एक नेताजी बस में यात्रा कर रहे थे. थोड़ा अजीब लगता है लेकिन उस दिन शायद उन की कारें पत्नी के रिश्तेदारों की सेवा में लगी होंगी. यही एक ऐसी जगह होती है जहां किसी मर्द की कोई अपील काम नहीं करती. सो, उस दिन वे बस में यात्रा करने को मजबूर थे. लेकिन उन के पड़ोस वाली सीट पर एक सुंदर स्त्री आ कर बैठी जिस ने निहायत उम्दा सेंट लगा रखा था. वह यों महक रही थी कि नेताजी का ईमान डोलने लगा. वे धीरेधीरे उस के पास सरकने लगे. धीरेधीरे पास सरकने की या अवसर से न चूकने की कला सभी नेताओं को मानो घुट्टी में ही पिलाई जाती है.

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