विक्रांत सिंह राजपूत भोजपुरी सिनेमा के सब से स्मार्ट और फिट हीरो माने जाते हैं. उन्होंने ऐक्शनकौमेडी फिल्म ‘मुन्ना बजरंगी’ के साथ इस इंडस्ट्री में कदम रखा था, जिस के बाद उन्होंने ‘दूल्हा अलबेला’, ‘पायल’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘कर्तव्य’, ‘सैयां तूफानी’, ‘प्रेमलीला’ जैसी तकरीबन एक दर्जन से भी ज्यादा फिल्में कीं.

विक्रांत सिंह राजपूत द्वारा निभाए गए दमदार किरदारों की भोजपुरी सिनेमा उद्योग में हमेशा से चर्चा होती रही है. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

भोजपुरी फिल्मों में बने रहने के लिए आप क्या करते हैं?

किसी रोल का चुनाव करने में बहुत सावधानी बरतना मेरी पहली जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि मुझे मालूम है कि एक गलत कदम मुझे काम से बाहर करा सकता है. भोजपुरी फिल्म उद्योग में फिल्मों के चुनाव से मैं खुद एक अलग स्टैंडर्ड सैट कर चुका हूं, इसीलिए मैं हिट फिल्में देने का दबाव भी महसूस करता हूं. यहां गलाकाट होड़ मची है.

आप को कामयाबी कैसे मिली?

मुझे बचपन से ही ऐक्टिंग करने का शौक था. मैं स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया करता था. घर वालों को पता चला, तो मैं डरा हुआ था कि उन्हें यह सब पसंद न हों और गुस्सा करें, बल्कि इस के उलट वे बहुत खुश हुए. उन का सपोर्ट रहा और मेरे पापा खुद मुझे खुशीखुशी मुंबई छोड़ने आए थे.

‘मुन्ना बजरंगी’ मेरी पहली फिल्म थी और उस के बाद मुझे पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा. अब मेरी कई सारी फिल्में आ चुकी हैं. घर के लोगों से खुद की तारीफ सुनता हूं, तो खुशी होती है.

फिल्मों को चुनने में कलाकार को क्या क्या सावधानियां बरतनी होती हैं?

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