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मनमुटाव या कटुता रखने से किसी का फायदा नहीं होता लेकिन सकारात्मक सोच से हम खुद और समाज को बेहतर बना सकते हैं.2- आप अपने घर और आसपास की साफ सफाई जरूर करें, मगर साथ ही ये ध्यान रखे कि कचरे को खुले में बिल्कुल न छोड़े कि वो उड़कर दूसरों के दरवाजे, सड़क पर फैल जाए.. खासकर छोटे शहरों में लोग अपनी नाराजगी जताने के लिए भी ऐसा करते हैं.. ऐसी हरकतें न करें और न ही घर में किसी को करने दे.. ये सब आपकी असभ्यता को प्रदर्शित करता है.
साथ ही ऑफिस में भी ध्यान रखे कि कोई भी रैपर या नैपकिन यूँ ही डेस्क पर न छोड़े.. डस्टबिन में डालने की आदत बनाए.. किसी भी ऑफिस पार्टी या ट्रीट पर भी एक डस्टबिन रखवा ले और सबको उसी में used प्लेट, कप डालने को कहें..अपने आसपास स्वच्छ रखना हम सबकी ही जिम्मेदारी हैं.3- मदद के लिए हमेशा तैयार रहें और ऐसी भावना बच्चों में डाले.. क्या पता कब आपको किसी की जरूरत पड़ जाए तो उस समय आपको किसी को बुलाने पर झिझक न महसूस हो. साथ ही अच्छे और मददगार लोगों की एक टीम बनाए ताकि जरूरत पड़ने पर कोई न कोई तो मदद कर ही पाएगा.
बुजुर्गों का भी रखें खास ख्याल
समय समय पर समाज में रह रहे बुजुर्गों से बात करें और उनकी समस्याओं पर विचार कर रास्ता निकालने की कोशिश करें l बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं.4- एक आदत जो बड़ों, बच्चों सब में बहुत ज्यादा देखी जाती है कि खांसने, छींकने पर वो मुंह पर हाथ या रुमाल नहीं रखते. ये एक बहुत गलत आदत है. इससे आसपास बैठे लोगों को तो बुरा लगता है और साथ ही आपको खांसी, जुकाम या कोई इन्फेक्शन है तो बैक्टीरिया वातावरण में फैलने से दूसरों को होने का डर रहता है.ऐसा करने से बचें और बच्चों में भी ऐसी आदत न पलने दे. 5- किसी की कोई भी चीज़ छूने या इस्तेमाल करने से पहले उसकी इजाजत जरूर मांगे. अक्सर देखा जाता है कि पड़ोसी के गार्डन में कोई सुन्दर फूल खिला दिखता है तो हम उसे मौका पाते ही तुरंत तोड़ लेते हैं.. जबकि फूल तो बागों की शोभा बढ़ाने के लिए होते हैं . अगर आपको फूलों की जरूरत है भी तो तोड़ने से पहले परमिशन मांगे.
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