फिल्म ‘शोले’ के होली गीत, ‘‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिलेशिकवे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं...’’ के बजे बिना शायद ही कोई होली उत्सव पूरा होता है. होना भी नहीं चाहिए, क्योंकि इस गीत की अवधारणा से ही होली का जलसा पूरा होता है. एक यही त्योहार है जब रिश्तेनातों और पासपड़ोस में पुराने गिलेशिकवे भूल कर हम एकदूसरे के रंग में रंग जाते हैं.

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